सरकारी कांट्रैक्ट पर काम करने वाले क्रिस्टोफर पिछले छह महीनों के दौरान लगभग 700 नौकरियों के लिए आवेदन कर चुके थे। डीओजीई (DOGE) दौर में काम की कमी होने के कारण वे लगातार नए अवसरों की तलाश में थे, लेकिन अधिकांश आवेदनों पर उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। इन्हीं आवेदनों में से पांच आवेदन आईटी कंपनी एवरफोर्थ एपेक्स सिस्टम्स के लिए थे, जहां प्रारंभिक स्क्रीनिंग का जिम्मा राइली नाम के एक एआई रिक्रूटर के पास था। जून के महीने में जब राइली ने पहली बार उनसे संपर्क किया, तो क्रिस्टोफर काफी उत्साहित थे। उन्हें लगा कि एक वर्चुअल एजेंट के जरिए ही सही, कम से कम अपनी प्रतिभा और अनुभव को सामने रखने का अवसर तो मिल रहा है।
पहली फोन कॉल के दौरान क्रिस्टोफर ने अपनी कार्य योग्यता और पेशेवर पृष्ठभूमि से जुड़े सवालों के जवाब दिए। राइली ने आश्वासन दिया कि यदि उनकी योग्यताएं कंपनी के मानकों पर खरी उतरती हैं, तो मानव संसाधन टीम का कोई सदस्य जल्द ही उनसे संपर्क करेगा। हालांकि, हफ्तों बीत जाने के बाद भी किसी इंसान ने उनसे संपर्क नहीं किया। लेकिन इसके कुछ समय बाद ही राइली ने दोबारा मैसेज भेजकर एक अन्य पद के लिए इंटरव्यू देने को कहा। क्रिस्टोफर ने सोचा कि इस बार शायद स्थिति बेहतर होगी और उन्होंने फिर से एआई एजेंट के साथ कॉल पर बात की। यह सिलसिला एक या दो बार नहीं, बल्कि कुल पांच अलग-अलग नौकरियों के आवेदनों तक चला। हर बार इंटरव्यू होता था, लेकिन उसके बाद न तो कोई ईमेल आता था और न ही रिजेक्शन का कोई ऑटोमेटेड मैसेज।
जब उम्मीदवार ने एआई के सामने खड़ा कर दिया अपना एआई बॉट
पांचवीं बार जब राइली का मैसेज आया, तो क्रिस्टोफर का धैर्य जवाब दे गया। उन्होंने सोचा कि अगर नियोक्ता कंपनी उम्मीदवार की स्क्रीनिंग के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई का सहारा ले सकती है, तो एक उम्मीदवार के तौर पर वे भी इसी तकनीक का इस्तेमाल क्यों न करें। क्रिस्टोफर ने चैटजीपीटी वॉयस (ChatGPT Voice) ऐप खोला और उसमें अपनी कार्य पृष्ठभूमि से जुड़ी कुछ मुख्य बातें इनपुट कर दीं। उन्होंने चैटजीपीटी को निर्देश दिया कि वह इंटरव्यू के दौरान क्रिस्टोफर बनकर ही राइली के सवालों के जवाब दे। इसके बाद जैसे ही एवरफोर्थ एपेक्स के वर्चुअल रिक्रूटर राइली की कॉल आई, क्रिस्टोफर ने दोनों फोन को एक-दूसरे के पास रख दिया और दोनों एआई एजेंट आपस में बात करने लगे।
यह पूरी कॉल लगभग 10 मिनट तक चली। बातचीत के दौरान दोनों बॉट बेहद पेशेवर और विनम्र नजर आ रहे थे। राइली ने चैटजीपीटी से कहा कि आपसे बात करके बहुत अच्छा लगा, वहीं चैटजीपीटी ने जवाब दिया कि वह कंपनी की स्पष्ट और सीधी भर्ती प्रक्रिया की सराहना करता है। इस बातचीत का सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब दोनों एआई एजेंट संभावित जॉइनिंग डेट तय करने की कोशिश कर रहे थे। इस दौरान ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया और बैकग्राउंड जांच के मानकों को लेकर दोनों बॉट एक गोल-मोल बातचीत के चक्रव्यूह में फंस गए। अंत में राइली ने फिर वही पुराना वादा दोहराया कि अगर आवेदन मानकों पर खरा उतरता है तो भर्ती अधिकारी संपर्क करेंगे। क्रिस्टोफर ने इस अनुभव को सिंथेटिक डेटा का एक बेकार पहिया करार दिया, जहां एक एआई दूसरे एआई को डेटा दे रहा था और वह डेटा कहीं भी इस्तेमाल नहीं हो रहा था।
भर्ती प्रक्रिया में वॉयस एआई का बढ़ता दायरा और तकनीकी चुनौतियां
आज के दौर में नौकरी की तलाश से लेकर उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग तक एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, लेकिन वॉयस एआई को इंटरव्यू में लागू करना हमेशा से एक कठिन इंजीनियरिंग चुनौती रहा है। रिक्रूटमेंट प्लेटफॉर्म ग्रीनहाउस में वॉयस एआई के प्रमुख ओफिर सैमसन के अनुसार, इंसानी बोलचाल की बारीकियों जैसे कि अलग-अलग लहजे (एक्सेंट) को समझना, बीच में उम्म या अह जैसे शब्दों को संभालना और उम्मीदवार की बात को बिना काटे सुनना एक जटिल तकनीकी समस्या होती है। इसके बावजूद, बड़ी संख्या में आ रहे आवेदनों को संभालने के लिए कंपनियां इन टूल्स का रुख कर रही हैं। ग्रीनहाउस के आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 63 प्रतिशत नौकरी तलाशने वाले उम्मीदवारों ने किसी न किसी रूप में एआई आधारित इंटरव्यू का सामना किया है।
जैसे-जैसे कंपनियां स्क्रीनिंग के लिए एआई का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं, वैसे-वैसे उम्मीदवार भी इंटरव्यू पास करने के लिए एआई टूल्स की मदद ले रहे हैं। यह चलन इतना बढ़ चुका है कि रिबन जैसी नई एआई रिक्रूटमेंट स्टार्टअप कंपनियां अब ऐसे एल्गोरिदम बना रही हैं जो यह पहचान सकें कि उम्मीदवार के जवाब एआई की मदद से तैयार किए गए हैं या नहीं। कॉल सेंटर समाधान प्रदान करने वाली कंपनी आईक्योर के संगठनात्मक विकास के उपाध्यक्ष मार्क मोनाघन का मानना है कि बॉट और बॉट के बीच होने वाले इंटरव्यू भर्ती प्रक्रिया का अगला स्वाभाविक चरण हैं। उन्होंने कहा कि यदि कंपनियां उम्मीदवारों का समय बचाने के बजाय बॉट भेजेंगी, तो उम्मीदवार भी जवाब में अपना बॉट ही भेजेंगे।
आदर्श उम्मीदवार का फर्जी प्रोफाइल बनाकर की गई नई जांच
पांच बार नाकाम रहने के बाद क्रिस्टोफर ने यह जांचने का फैसला किया कि समस्या एआई तकनीक में है या उनकी अपनी योग्यताओं में। उन्होंने एवरफोर्थ एपेक्स की वेबसाइट पर पोस्ट की गई एक नौकरी की आवश्यकताओं को ध्यान से पढ़ा और एक फर्जी प्रोफाइल तैयार किया। उन्होंने इस काल्पनिक उम्मीदवार का नाम डॉन डिकनर रखा और उसके रिज्यूमे में वही सारी योग्यताएं भर दीं जो कंपनी को अपने आदर्श उम्मीदवार में चाहिए थीं। आवेदन जमा करते ही राइली का तुरंत मैसेज आया और इंटरव्यू की प्रक्रिया शुरू हुई।
इस बार चैटजीपीटी ने डॉन डिकनर बनकर राइली से 23 मिनट तक लंबी बातचीत की। इस दौरान चैटजीपीटी ने परिचालन सुधार, दबाव के समय ग्राहक अनुभव को बनाए रखने और कंपनी के आंतरिक ज्ञान को सुरक्षित रखने जैसे जटिल विषयों पर बेझिझक जवाब दिए। चैटजीपीटी के पास हर सवाल का सटीक जवाब था और उसने हर योग्यता के समर्थन में व्यक्तिगत उदाहरण भी पेश किए। जब इंटरव्यू समाप्त हुआ तो चैटजीपीटी ने कंपनी से जुड़े कुछ सवाल भी पूछे। राइली ने कहा कि आवेदन का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन किया जाएगा और योग्य पाए जाने पर भर्ती अधिकारी संपर्क करेंगे। हालांकि, इस ड्रीम कैंडिडेट के मामले में भी कंपनी या उसके एआई रिक्रूटर की ओर से कभी कोई दोबारा संदेश नहीं आया। एवरफोर्थ एपेक्स सिस्टम्स ने इस पूरे मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है।



















