अकादमिक जगत और कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रयोगशालाओं के बीच खींचतान अब सतह पर आ चुकी है। गणितीय शोध के पारंपरिक तरीकों को दरकिनार करते हुए नतीजों की त्वरित घोषणा करने की होड़ ने विद्वानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी की गणितज्ञ ब्रायना क्रा के अनुसार, जब ओपनएआई ने अगस्त में विशेषज्ञों के साथ बैठक की थी, तो उस संवाद से एक उम्मीद जगी थी। शोधकर्ताओं ने कंपनी से साफ तौर पर आग्रह किया था कि वह अपने निष्कर्षों को सोशल मीडिया या छोटे ब्लॉग पोस्ट तक सीमित न रखे। समुदाय चाहता था कि व्यवस्थित शोध पत्र तैयार किए जाएं ताकि अन्य विद्वान उन निष्कर्षों की सत्यता परख सकें, उन्हें समझ सकें और अपने काम में उनका उपयोग कर सकें। हालांकि, अकादमिक जगत के इस सुझाव पर तकनीकी फर्म ने ध्यान नहीं दिया।
कंपनी से जुड़े सूत्रों के संकेत हैं कि अगस्त की चर्चा में शामिल सैकड़ों गणितीय निष्कर्षों को गिटहब पर सार्वजनिक करने की तैयारी की गई है। मौजूदा साल में अत्याधुनिक मॉडलों की बढ़ती ताकत के चलते मशीन द्वारा निकाले गए समाधानों की संख्या हजारों तक पहुंच चुकी है। इस पृष्ठभूमि में ओपनएआई के प्रतिनिधि मैकलम का कहना है कि 28 अगस्त को एक आंतरिक मॉडल का प्रशिक्षण शुरू किया गया था। मैकलम के अनुसार, इस नए सिस्टम ने नेवियर-स्टोक्स जैसी प्रतिष्ठित मिलेनियम प्राइज पहेली के अलावा विभिन्न शाखाओं से जुड़ी 100 से अधिक पुरानी अनसुलझी समस्याओं का समाधान निकाल लिया है। मैकलम का कहना है कि वे इंस्टीट्यूट फॉर एडवांस्ड स्टडी के सलाहकार समूह की सिफारिशों के आधार पर परिणामों को जिम्मेदारी से साझा करने की प्रक्रिया में जुटे हैं, हालांकि इसके लिए कोई निश्चित समय तय नहीं किया गया है।
प्रतिद्वंद्विता और सार्वजनिक निर्गम की दौड़
अकादमिक हलकों का मानना है कि ओपनएआई और उसकी प्रतिस्पर्धी कंपनी एंथ्रोपिक ने शुद्ध गणित को अपनी क्षमता दिखाने का अखाड़ा बना लिया है। दोनों ही तकनीकी कंपनियां आगामी विशाल सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की तैयारी में व्यस्त हैं। इस कॉरपोरेट होड़ में दूसरों को पछाड़ने की हड़बड़ी इतनी ज्यादा है कि वैज्ञानिक प्रमाणिकता, समीक्षा और पूर्व शोधकर्ताओं को श्रेय देने की सदियों पुरानी व्यवस्था को हाशिए पर धकेल दिया गया है।
इस टकराव का सबसे तीखा उदाहरण सितंबर में सामने आया। जब यह चर्चा फैली कि कुछ शोधकर्ता एक ऐतिहासिक समस्या के समाधान के बेहद करीब हैं, तो ओपनएआई ने मिलेनियम प्राइज से जुड़ी दस लाख डॉलर की इनामी पहेली सुलझाने के लिए हजारों एआई एजेंट सक्रिय कर दिए। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के गणितज्ञ ट्रिस्टन बकमैस्टर ने आरोप लगाया कि ओपनएआई ने उनके शोध से आगे निकलने की कोशिश की। बकमैस्टर इस समस्या के एक हिस्से पर एंथ्रोपिक के कर्मचारी लेवेंट अल्पागे के साथ निजी तौर पर मिलकर काम कर रहे थे। दोनों ने अपने काम को सार्वजनिक नहीं किया था, लेकिन वे सहायता के लिए ओपनएआई के टूल्स का इस्तेमाल कर रहे थे।
श्रेय को लेकर हुआ विवाद और धमकियां
शोध के श्रेय को लेकर हुई बातचीत के दौरान तनाव काफी बढ़ गया। बकमैस्टर का दावा है कि ओपनएआई के शोधकर्ता सेबेस्टियन बुबेक ने सुझाव दिया कि किसी भी साझा पत्र से अल्पागे को अलग रखा जाना चाहिए ताकि प्रक्रिया जटिल न हो। हालांकि, बुबेक ने बाद में सार्वजनिक तौर पर इस बात से इनकार किया कि उन्होंने अल्पागे का नाम हटाने की मांग की थी। एक चर्चा के दौरान बुबेक ने एंथ्रोपिक की गतिविधियों को लेकर चिंता जताई कि प्रतिस्पर्धी फर्म भी मिलेनियम प्राइज जीतने के लिए अपने सारे कंप्यूटिंग संसाधन झोंक सकती है।
वार्ता के दौरान दर्ज विवरणों से पता चलता है कि जब बकमैस्टर ने काम चोरी होने की बात मीडिया में ले जाने की चेतावनी दी, तो बुबेक ने उनके करियर को नुकसान पहुंचने का अंदेशा जताया। इस तरह के बर्ताव पर कड़ा एतराज जताते हुए न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के विजिटिंग प्रोफेसर नेस्टर गुइलेन ने कहा कि गणितज्ञों के बीच एआई कंपनियों के रवैये को लेकर किसी गिरोह जैसी धारणा बन रही है। दूसरी ओर, मैकलम ने इस तरह के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। गुइलेन का मानना है कि गणितज्ञों की घबराहट केवल नई तकनीक को लेकर नहीं है, बल्कि एक ही जगह पर असीमित शक्ति और संसाधनों के जमावड़े को लेकर है।
ब्लॉग और सोशल मीडिया पर घोषणाओं का चलन
सितंबर के मध्य में ओपनएआई ने एक सलाहकार समिति गठित की थी, जिसका काम नए परिणामों के मूल्यांकन, शैक्षणिक मानदंडों के पालन और शोध-अनुकूल उपकरण तैयार करने में मदद करना था। इसके बावजूद गणितज्ञों का कहना है कि कंपनी की कार्यशैली में कोई ठोस सुधार नहीं दिखा है। शोधकर्ताओं को इस बात से भारी निराशा है कि बुनियादी शोध पत्र छापने के बजाय ब्लॉग पोस्ट के जरिए घोषणाएं की जा रही हैं। इस तरीके से यह समझना मुश्किल हो जाता है कि पूर्व शोधकर्ताओं के किस काम का सहारा लिया गया था।
अकादमिक प्रक्रिया की उपेक्षा का चलन केवल बड़ी प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है। खुद अल्पागे ने भी 87 साल पुरानी एक परिकल्पना को खारिज करने की घोषणा विश्व कप फाइनल के तुरंत बाद एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कर दी थी। ब्रायना क्रा का स्पष्ट मानना है कि सोशल मीडिया पोस्ट और प्रेस विज्ञप्तियों के जरिए गणित का संचालन करना उस अकादमिक तंत्र के लिए ठीक नहीं है, जिसकी बदौलत इन एआई मॉडलों को तैयार होने की उपजाऊ जमीन मिली थी।
सत्यापन के नए साधन और भविष्य की आशंकाएं
मशीन आधारित गणितीय हल की बाढ़ को देखते हुए विद्वानों ने इस साल नए मंच तैयार किए हैं। इनमें हेक्सागोन नामक मंच मुख्य रूप से एआई-निर्मित सामग्री को संजोने के लिए बनाया गया है, जबकि पालोमार का उपयोग मशीनों द्वारा सत्यापित गणितीय नियमों के पंजीकरण के लिए किया जाता है। ओपनएआई को इन मंचों का उपयोग करने का सुझाव दिया गया था, लेकिन ब्रायना क्रा के अनुसार कंपनी ने अपनी नीति में कोई बदलाव नहीं किया। क्रा का यह भी कहना है कि कंपनी का आचरण लीडेन घोषणापत्र की भावना से मेल नहीं खाता, जिसमें चार हजार से अधिक गणितज्ञों ने एआई कंपनियों से अकादमिक मानकों का पालन करने की मांग की थी।
तकनीकी फर्म के भीतर कुछ कर्मचारियों का ऐसा भी मानना है कि इस नई तकनीक ने पारंपरिक गणित की जरूरत को ही समाप्त कर दिया है। अगस्त की बैठक में जब इंसानी शोधकर्ताओं से आगे निकलने की स्थिति को काल्पनिक संदर्भ में पेश किया गया, तो वहां मौजूद कई विशेषज्ञों को यह आने वाले खतरे की पूर्व सूचना जैसा लगा। बुबेक का सोचना रहा है कि यह तकनीक जल्द ही कई गणितज्ञों के करियर को प्रभावित कर सकती है, हालांकि सार्वजनिक बातचीत में उन्होंने दावा किया कि अधिक सक्षम एआई गणितज्ञों को बड़े सवाल हल करने और वास्तविक दुनिया की चुनौतियों से जुड़ने में मदद करेगी। दूसरी तरफ, ब्रायना क्रा मानती हैं कि भले ही काम करने का तरीका बदल जाए, लेकिन यह क्षेत्र खत्म नहीं हुआ है, बल्कि यह समय अधिक बड़ा सोचने और सतर्क रहने का है।



















