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स्पेसएक्स के हाथ में जाने के बाद क्या कर्सर पर चलते रहेंगे ओपनएआई और एंथ्रोपिक के मॉडलएआई
2 घंटे पहले· 2

स्पेसएक्स के हाथ में जाने के बाद क्या कर्सर पर चलते रहेंगे ओपनएआई और एंथ्रोपिक के मॉडल

एलन मस्क की स्पेसएक्स कर्सर को खरीदने जा रही है, और अब पूरी एआई इंडस्ट्री के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसे प्रतिद्वंद्वी अपने मॉडल इस कोडिंग टूल पर चलने देंगे या रोक देंगे।

माइकल एंडरसनमाइकल एंडरसनअमेरिका संवाददाता 7 मिनट पढ़ें AI के लिए
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एलन मस्क की स्पेसएक्स के कर्सर को खरीदने का ऐलान होते ही पूरी एआई इंडस्ट्री एक ही सवाल पर टिक गई है। सवाल यह है कि जब यह लोकप्रिय कोडिंग स्टार्टअप मस्क की कंपनी का हिस्सा बन जाएगा, तब क्या ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसे मुकाबले में खड़े एआई लैब अपने मॉडल इसके अंदर चलने देंगे, या फिर वे अपने दरवाजे बंद कर लेंगे।

यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि दूसरी कंपनियों के एआई मॉडल हमेशा से कर्सर के कारोबार की रीढ़ रहे हैं। बीते कुछ सालों में कंपनी ने खुद के मॉडल ट्रेन करना शुरू जरूर किया है, लेकिन उसने हमेशा अपने यूजर्स को यह छूट दी है कि वे एंथ्रोपिक, ओपनएआई और बाकी लैब के अलग-अलग मॉडलों में से कोई भी चुनकर अपने कोडिंग असिस्टेंट को चला सकें।

इसी रणनीति की बदौलत कर्सर ग्राहकों को हर पल वही मॉडल परोस पाता था, जो उस वक्त सबसे बढ़िया या सबसे सस्ता होता था। इसका फायदा एंथ्रोपिक और ओपनएआई को भी मिला, क्योंकि ये दोनों कर्सर को अपने सबसे बड़े ग्राहकों में गिनते हैं और अपनी मार्केटिंग सामग्री में इस स्टार्टअप को खास जगह देते हैं।

कर्सर के करीबी लोगों की मानें तो कंपनी की उम्मीद यही है कि इस साल के आखिर में स्पेसएक्स का अधिग्रहण पूरा होने के बाद भी वह अपने एआई कोडिंग प्रोडक्ट को एक खुले मंच की तरह चलाती रहे, यानी अपने मॉडलों के साथ-साथ एंथ्रोपिक, ओपनएआई और दूसरे लैब के मॉडल भी परोसती रहे। लेकिन असल में यह सब कैसे होगा, इस पर संदेह बना हुआ है, और कर्सर मॉडल के मामले में तटस्थ रह पाएगा या नहीं, यही आज एआई इंडस्ट्री के सामने खड़े सबसे बड़े सवालों में से एक है।

पहले से तनी हुई एक रिश्तेदारी

कर्सर से मुकाबला करने वाले छोटे एआई कोडिंग स्टार्टअप फैक्ट्री के सह-संस्थापक और मुख्य तकनीकी अधिकारी एनो रेयेस को भरोसा नहीं है कि स्पेसएक्स के प्रतिद्वंद्वी सिर्फ इसलिए कर्सर का रास्ता अपने आप बंद कर देंगे क्योंकि अब इसका मालिक एक प्रतिस्पर्धी एआई लैब होगा। रेयेस कहते हैं, "मुझे नहीं पता कि यह फैसला इतना दो-टूक है।" वे आगे जोड़ते हैं, "हमारे लिए तो यह बिल्कुल साफ नहीं है।"

कर्सर ने इस पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। एंथ्रोपिक, ओपनएआई और स्पेसएक्स ने टिप्पणी के अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया।

ओपनएआई और एंथ्रोपिक के साथ कर्सर के रिश्ते की परीक्षा पहले भी हो चुकी है। पहले कर्सर इन एआई लैब का साथी बनकर उनके मॉडलों को अपने कोडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों तक पहुंचाता था। लेकिन अब वह इन्हीं के साथ सीधी टक्कर में आ गया है, क्योंकि ओपनएआई का कोडेक्स और एंथ्रोपिक का क्लॉड कोड इन कंपनियों के कारोबार का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं। स्पेसएक्स का अधिग्रहण इस होड़ को और तीखा ही करेगा।

सौदे पर अभी चुप्पी क्यों

स्पेसएक्स और कर्सर फिलहाल यह ज्यादा खुलकर नहीं बता सकते कि अधिग्रहण के बाद वे कैसे काम करेंगे। इसकी एक वजह यह भी है कि यह सौदा अभी बंद नहीं हुआ है और अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग में जमा किए गए स्पेसएक्स के दस्तावेजों के मुताबिक यह अब भी "जरूरी नियामकीय मंजूरियों" के अधीन है। लेकिन स्पेसएक्स को कर्सर की संपत्तियां, ग्राहकों के अनुबंध और बौद्धिक संपदा मिलने वाली है। इसका सीधा मतलब है कि अगर ओपनएआई और एंथ्रोपिक को कर्सर के यूजर्स तक पहुंचना है, तो अब उन्हें मस्क के साथ कारोबार करना होगा।

अधिग्रहण पूरा होने के बाद यह मुमकिन है कि स्पेसएक्स तय करे कि वह अपने ही दो सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वियों, यानी अत्याधुनिक एआई बनाने की दौड़ में खड़े एंथ्रोपिक और ओपनएआई की तरफ कारोबार भेजना नहीं चाहता। दूसरी तरफ एंथ्रोपिक और ओपनएआई भी यह मान सकते हैं कि वे अपने मॉडल मस्क के मालिकाना हक वाले किसी प्रोडक्ट के जरिए बेचना नहीं चाहते, क्योंकि इन दोनों कंपनियों के सीईओ डारियो अमोदेई और सैम ऑल्टमैन की मस्क से पहले भी ठन चुकी है।

पुराना इतिहास और बदलते समीकरण

एआई लैब आपस में एक-दूसरे को मॉडल बेचने के मामले में अब तक नरमी नहीं दिखाते रहे हैं। पिछले साल जैसे ही यह खबर आई कि ओपनएआई एआई कोडिंग स्टार्टअप विंडसर्फ को खरीद रहा है, एंथ्रोपिक ने फौरन उसकी पहुंच काट दी थी (हालांकि वह सौदा आखिरकार सिरे नहीं चढ़ा)। एंथ्रोपिक के सह-संस्थापक जेरेड कैपलन ने उस वक्त कहा था कि "ओपनएआई को क्लॉड बेचना अटपटा होगा।" उसके बाद के महीनों में एंथ्रोपिक ने ओपनएआई और स्पेसएक्स को अपने क्लॉड मॉडलों के इस्तेमाल से रोकने की कोशिश की है।

लेकिन अब हवा बदल सकती है। एंथ्रोपिक ने हाल ही में स्पेसएक्स से कंप्यूटिंग संसाधन खरीदने के लिए अरबों डॉलर का सौदा किया है। इससे यह संकेत मिलता है कि अमोदेई और मस्क अपने साझा दुश्मन, यानी ओपनएआई को मात देने की खातिर अपने मतभेद किनारे रखने को तैयार हो सकते हैं। कंप्यूटिंग की यह साझेदारी अकेले ही एंथ्रोपिक के लिए कर्सर में अपने मॉडल परोसते रहने की काफी बड़ी वजह बन सकती है।

ओपनएआई का दांव भी लगा है

ओपनएआई के पास कर्सर के साथ जुड़े रहने की अपनी अलग वजहें हो सकती हैं। यह स्टार्टअप ओपनएआई का बड़ा साझेदार है, और ओपनएआई के अधिकारी पहले इसे खरीदने को लेकर शुरुआती बातचीत भी कर चुके हैं। ओपनएआई का स्टार्टअप फंड कर्सर के सबसे शुरुआती निवेशकों में से एक था और उसने कंपनी के सीड तथा सीरीज ए फंडिंग राउंड में हिस्सा लिया था। कर्सर के करीबी लोगों के मुताबिक इस अधिग्रहण के चलते ओपनएआई के स्टार्टअप फंड को अपने निवेश पर स्पेसएक्स के शेयरों की शक्ल में मोटा मुनाफा मिलने वाला है।

ओपनएआई अपनी वेबसाइट पर कहता है कि कंपनी खुद सीधे तौर पर ओपनएआई के स्टार्टअप फंड में निवेशक नहीं है। इस फंड को शुरू में ऑल्टमैन ने ही खड़ा और संचालित किया था। इस फंड में बाहरी पक्ष, जैसे माइक्रोसॉफ्ट और ओपनएआई के दूसरे साझेदार निवेश करते हैं।

मॉडल की आजादी की बढ़ती मांग

पलंटीर के सीईओ एलेक्स कार्प ने इसी हफ्ते सीएनबीसी पर वायरल हुई एक बातचीत में उस बड़ी चिंता को सामने रखा, जो एआई इंडस्ट्री में लगातार सुनाई दे रही है। वह चिंता यह है कि कंपनियां चंद बड़े एआई लैब के साथ बंधकर रह जाने से ऊब रही हैं और उन्हें ज्यादा विकल्प चाहिए।

फैक्ट्री के सीटीओ रेयेस कहते हैं कि "मॉडल इंडिपेंडेंस", यानी किसी एक एआई लैब की तकनीक से न बंधने की सहूलियत, उन फॉर्च्यून 500 कंपनियों के लिए बेहद अहम है, जिनसे उनकी बात होती है, क्योंकि इससे उन्हें लचीलापन मिलता है। रेयेस मानते हैं कि यही वह बड़ी बढ़त है जो उनके जैसे स्वतंत्र एआई कोडिंग स्टार्टअप को बड़े एआई लैब पर हासिल है। कर्सर भी अतीत में अपनी इसी आजादी को अपनी ताकत के तौर पर पेश करता रहा है।

किसी लैब से सीधे जुड़ने का फायदा

हालांकि सीधे किसी एआई लैब से जुड़ने और महज एक मंच बने रहने से आगे बढ़ने के भी बड़े फायदे हैं। कर्सर के सीईओ माइकल ट्रुएल ने पिछले महीने कंपनी के कंपाइल कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया कि स्टार्टअप अपना अगला एआई मॉडल ट्रेन करने के लिए पहले से ही स्पेसएक्स के साथ साझेदारी कर रहा है। यह मॉडल पहले के मुकाबले दस से बीस गुना ज्यादा कंप्यूटिंग ताकत का इस्तेमाल करेगा। उम्मीद यह है कि इससे नया मॉडल ओपनएआई और एंथ्रोपिक की पेशकश के बराबर, या उससे भी बेहतर बन जाएगा। अप्रैल में लिखे एक ब्लॉग पोस्ट में कर्सर ने कहा था कि कंप्यूटिंग संसाधनों की कमी उसे पीछे खींच रही है, और अब उसे भरोसा है कि स्पेसएक्स के डेटा सेंटरों के सहारे वह अपने मॉडलों को जबरदस्त तरीके से बेहतर बना सकता है।

कंपाइल कॉन्फ्रेंस में ट्रुएल ने यह भी जोड़ा कि कर्सर अपने नए एआई मॉडल को "कोडिंग से आगे बढ़कर समझदार" बनाने की कोशिश कर रहा है। बीते एक साल में कर्सर ने सॉफ्टवेयर इंजीनियरों से आगे बढ़कर दूसरे तरह के ग्राहकों को भी निशाना बनाना शुरू किया है और ग्राफिक डिजाइनरों जैसे लोगों के लिए फीचर उतारे हैं। अधिग्रहण पूरा होने के बाद यह हैरानी की बात नहीं होगी अगर कर्सर असल में स्पेसएक्स की एंटरप्राइज एआई इकाई बनकर उभरे।

कीमतों की जंग और आगे की राह

एक और बात ध्यान देने लायक है। छोटे एआई कोडिंग स्टार्टअप अभी उन बेहद सब्सिडी वाले एआई कोडिंग सब्सक्रिप्शन से मुकाबले में जूझ रहे हैं, जो ओपनएआई और एंथ्रोपिक डेवलपर्स को देते हैं। इन कंपनियों का 200 डॉलर मासिक वाला सब्सक्रिप्शन प्लान कोडर्स को 1000 डॉलर से कहीं ज्यादा के मॉडल इस्तेमाल की सुविधा दे सकता है। अब जब कर्सर स्पेसएक्स का हिस्सा है, तो वह भी इसी तरह की आक्रामक कीमतें पेश करने की हालत में आ सकता है।

कर्सर की असल दिक्कत यही रही है कि उसके पास अपने बड़े सपनों को पूरा करने लायक पूंजी और कंप्यूटिंग ताकत नहीं थी। इस लिहाज से देखें तो कर्सर स्पेसएक्स के अंदर रहकर बेहतर स्थिति में है, भले ही उसे ओपनएआई और एंथ्रोपिक के साथ अपना रिश्ता गंवाना पड़े। लेकिन अगर कर्सर एक साथ दोस्ती निभा भी सका और कड़ा मुकाबला भी कर सका, तो यह सौदा एआई युग के सबसे बड़े अधिग्रहणों में से एक साबित हो सकता है।

इसका आप पर असर

  • कर्सर इस्तेमाल करने वाले डेवलपर्स के लिए: अधिग्रहण के बाद अनिश्चितता है कि क्लॉड और जीपीटी जैसे बाहरी मॉडल इस टूल पर मिलते रहेंगे या हट जाएंगे, जिससे आपका वर्कफ्लो प्रभावित हो सकता है।
  • कंपनियों और खरीदारों के लिए: स्पेसएक्स की कंप्यूटिंग ताकत से कर्सर आगे चलकर 200 डॉलर मासिक जैसी आक्रामक और सस्ती कीमतें पेश कर सकता है, जिससे एआई कोडिंग सब्सक्रिप्शन का खर्च घट सकता है।

सवाल-जवाब

कर्सर को कौन खरीद रहा है?
एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स कोडिंग स्टार्टअप कर्सर का अधिग्रहण करने जा रही है, जो इस साल के आखिर में पूरा होने की उम्मीद है।
सबसे बड़ा सवाल क्या है?
सवाल यह है कि अधिग्रहण के बाद क्या ओपनएआई और एंथ्रोपिक अपने मॉडल कर्सर पर चलने देंगे, या फिर एक प्रतिद्वंद्वी के मालिकाना हक वाले प्रोडक्ट से हट जाएंगे।
एंथ्रोपिक कर्सर के साथ क्यों बना रह सकता है?
एंथ्रोपिक ने हाल ही में स्पेसएक्स से कंप्यूटिंग संसाधन खरीदने के लिए अरबों डॉलर का सौदा किया है, और यह साझेदारी उसे कर्सर में अपने मॉडल परोसते रहने की वजह दे सकती है।
ओपनएआई का कर्सर में क्या दांव लगा है?
ओपनएआई का स्टार्टअप फंड कर्सर के शुरुआती निवेशकों में था और अधिग्रहण के चलते उसे स्पेसएक्स के शेयरों की शक्ल में बड़ा मुनाफा मिलने वाला है।
कर्सर का नया मॉडल कितना ताकतवर होगा?
कर्सर स्पेसएक्स के साथ मिलकर अपना अगला मॉडल ट्रेन कर रहा है, जो पहले के मुकाबले दस से बीस गुना ज्यादा कंप्यूटिंग ताकत इस्तेमाल करेगा।
विंडसर्फ के साथ पहले क्या हुआ था?
पिछले साल जब खबर आई कि ओपनएआई विंडसर्फ को खरीद रहा है, तो एंथ्रोपिक ने फौरन उसकी पहुंच काट दी थी, हालांकि वह सौदा आखिरकार सिरे नहीं चढ़ा।
माइकल एंडरसन
लेखक के बारे मेंमाइकल एंडरसनअमेरिका संवाददाता सैन फ्रांसिस्को
विशेषज्ञताअमेरिका समाचार, राजनीति, सरकारी नीति, चुनाव, अर्थव्यवस्था, ब्रेकिंग न्यूज़, कांग्रेस, व्हाइट हाउस, सामाजिक मुद्दे, अंतरराष्ट्रीय संबंध

माइकल एंडरसन एक अमेरिका संवाददाता हैं जो अमेरिकी राजनीति, ब्रेकिंग न्यूज़, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। वे पूरे अमेरिका से समय पर अपडेट और स्पष्ट विश्लेषण देते हैं।

माइकल एंडरसन एक अमेरिका संवाददाता हैं जो अमेरिकी राजनीति, सरकारी नीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक मुद्दों और बड़ी ब्रेकिंग ख़बरों की कवरेज में विशेषज्ञता रखते हैं। वे वॉशिंगटन डी.सी. और पूरे अमेरिका के घटनाक्रमों — चुनाव, कांग्रेस की गतिविधियाँ, व्हाइट हाउस के फ़ैसले, आर्थिक रुझान और अहम राष्ट्रीय ख़बरों — पर रिपोर्ट करते हैं। सटीकता, गति और संदर्भ-सहित रिपोर्टिंग पर ज़ोर देते हुए माइकल अमेरिका और उसके वैश्विक प्रभाव को आकार देने वाले मुद्दों का गहन विश्लेषण देते हैं। उनकी पत्रकारिता पाठकों को स्पष्ट, तथ्यपरक और संतुलित रिपोर्टिंग के ज़रिए जटिल राजनीतिक व आर्थिक घटनाक्रम समझने में मदद करती है।

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