प्राइवेसी को केंद्र में रखकर बना एआई प्लेटफॉर्म वेनिस एआई अब 1 अरब डॉलर की कंपनी बन गया है। इसके संस्थापक एरिक वूरहीस ने बुधवार को बताया कि कंपनी ने अपने पहले बाहरी फंडिंग राउंड में 6.5 करोड़ डॉलर जुटाए हैं, और यही वैल्यूएशन इस डील का आधार रहा।
वूरहीस क्रिप्टोकरेंसी इंडस्ट्री के पुराने खिलाड़ी हैं और उन्हें सबसे ज्यादा शेपशिफ्ट एक्सचेंज के संस्थापक के तौर पर जाना जाता है। एक्स पर लिखी एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि यह पूंजी वेनिस के उस मकसद पर मुहर लगाती है, जिसके तहत यह ChatGPT जैसे आम एआई का एक प्राइवेट और बिना सेंसरशिप वाला विकल्प खड़ा करना चाहता है।
निगरानी के खिलाफ खड़ा एक दांव
वूरहीस ने अपनी सोच को साफ शब्दों में रखा। उन्होंने लिखा, “हर जगह फैली केंद्रीकृत निगरानी और नियंत्रण से हमारी यही चिढ़ हमारी वैचारिक बुनियाद है, और इसी पर वेनिस तेजी से आगे बढ़ रहा है। अप्रैल में हम 30 लाख यूजर्स तक पहुंच गए, और पहली तिमाही तक, जब एआई कंपनियां आप पर नजर रखते हुए भी घाटे में चल रही थीं, वेनिस ने ऐसी जासूसी न करने का रास्ता चुनकर भी मुनाफा कमाया।”
वेनिस एआई मई 2024 में शुरू हुआ था। यह प्लेटफॉर्म आम एआई चैटबॉट्स से अलग इस तरह बनाया गया है कि यह यूजर्स की बातचीत को किसी कंपनी के केंद्रीकृत सर्वर पर स्टोर न करे। इस ताजा फंडिंग राउंड की अगुवाई ड्रैगनफ्लाई ने की, जबकि इसमें नॉर्थ आइलैंड वेंचर्स, कॉइनबेस वेंचर्स, आर्केटाइप, लिक्विड2 वेंचर्स और मॉर्गन क्रीक भी शामिल हुए।
फंडिंग के बाद टोकन में उछाल
फंडिंग के इस ऐलान के बाद वेनिस एआई का अपना टोकन VVV चढ़ गया। कॉइनगेको के मुताबिक यह फिलहाल 13.74 डॉलर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले 24 घंटों में 11 फीसदी की तेजी दिखाता है। बुधवार को VVV का सालाना उत्सर्जन घटाकर 30 लाख टोकन कर दिया गया। ये टोकन उन धारकों को मिलते हैं जो नेटवर्क को सहारा देने के लिए अपने VVV को स्टेक करते हैं। इसका मतलब है कि अब हर साल सप्लाई में पहले से कम टोकन जुड़ेंगे।
असली खतरा किसे बताया
एंथ्रोपिक के डारियो अमोदेई और ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन समेत कई एआई डेवलपर्स फ्रंटियर मॉडल से जुड़े जोखिमों को लेकर आगाह करते रहे हैं। लेकिन वूरहीस का तर्क है कि इंडस्ट्री का सारा ध्यान नौकरियां जाने और साइबर सुरक्षा पर टिका है, जबकि इससे कहीं ज्यादा बुनियादी खतरा नजरअंदाज हो रहा है। उनके मुताबिक असली खतरा प्राइवेसी का खत्म होना है, क्योंकि एआई इंसान और उसके अपने विचारों के रिश्ते को नए सिरे से गढ़ रहा है।
उन्होंने लिखा, “शायद जो चीज हमें सबसे ज्यादा डरानी चाहिए वह नौकरियों का जाना या साइबर हमले नहीं, बल्कि यह है कि हमारी चेतना का प्रवाह अब लगातार जांच के दायरे में है। हमारे विचार अब इस डिस्टोपियन तंत्र के साथ मिलकर और उसकी इजाजत से गढ़े जा रहे हैं।”
पैसा कहां लगेगा
वूरहीस ने कहा कि नई पूंजी का इस्तेमाल वेनिस के प्लेटफॉर्म को बढ़ाने में होगा। यह प्लेटफॉर्म एक ही इंटरफेस और API के जरिए बड़े ओपन-सोर्स और प्रोप्राइटरी एआई मॉडल तक पहुंच देता है। साथ ही उन्होंने कहा कि इसका मकसद एआई के साथ इंसानी संवाद के लिए पहले और चौथे संविधान संशोधन जैसी सुरक्षा को आगे बढ़ाना है।
उन्होंने कहा, “हम एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाएंगे जो प्राइवेट और बेरोकटोक मशीन इंटेलिजेंस को समर्पित होगा, एक खुला और उदार बंदरगाह शहर, जो अपने बाशिंदों की संप्रभुता का सम्मान करेगा, फिर चाहे वे इंसान हों या एजेंट।”
यह ऐलान ऐसे वक्त आया है जब वॉशिंगटन में एआई और प्राइवेसी को लेकर बहस तेज हो रही है। इस साल की शुरुआत में सांसदों ने ऐसा कानून पेश किया जिसके तहत एआई की मदद से होने वाली सरकारी निगरानी के लिए वारंट जरूरी होगा, वहीं एफबीआई ने जांच, खतरों के विश्लेषण और चेहरा पहचानने के लिए एआई का इस्तेमाल बढ़ा दिया है।













