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260 दिन समुद्र में तैनात यूएसएस अब्राहम लिंकन से खुली अमेरिकी नौसेना की पोल, कागजों पर 11 लेकिन समुद्र में सिर्फ 3 एयरक्राफ्ट कैरियर मौजूदअमेरिका
18 अग॰ 2026, 11:43 pm (2 घंटे पहले)· 1

260 दिन समुद्र में तैनात यूएसएस अब्राहम लिंकन से खुली अमेरिकी नौसेना की पोल, कागजों पर 11 लेकिन समुद्र में सिर्फ 3 एयरक्राफ्ट कैरियर मौजूद

यूएसएस अब्राहम लिंकन की 260 दिनों की लंबी तैनाती और नौसैनिकों की कमी ने अमेरिकी नौसेना की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. कागजों पर 11 एयरक्राफ्ट कैरियर होने के बावजूद वैश्विक समुद्रों में सिर्फ 3 कैरियर ही तैनात हैं.

अमेरिकी नौसेना के सबसे ताकतवर युद्धपोतों में शामिल यूएसएस अब्राहम लिंकन की अप्रत्याशित रूप से लंबी तैनाती ने अमेरिकी सैन्य तैयारियों और नौसैनिक बेड़े की वास्तविक स्थिति पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं. महीनों से समुद्र के बीच गश्त लगा रहे इस विशालकाय एयरक्राफ्ट कैरियर पर तैनात नौसैनिकों को बेहद कठिन और प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझना पड़ा है. जहाज पर खराब गुणवत्ता के भोजन, स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति में बाधा, अस्वच्छ शावर और दैनिक जरूरतों के सामान की भारी किल्लत जैसी गंभीर शिकायतें सामने आई हैं. इस लंबी तैनाती का सीधा असर जहाजरानी दल के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ा है, जिससे अमेरिकी नौसेना के प्रशासनिक प्रबंधन पर दबाव लगातार बढ़ रहा है.

समुद्र में 260 दिन का कठिन सफर और 240 दिन बिना बंदरगाह रुके तैनाती

यूएसएस अब्राहम लिंकन के इस मिशन का सबसे चिंताजनक पहलू इसकी समय अवधि रही है. यह युद्धपोत लगभग 260 दिनों तक समुद्र में तैनात रहा, जिसमें से करीब 240 दिन लगातार बिना किसी बंदरगाह पर रुके और बिना किसी तट पर उतरे गुजरे. इतनी लंबी अवधि तक बिना किसी विश्राम के समुद्र में बने रहने के कारण नौसैनिकों और उनके परिवारों की चिंताएं चरम पर पहुंच गईं. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 6 अगस्त 2026 को सैन डिएगो स्थित नॉर्थ आइलैंड नेवल एयर स्टेशन पर नौसेना के उच्च अधिकारियों और लिंकन पर तैनात जवानों के 200 से अधिक परिवारों के बीच एक विशेष बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में परिजनों ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की और बताया कि जहाज पर मौजूद उनके प्रियजनों ने संदेशों के जरिए वहां बिगड़ते हालात और बुनियादी सुविधाओं की कमी की जानकारी दी थी. जो युद्धपोत दुनिया में अमेरिकी नौसैनिक वर्चस्व का प्रतीक माना जाता है, उसी पर तैनात जवानों के लिए दैनिक जीवन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया था.

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कागजी आंकड़ों में 11 युद्धपोत लेकिन हकीकत में नौसेना के पास विकल्प नहीं

इस एयरक्राफ्ट कैरियर को इतने लंबे समय तक समुद्र में तैनात रखने के पीछे मुख्य वजह अमेरिकी नौसेना के पास चालू हालत में कैरियरों की भारी कमी होना बताई जा रही है. हालांकि कागजी दस्तावेजों में अमेरिकी नौसेना के पास कुल 11 एयरक्राफ्ट कैरियर दर्ज हैं, लेकिन हकीकत यह है कि ये सभी 11 जहाज एक साथ युद्ध या मिशन के लिए तैयार नहीं रहते. नौसैनिक रणनीतियों के अनुसार किसी भी समय कई जहाजों की गोदी में दीर्घकालिक मरम्मत चल रही होती है, कुछ जहाजों के क्रू को नए सिरे से प्रशिक्षण दिया जा रहा होता है, जबकि कई अन्य जहाज नियमित रखरखाव के कारण समुद्र में उतरने की स्थिति में नहीं होते. यही कारण था कि यूएसएस अब्राहम लिंकन की जगह लेने के लिए नौसेना के पास कोई दूसरा तैयार कैरियर उपलब्ध नहीं था और इसे मजबूरी में अपनी तय समयसीमा से कहीं आगे तक समुद्र में बने रहना पड़ा.

कैरियर स्ट्राइक ग्रुप का ढांचा और समुद्र में क्रू न बदलने की मजबूरी

यूएसएस अब्राहम लिंकन समुद्र में अकेला संचालन नहीं करता, बल्कि यह एक विशाल और शक्तिशाली कैरियर स्ट्राइक ग्रुप का मुख्य केंद्र होता है. इस अकेले एयरक्राफ्ट कैरियर पर लगभग 3200 नौसैनिक तैनात रहते हैं, जो जहाज के संचालन और सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालते हैं. इसके अतिरिक्त जहाज पर मौजूद लड़ाकू विमानों, टोही विमानों और हेलीकॉप्टरों के रखरखाव एवं उड़ान संचालन से लगभग 2480 वायुसैनिक और तकनीकी विशेषज्ञ जुड़े होते हैं. इस स्ट्राइक ग्रुप के साथ सुरक्षा कवच के रूप में कई गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर और आमतौर पर एक या दो परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां भी शामिल रहती हैं. पूरे कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में कुल मिलाकर 6500 से 7500 अधिकारी और नौसैनिक तैनात होते हैं. नौसेना के कठोर नियमों के तहत मिशन के दौरान समुद्र के बीच में पूरे क्रू को आसानी से बदला नहीं जा सकता. इसका सीधा परिणाम यह होता है कि जब तक जहाज समुद्र में तैनात रहेगा, वही जवान बिना किसी बदलाव के लगातार कठिन ड्यूटी देने के लिए बाध्य रहते हैं.

20 हजार नौसैनिकों की कमी और प्रशिक्षण व्यवस्था पर बढ़ता दबाव

अमेरिकी नौसेना के सामने खड़ी चुनौतियां केवल जहाजों की मरम्मत और उपलब्धता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संगठन में योग्य और प्रशिक्षित कर्मियों का बड़ा अकाल पड़ गया है. हाल ही में जारी आधिकारिक रिपोर्टों में अमेरिकी नौसेना के भीतर लगभग 20,000 कर्मियों की भारी कमी का स्पष्ट उल्लेख किया गया है. एक तरफ जहां नई भर्तियों की दर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ अनुभवी और कुशल नौसैनिक सेवा छोड़कर नागरिक क्षेत्रों में जा रहे हैं. इसके साथ ही प्रशिक्षण संस्थानों पर भी भारी दबाव बना हुआ है. पर्याप्त संख्या में योग्य प्रशिक्षकों और अनुभवी कर्मियों की कमी के कारण नए रंगरूटों को तेजी से प्रशिक्षित कर बेड़े में शामिल करना एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती साबित हो रहा है.

1991 के गल्फ वॉर से तुलना: एक खाड़ी में 4 के मुकाबले दुनिया भर में 3

अमेरिकी नौसेना की वर्तमान परिचालन क्षमता को गहराई से समझने के लिए 1991 के ऐतिहासिक गल्फ वॉर का उदाहरण बेहद प्रासंगिक है. गल्फ वॉर के दौरान अमेरिकी नौसेना ने अकेले फारस की खाड़ी में एक साथ चार एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात कर रखे थे, जो उसकी तत्कालीन अपार सैन्य क्षमता को दर्शाता था. इसके विपरीत, आज कागजों पर 11 कैरियर की मौजूदगी का दावा करने के बावजूद पूरी दुनिया के महासागरों में केवल तीन अमेरिकी कैरियर प्रभावी रूप से तैनात हैं. इन तीन जहाजों में यूएसएस अब्राहम लिंकन, यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश और यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन शामिल हैं. यह ऐतिहासिक तुलना स्पष्ट करती है कि पिछले तीन दशकों में अमेरिकी नौसेना की वास्तविक परिचालन शक्ति में कितना बड़ा संकुचन आया है.

प्रशांत महासागर और वैश्विक जलक्षेत्रों में पैदा होता नया रणनीतिक शून्य

नौसैनिक योजनाओं के अनुसार, 22 अगस्त 2026 या उसके तुरंत बाद यूएसएस अब्राहम लिंकन सैन डिएगो स्थित अपने मुख्य बंदरगाह पर लौटेगा, ताकि उसकी आवश्यक मरम्मत की जा सके. दूसरी ओर, लिंकन की जगह लेने के लिए जापान में तैनात यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन को सैन डिएगो की ओर रवाना किया जा रहा है. इस अदला-बदली का एक बेहद चिंताजनक रणनीतिक पहलू यह है कि जॉर्ज वाशिंगटन के हटते ही पूरे विशाल प्रशांत महासागर क्षेत्र में एक भी अमेरिकी कैरियर टास्क फोर्स मौजूद नहीं रहेगी. इसके अतिरिक्त, इस समय उत्तरी अटलांटिक, दक्षिणी अटलांटिक, कैरेबियन सागर या भूमध्य सागर में भी अमेरिका का एक भी एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात नहीं है. यह स्थिति दर्शाती है कि कागजी आंकड़े भले ही बड़े दिखते हों, लेकिन संकट के समय अमेरिका की वास्तविक तैनाती क्षमता काफी सीमित हो चुकी है.

महीनों चलने वाली मरम्मत और अमेरिकी नौसैनिक क्षमता पर खड़े बड़े सवाल

सैन डिएगो लौटने के बाद यूएसएस अब्राहम लिंकन को एक लंबी और जटिल मरम्मत प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा. 260 दिनों की अत्यधिक लंबी तैनाती के कारण जहाज के विमान प्रक्षेपण कैटापल्ट, फ्लाइट डेक, मुख्य इंजन और अन्य महत्वपूर्ण प्रणालियों पर अत्यधिक दबाव पड़ा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे ओवरहाल में कई महीनों का समय लग सकता है, जिस दौरान लिंकन अमेरिकी नौसैनिक ताकत का हिस्सा नहीं बन सकेगा. अमेरिका लंबे समय से अपनी वैश्विक सैन्य धाक और दुश्मनों को दूर रखने की रणनीति के लिए एयरक्राफ्ट कैरियरों पर निर्भर रहा है. लेकिन अगर 11 कैरियरों के बेड़े में से केवल दो या तीन जहाज ही किसी समय तैनात किए जा सकें, तो किसी बड़े वैश्विक संकट या युद्ध की स्थिति में अमेरिकी प्रतिक्रिया क्षमता संदिग्ध हो जाती है. यूएसएस अब्राहम लिंकन की यह स्थिति केवल एक जहाज की समस्या नहीं है, बल्कि यह नौसैनिकों की कमी, प्रशिक्षण के संकट, रखरखाव के बढ़ते बोझ और चरमराती सैन्य व्यवस्था की एक बड़ी तस्वीर पेश करती है.

सवाल-जवाब

यूएसएस अब्राहम लिंकन समुद्र में कितने दिनों तक तैनात रहा?
यूएसएस अब्राहम लिंकन लगभग 260 दिनों तक समुद्र में तैनात रहा, जिसमें से करीब 240 दिन लगातार बिना किसी बंदरगाह पर रुके बीते.
अमेरिकी नौसेना के पास कुल कितने एयरक्राफ्ट कैरियर हैं और वर्तमान में कितने तैनात हैं?
कागजों पर अमेरिकी नौसेना के पास 11 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, लेकिन वर्तमान में पूरी दुनिया में केवल 3 कैरियर ही समुद्र में तैनात हैं.
यूएसएस अब्राहम लिंकन पर कितने लोग तैनात रहते हैं?
यूएसएस अब्राहम लिंकन पर लगभग 3200 नौसैनिक और एयर विंग से जुड़े 2480 लोग तैनात रहते हैं, जबकि पूरे कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में 6500 से 7500 कर्मी होते हैं.
अमेरिकी नौसेना में नौसैनिकों की कितनी कमी बताई जा रही है?
रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी नौसेना वर्तमान में लगभग 20,000 प्रशिक्षित नौसैनिकों और कर्मियों की कमी से जूझ रही है.
1991 के गल्फ वॉर के समय अमेरिका के कितने कैरियर तैनात थे?
1991 में गल्फ वॉर के दौरान अकेले फारस की खाड़ी में एक साथ चार अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात थे, जबकि आज पूरी दुनिया में सिर्फ तीन तैनात हैं.
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