भारतीय परिवारों में सदियों से कई घरेलू नुस्खे पीढ़ी-दर-पीढ़ी अपनाए जाते रहे हैं, जिनमें से एक बेहद आम चीज है फिटकरी। पुराने समय में दादी-नानी के घरेलू उपचारों में इसका प्रमुख स्थान था। आज भी कई घरों के साथ-साथ पारंपरिक सैलून में दाढ़ी बनाने के दौरान लगने वाले छोटे कट पर फिटकरी का पत्थर रगड़ना आम देखा जाता है। इसके प्राकृतिक कसैले गुण मामूली रक्तस्राव को फौरन थामने में काफी मददगार साबित होते हैं। हालांकि, अगर घाव गहरा हो या खून लगातार बह रहा हो, तो घरेलू उपाय के बजाय सीधे चिकित्सीय सहायता लेना अनिवार्य होता है।
ओरल हेल्थ, मसूड़ों की देखभाल और मुंह की बदबू
मुंह और दांतों से जुड़ी हल्की दिक्कतों में भी फिटकरी का पानी पारंपरिक उपचार का हिस्सा रहा है। मसूड़ों से होने वाले हल्के रक्तस्राव की स्थिति में पुराने समय में फिटकरी मिले पानी से कुल्ला करने की सलाह दी जाती थी। इसके कसैले प्रभाव के कारण यह मसूड़ों के टिश्यू को सिकोड़ने और राहत देने में भूमिका निभाता है। इसके अलावा कई लोग मुंह की अप्रिय दुर्गंध को दूर करने के लिए भी इसका हल्का कुल्ला करते हैं। हालांकि, यदि मसूड़ों से बार-बार या लगातार खून आ रहा हो, तो इसे केवल घरेलू नुस्खे पर न छोड़ें और डेंटिस्ट से संपर्क करें।
त्वचा की अतिरिक्त चिकनाई और सफाई के लिए उपयोग
स्किन केयर के पारंपरिक तौर-तरीकों में भी फिटकरी के पानी से त्वचा साफ करने का चलन लंबे समय से रहा है। चेहरे या त्वचा पर जरूरत से ज्यादा तेल या चिकनाई जमा होने पर फिटकरी का पानी काफी असरदार माना जाता रहा है, क्योंकि इसके कसैले गुण तैलीयपन को अस्थायी रूप से नियंत्रित करते हैं। हालांकि, त्वचा की गंभीर समस्याओं जैसे लगातार खुजली, फंगल इंफेक्शन या लाल चकत्तों की स्थिति में केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहना उचित नहीं है, ऐसी स्थिति में त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श करना आवश्यक है।
शरीर की दुर्गंध नियंत्रण और पसीने की नमी
गर्मियों के मौसम में पसीने और शरीर की बदबू से निपटने के लिए भी फिटकरी का पत्थर पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे पानी में हल्का सा घोलकर इस्तेमाल किया जाता है या फिर इसके टुकड़े को गीला करके सीधे प्रभावित त्वचा पर लगाने की परंपरा रही है। यह त्वचा पर मौजूद अत्यधिक नमी को कुछ वक्त के लिए कम कर देता है। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को इसका प्रयोग करते समय विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए, ताकि किसी प्रकार की एलर्जी या जलन से बचा जा सके।
गले की खराश और गरारे करने के सख्त नियम
मौसम बदलने के दौरान जब गले में हल्की खराश या जलन शुरू होती है, तब गुनगुने पानी में चुटकी भर फिटकरी डालकर गरारे करना एक पुराना और आजमाया हुआ तरीका है। यह गले की भीतरी सतह को साफ करने और अस्थायी राहत पहुंचाने में सहायक होता है। इस उपाय को अपनाते समय सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि फिटकरी के पानी को बिल्कुल भी निगला नहीं जाना चाहिए। यदि गले की समस्या कई दिनों तक बनी रहे, तो बिना देरी किए डॉक्टर को दिखाना चाहिए।


















