पूर्वी यूरोप के रणनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि वाशिंगटन अब वारसॉ के साथ रक्षा तालमेल को एक नए मुकाम पर ले जाने की तैयारी में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात के स्पष्ट संकेत दिए हैं कि उनका प्रशासन पोलैंड की धरती पर अमेरिकी सैनिकों के लिए एक पूर्ण सैन्य बेस स्थापित करने के प्रस्ताव की बेहद संजीदगी से समीक्षा कर रहा है। व्हाइट हाउस की ओर से यह प्रतिक्रिया ऐसे नाजुक मोड़ पर आई है जब बाल्टिक क्षेत्र में रूस और उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन यानी नाटो के बीच टकराव चरम पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। ट्रंप के मुताबिक इस संबंध में कोई ठोस कदम पहले ही तय किया जा चुका हो, इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता।
पोलैंड में स्थायी ठिकाने को लेकर ट्रंप का रुख
टेक्सास के दौरे पर निकलने से ठीक पहले पत्रकारों द्वारा पूछे गए तीखे सवालों का उत्तर देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने पोलिश नेतृत्व के प्रति गहरा आदर व्यक्त किया। पोलैंड के राष्ट्रपति के साथ अपने संबंधों और वहां बेस तैयार करने के विषय पर बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि इस दिशा में काम तेजी से चल रहा है और ऐसा वास्तविक धरातल पर संभव हो सकता है। जब उनसे यह जानने की कोशिश की गई कि इस तरह के बड़े सामरिक निर्णय पर अंतिम मुहर लगाने में देरी क्यों हो रही है, तो उन्होंने साफ कहा कि हो सकता है उन्होंने फैसला पहले ही ले लिया हो। पोलैंड की भौगोलिक स्थिति नाटो की सुरक्षा पंक्ति के लिहाज से बेहद संवेदनशील है, क्योंकि इसकी सीमाएं सीधे तौर पर रूसी प्रभाव वाले संवेदनशील क्षेत्रों से मिलती हैं।
कलिनिनग्राद संकट और परमाणु हथियारों की सीधी चेतावनी
अमेरिकी नेतृत्व की इस रणनीतिक हलचल के पीछे मास्को का वह कड़ा रुख माना जा रहा है जो उसने बाल्टिक सागर तट पर स्थित अपने विशेष भूभाग कलिनिनग्राद को लेकर दिखाया है। 30 सितंबर की तारीख वाले एक अहम राजनयिक दस्तावेज के जरिए रूस ने पश्चिमी ताकतों को आगाह किया है कि यदि नाटो सदस्यों ने कलिनिनग्राद की किसी भी प्रकार से घेराबंदी करने या इसे रूसी मुख्य भूमि से काटने की चेष्टा की, तो मॉस्को अपनी संपूर्ण सैन्य ताकत झोंक देगा। रूसी पक्ष ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस तरह के संकट में परमाणु शस्त्रागार के उपयोग से भी पीछे नहीं हटा जाएगा। कलिनिनग्राद चारों तरफ से पोलैंड और लिथुआनिया जैसे नाटो सदस्य देशों से घिरा हुआ है और मुख्य रूसी सीमा से बिल्कुल अलग-थलग पड़ता है, लेकिन रणनीतिक रूप से यहां रूसी सेना का भारी जमावड़ा तैनात रहता है।
यूक्रेन युद्ध और सहयोगियों के प्रति प्रतिबद्धता
पत्रकारों ने इस दौरान यूक्रेन को मिलने वाली पश्चिमी सैन्य सहायता और जारी युद्ध के अंत को लेकर भी अमेरिकी रुख टटोलने की कोशिश की। इस जटिल अंतरराष्ट्रीय मसले पर अपनी राय रखते हुए ट्रंप ने भरोसा जताया कि इस संकट का कोई न कोई व्यावहारिक समाधान जल्द निकल आएगा। इसके साथ ही जब मध्य पूर्व, विशेषकर इराक से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी के संदर्भ में वैश्विक साझेदारों को मिलने वाले भरोसे पर बात हुई, तो उन्होंने दृढ़ता से कहा कि अमेरिका अपने सहयोगियों का साथ कभी नहीं छोड़ेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस कथन ने पूर्वी यूरोपीय देशों में सुरक्षा को लेकर पसरी अनिश्चितता को कम करने का प्रयास किया है।
दक्षिण अमेरिकी राजनीति और ब्राजील के चुनावों पर पैनी नजर
अपनी इस संक्षिप्त बातचीत में डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय सीमाओं से परे लैटिन अमेरिकी राजनीति पर भी चर्चा की। उन्होंने विशेष रूप से ब्राजील में होने वाले आम चुनावों का उल्लेख करते हुए बताया कि वह वहां के घटनाक्रम को बेहद करीब से ट्रैक कर रहे हैं। ट्रंप ने ब्राजील की भौगोलिक और आर्थिक महत्ता को रेखांकित करते हुए वहां के अवाम की जमकर सराहना की और इन चुनावों को महाद्वीप के भविष्य के लिए निर्णायक करार दिया। जब संवाददाताओं ने वेनेजुएला अथवा दक्षिण अमेरिका के अन्य हिस्सों में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के विस्तार पर सवाल दागा, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन के सामने कई विकल्प मौजूद हैं और क्षेत्र के देशों के साथ उनके कूटनीतिक संबंध काफी सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।



















