राज्य निर्वाचन आयोग ने राजस्थान की पंचायती राज संस्थाओं में वर्ष 2026 के आम चुनावों की औपचारिक घोषणा कर दी है। निर्वाचन आयोग की योजना के तहत पूरे राज्य में मतदान की प्रक्रिया कुल चार अलग चरणों में पूरी कराई जाएगी। हालांकि, इस चुनावी व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव भी शामिल किया गया है, जिसके चलते प्रदेश के चार जिलों को मुख्य चुनावी कैलेंडर में शामिल नहीं किया गया है। बारां, श्रीगंगानगर, करौली और कोटा में जिला परिषद और संबंधित स्थानीय निकायों के चुनाव बाकी क्षेत्रों के साथ नहीं कराए जाएंगे।
चार जिलों के लिए अलग से तय होंगी तारीखें
राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने चुनावी रूपरेखा स्पष्ट करते हुए जानकारी दी कि प्रदेश भर में कुल 41 जिला परिषदें मौजूद हैं। इनमें से कोटा, करौली, बारां तथा श्रीगंगानगर की परिषदों की वर्तमान कार्यावधि दिसंबर 2026 के अंत में समाप्त हो रही है। इसी प्रशासनिक स्थिति को देखते हुए इन चार जिलों को वर्तमान घोषित चरणों से बाहर रखा गया है। आयोग का कहना है कि इन चार क्षेत्रों के मतदाताओं को अपने स्थानीय प्रतिनिधियों को चुनने के लिए दिसंबर का महीना बीतने तक प्रतीक्षा करनी होगी। इसके बाद निर्वाचन आयोग इन विशिष्ट परिषदों के लिए बिल्कुल नया चुनावी कार्यक्रम घोषित करेगा।
संबद्ध पंचायत समितियों पर भी लागू होगा नया नियम
यह स्थगन केवल जिला परिषदों तक सीमित नहीं है, बल्कि इन चारों जिलों के दायरे में आने वाली पंचायत समितियों की चुनावी समय-सारिणी भी पूरी तरह अलग रखी जाएगी। राज्य के अन्य इलाकों के लिए जो विस्तृत कार्यक्रम जारी किया गया है, वह कोटा, बारां, करौली और श्रीगंगानगर की पंचायत समितियों पर मान्य नहीं होगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि इन चारों जिलों के ग्रामीण अंचलों में स्थानीय शासन के प्रतिनिधियों के चयन की संपूर्ण प्रक्रिया मुख्य धारा के चुनावों के काफी बाद में संचालित होगी।
अन्य क्षेत्रों में अक्टूबर और नवंबर में वोटिंग
राजस्थान के शेष हिस्सों में ग्रामीण चुनाव प्रक्रिया तय समय पर शुरू होगी। बाकी सभी जिलों में जिला परिषद सदस्यों और पंचायत समिति सदस्यों के पदों के लिए चार चरणों का मतदान 23 अक्टूबर, 29 अक्टूबर, 4 नवंबर तथा 14 नवंबर को आयोजित किया जाएगा। इसके समानांतर, पंच और सरपंच के पदों के लिए वोट डालने की तिथियां 25 अक्टूबर, 31 अक्टूबर, 6 नवंबर और 16 नवंबर निर्धारित की गई हैं। इन चरणों के संपन्न होने से अधिकांश गांवों में नई पंचायतें गठित हो जाएंगी, किंतु कोटा, बारां, श्रीगंगानगर एवं करौली के नागरिकों को नई घोषणा का इंतजार बना रहेगा।
कार्यकाल समाप्ति के बाद ही स्पष्ट होगी स्थिति
निर्वाचन आयोग के अनुसार इस रणनीतिक फेरबदल का एकमात्र आधार मौजूदा परिषदों का तय कार्यकाल है। जब तक संबंधित परिषदों की दिसंबर 2026 की अवधि पूरी नहीं हो जाती, तब तक वहां नए सिरे से चुनाव कराना कानूनी दृष्टि से उपयुक्त नहीं था। पंचायती राज चुनाव 2026 की इस पूरी व्यवस्था के तहत राज्य का एक बड़ा भूभाग नवंबर मध्य तक अपना जनमत दर्ज कर चुका होगा, जबकि इन चार विशिष्ट जिलों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अगला अध्याय साल के अंतिम महीने के बाद ही गति पकड़ेगा।

















