अमरीका के कैलिफोर्निया राज्य में दिवाली को सरकारी छुट्टी घोषित करने वाले कानून पर अदालत ने रोक लगा दी है। राज्य के एक टैक्सपेयर संगठन की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सरकार के फैसले पर स्थगादेश जारी किया है। इस न्यायिक आदेश के बाद फिलहाल कैलिफोर्निया के आधिकारिक कैलेंडर में दिवाली को 12वें राज्य अवकाश के रूप में शामिल करने की योजना टल गई है।
गवर्नर के हस्ताक्षर और दिवाली अवकाश कानून के प्रावधान
कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसम ने पिछले साल इस विधेयक पर दस्तखत किए थे। इस कानून का मुख्य मकसद दिवाली को राज्य की 12वीं आधिकारिक छुट्टी का दर्जा देना था। कानून लागू होने पर दिवाली मनाने वाले सरकारी कर्मचारियों और स्कूल स्टाफ को सवेतन छुट्टी का लाभ मिलता। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर सरकारी स्कूलों और कम्युनिटी कॉलेजों को यह अधिकार दिया गया था कि वे दिवाली पर छुट्टी घोषित कर सकें या फिर इस त्योहार के सांस्कृतिक महत्व पर शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन कर सकें।
अदालत में वित्तीय बोझ और संवैधानिक सिद्धांतों की दलील
इससे पहले कि यह कानून पूरे राज्य में प्रभावी हो पाता, सैन फ्रांसिस्को टैक्सपेयर्स एसोसिएशन नाम की संस्था ने इसे कोर्ट में चुनौती दे दी। संगठन ने याचिका में मुख्य रूप से वित्तीय और संवैधानिक आधार पर आपत्ति जताई। संस्था का दावा है कि दिवाली को सरकारी छुट्टी का दर्जा देने से राज्य सरकार पर लगभग 6.88 करोड़ डॉलर (68.8 मिलियन डॉलर) का अतिरिक्त प्रशासनिक खर्च आएगा।
वित्तीय पहलू के साथ ही याचिकाकर्ताओं ने अमरीकी संविधान के मूल सिद्धांतों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि अमरीकी संविधान सरकार को किसी एक धर्म का पक्ष लेने या उसे आधिकारिक संरक्षण देने से रोकता है। ऐसे में दिवाली को सरकारी मान्यता देना अन्य धार्मिक समुदायों के साथ पक्षपात जैसा दिख सकता है और इससे यह संदेश जा सकता है कि बाकी त्योहारों का महत्व कम है।
क्रिसमस की छुट्टी से तुलना पर संगठन का कहना था कि क्रिसमस को सरकारी अवकाश के रूप में बनाए रखने के पीछे ऐतिहासिक और व्यावहारिक कारण हैं। क्रिसमस के दिन बड़ी संख्या में लोग पहले से ही काम पर या स्कूल नहीं जाते हैं, जबकि कैलिफोर्निया में दिवाली मनाने वाले लोगों का दायरा तुलनात्मक रूप से सीमित है।
सैक्रामेंटो कोर्ट का फैसला और नया कानून बनाने का विकल्प
दिवाली अवकाश से जुड़ी याचिका पर सैक्रामेंटो की अदालत में सुनवाई हुई। अदालत ने टैक्सपेयर्स एसोसिएशन के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कानून के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी। हालांकि कोर्ट ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया कि राज्य सरकार चाहे तो इस मामले में नया कानून तैयार कर सकती है। कोर्ट के सुझाव के अनुसार नए विधेयक में धार्मिक पहलू के बजाय त्योहार के सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को केंद्र में रखा जाना चाहिए।
भारतीय समुदाय में निराशा और अन्य अमरीकी राज्यों के उदाहरण
अदालत के इस फैसले से कैलिफोर्निया में रह रहे भारतीय और दक्षिण एशियाई मूल के लोगों में काफी निराशा देखी जा रही है। फेडरेशन ऑफ जैन एसोसिएशंस इन नॉर्थ अमेरिका के अध्यक्ष अतुल शाह ने समुदाय का पक्ष रखते हुए कहा कि दिवाली को आधिकारिक मान्यता देने का उद्देश्य किसी धर्म का प्रचार करना नहीं था। इसका मुख्य लक्ष्य कैलिफोर्निया के बहुसांस्कृतिक स्वरूप को सम्मान देना और वहां रह रहे दक्षिण एशियाई समुदाय के योगदान को स्वीकार करना था।
अतुल शाह ने ध्यान दिलाया कि कैलिफोर्निया में अमरीका की सबसे बड़ी दक्षिण एशियाई आबादी निवास करती है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अमरीका के अन्य राज्य जैसे पेंसिल्वेनिया और कनेक्टिकट पहले से ही दिवाली को आधिकारिक मान्यता दे चुके हैं और वहां छुट्टी मिलती है, तो कैलिफोर्निया में ऐसा क्यों नहीं हो सकता। इसके अलावा न्यूयॉर्क सिटी के सरकारी स्कूलों में दिवाली पर अवकाश रहता है और न्यू जर्सी में छात्रों को इस पर्व पर छुट्टी लेने की अनुमति दी जाती है। ऐसे में कैलिफोर्निया में दिवाली की छुट्टी पर रोक लगाना समझ से परे है।


















