संयुक्त राज्य अमेरिका में आगामी मिडटर्म चुनावों को लेकर सियासी सरगर्मियां अपने चरम पर पहुंच चुकी हैं और मतदान के औपचारिक दिन तक पहुंचने के लिए अब महज 45 दिनों की उल्टी गिनती बची है। यह विशाल चुनावी प्रक्रिया यह तय करने वाली है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के बाकी बचे वक्त में अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों पर रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण बरकरार रहेगा या फिर विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी बहुमत हासिल कर सत्ता संतुलन अपने हाथ में ले लेगी। चुनावी विश्लेषक इस पूरे चुनाव को सीधे तौर पर ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकताओं और उनकी नीतियों पर जनता का खुला फैसला मान रहे हैं। वर्तमान समय में समूचे देश के भीतर लगातार बढ़ रही महंगाई, आम नागरिकों के लिए पेट्रोल और डीजल की बढ़ती लागत और डांवाडोल होती आर्थिक स्थिति सबसे तीखे चुनावी मुद्दों में तब्दील हो चुके हैं, जिनसे सत्तारूढ़ दल की साख गंभीर कसौटी पर है।
बीस राज्यों में डाक मतपत्रों का वितरण और शुरुआती वोटिंग की शुरुआत
मतदान के मुख्य दिन में 45 दिन शेष रहते ही अमेरिका के 20 अलग-अलग राज्यों ने अपने पंजीकृत नागरिकों को डाक के जरिए मतपत्र पहुंचाने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। इनमें टेक्सास, मिशिगन और नॉर्थ कैरोलिना जैसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण राज्य शामिल हैं, जहां सीनेट की एक-एक सीट को जीतने के लिए रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला देखा जा रहा है। चुनाव प्रबंधन के कार्यक्रम के अनुसार, अगले 15 दिनों के भीतर 13 अन्य राज्य भी इसी कतार में शामिल हो जाएंगे और अपने-अपने क्षेत्रों के मतदाताओं के घरों तक डाक मतपत्रों की डिलीवरी शुरू कर देंगे। चुनावी विशेषज्ञों का अनुमान है कि 3 नवंबर की तारीख आने से पहले ही देश के करोड़ों वोटर अपने मताधिकार का प्रयोग कर चुके होंगे। अमेरिका की चुनावी प्रणाली में मेल-इन वोटिंग यानी घर पर डाक द्वारा मतपत्र प्राप्त करके वोट दर्ज कराने का चलन बीते कुछ वर्षों में तेजी से लोकप्रिय हुआ है, और इस चुनाव चक्र में भी एक भारी आबादी इसी विकल्प को अपना रही है।
डाक मतपत्रों के अलावा, मतदान केंद्र पर स्वयं पहुंचकर वोट डालने यानी अर्ली इन-पर्सन वोटिंग का सिलसिला भी शुरू हो चुका है। सेंटर फॉर इलेक्शन इनोवेशन एंड रिसर्च के संकलित आंकड़ों के मुताबिक, आइडाहो, मिनेसोटा, साउथ डकोटा और वर्जीनिया में शुक्रवार से ही शुरुआती मतदान केंद्र सक्रिय कर दिए गए हैं। इन चारों राज्यों में नागरिक अभी से मतदान केंद्रों के बाहर कतारबद्ध होकर अपने मत डाल रहे हैं। जमीनी स्तर पर मतदाताओं की यह सक्रिय भागीदारी साफ संकेत देती है कि अमेरिकी चुनावी प्रक्रिया अब अपने निर्णायक और अंतिम चरण में प्रवेश कर चुकी है। विश्लेषक रेखांकित कर रहे हैं कि शुरुआती मतदान केंद्रों से निकलने वाले रुझान सीधे तौर पर यह दर्शाएंगे कि डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल के अब तक के फैसलों से देश का जनमानस कितना सहमत अथवा असंतुष्ट है।
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से चुनाव अधिकारियों को बड़ी प्रशासनिक राहत
मतदान के आधिकारिक दिन से काफी पहले लाखों लोगों को निर्बाध रूप से मतदान करने की जो सुविधा मिली है, उसकी एक प्रमुख पृष्ठभूमि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का एक महत्वपूर्ण आदेश है। कुछ ही दिनों पहले देश की शीर्ष अदालत ने ट्रंप प्रशासन द्वारा प्रस्तुत उस याचिका और पहल को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसके जरिए डाक से मतदान करने की व्यवस्था पर नए प्रतिबंध और कड़े नियम थोपने का प्रयास किया गया था। ट्रंप प्रशासन यह अनिवार्य करना चाहता था कि यूएस पोस्टल सर्विस यानी यूएसपीएस के माध्यम से भेजे जाने वाले तमाम मतपत्रों के लिए केवल एक समान लिफाफे का इस्तेमाल किया जाए और योग्य मतदाताओं की समूची सूची एक ऑनलाइन वेब पोर्टल पर सार्वजनिक रूप से अपलोड की जाए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को अस्वीकार करते हुए राज्यों को अपने पूर्व-निर्धारित स्थानीय नियमों और पुरानी व्यवस्था के अनुरूप ही चुनाव प्रक्रिया संचालित करने की पूरी स्वायत्तता प्रदान कर दी।
सर्वोच्च अदालत के इस निर्णय से विभिन्न राज्यों और काउंटी स्तर पर मतदान की व्यवस्था संभाल रहे प्रशासनिक अधिकारियों ने चैन की सांस ली है। वाशिंगटन राज्य के पियर्स काउंटी की ऑडिट अधिकारी लिंडा फार्मर के अनुसार, न्यायिक फैसले ने चुनाव मशीनरी के सिर से एक बड़ा दबाव हटा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विभाग स्थानीय मतदाताओं को लगातार जागरूक कर रहा है कि उनके आधिकारिक मतपत्र तय समयसीमा के भीतर उनके घरों तक सुरक्षित पहुंच जाएंगे। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण इलाकों में डाक वितरण में होने वाली संभावित देरी से निपटने के लिए नागरिकों को समय पर अपना मतपत्र भरकर वापस भेजने अथवा विशेष रूप से बनाए गए सुरक्षित ड्रॉप बॉक्स का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
आर्थिक मोर्चे पर महंगाई और बढ़ती ब्याज दरों का संकट
मतदान का बिगुल बजने के साथ ही आर्थिक परिदृश्य रिपब्लिकन पार्टी की चुनावी संभावनाओं के लिए बेहद जटिल प्रतीत हो रहा है। हाल के सप्ताहों में अमेरिका की आर्थिक स्थिति को लेकर जो सांख्यिकीय आंकड़े सामने आए हैं, वे सीधे तौर पर सत्तापक्ष की रणनीति पर भारी पड़ रहे हैं। ईंधन की कीमतों में इजाफे से पेट्रोल और डीजल के खुदरा भाव तेजी से बढ़ रहे हैं, आवश्यक वस्तुओं की महंगाई थामने में कठिनाई आ रही है और आवास क्षेत्र में घर खरीदने के लिए दिए जाने वाले होम लोन की ब्याज दरें अत्यंत ऊंचे स्तरों पर पहुंच चुकी हैं। आर्थिक मोर्चे की यह निरंतर चुनौतियां ऐसे समय पर मतदाताओं के सामने हैं जब वे संसद के लिए अपने प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया में हैं।
इन गंभीर वित्तीय परिस्थितियों के बावजूद रिपब्लिकन नेतृत्व सार्वजनिक मंचों पर आश्वस्त नजर आने का प्रयास कर रहा है। प्रतिनिधि सभा यानी हाउस के स्पीकर माइक जॉनसन ने संवाददाताओं से चर्चा के दौरान यह दावा प्रस्तुत किया कि उनकी पार्टी को आर्थिक मुद्दों की वजह से चुनावी पराजय का कोई भय नहीं है। उनका तर्क था कि मौजूदा सरकार आम परिवारों के दैनिक खर्चों को नियंत्रित करने और नागरिकों को राहत पहुंचाने के लिए लगातार नए और प्रभावी नीतिगत कदम उठा रही है। बहरहाल, पार्टी के इन सकारात्मक दावों के उलट चुनाव से ऐन पहले सांसदों को निर्धारित समय से पूर्व ही विधायी सत्र से अवकाश दे दिया गया है, ताकि वे अपनी-अपनी सीटों और चुनावी हलकों में जाकर नाराज मतदाताओं को अपने पक्ष में लामबंद करने का प्रयास कर सकें।
ओपिनियन पोल में बढ़त और संसद पर नियंत्रण की खींचतान
रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रीय मिडटर्म सम्मेलन के समापन के बाद भी जनमत सर्वेक्षणों के नतीजे पार्टी को अपेक्षित मजबूती नहीं दिला सके हैं। पारंपरिक रूप से किसी बड़े राष्ट्रीय राजनीतिक आयोजन के बाद मतदाताओं के बीच संबंधित दल के समर्थन में जो स्वाभाविक उछाल देखने को मिलता है, वह इस दफा रिपब्लिकन पार्टी के मामले में दर्ज नहीं हुआ है। रियल क्लियर पॉलिटिक्स द्वारा हाल ही में जारी किए गए व्यापक ओपिनियन पोल के आंकड़े बताते हैं कि जब मतदाताओं से उनकी चुनावी प्राथमिकता पूछी गई, तो विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी अपने प्रतिद्वंद्वी रिपब्लिकन से लगभग 9 प्रतिशत अंकों की स्पष्ट बढ़त हासिल करती हुई दिखाई दी।
इस बढ़त से उत्साहित होकर हाउस में मेजॉरिटी लीडर हकीम जेफरीज ने जोर देकर कहा है कि मौजूदा समय में देश की जनता हर अहम मसले पर उनकी पार्टी के साथ खड़ी है। जेफरीज के अनुसार, चाहे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने का सवाल हो, स्वास्थ्य सुविधाओं और जनहितैषी उपचार व्यवस्था का विस्तार हो या अन्य प्रमुख आंतरिक नीतियां, मतदाता बदलाव के पक्ष में मन बना चुके हैं। आने वाले 45 दिनों का सघन प्रचार अभियान यह स्पष्ट करेगा कि क्या रिपब्लिकन पार्टी अपनी चुनावी सीटों को बचा पाती है या डेमोक्रेटिक पार्टी इस जनआक्रोश को भुनाकर वॉशिंगटन में नया सत्ता संतुलन स्थापित करने में सफल रहती है।





















