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सौर मंडल के बीच विराजे गणपति, बाड़मेर के पंडाल में श्रद्धालुओं को मिला अंतरिक्ष दर्शन का अनुभवराजस्थान
20 सित॰ 2026, 2:35 pm (1 दिन पहले)· 0

सौर मंडल के बीच विराजे गणपति, बाड़मेर के पंडाल में श्रद्धालुओं को मिला अंतरिक्ष दर्शन का अनुभव

बाड़मेर के जुनी चौकी पाड़ा में कृष्ण कन्हैया सेवा समिति ने गणेश उत्सव के दौरान अंतरिक्ष और ग्रहों की थीम पर विशेष दरबार सजाया है, जहां भक्त बप्पा के दर्शन के साथ खगोलीय दृश्य का आनंद ले रहे हैं।

गणेश उत्सव के पावन पर्व पर राजस्थान के बाड़मेर शहर में आस्था और कलात्मक कल्पना का अनूठा दृश्य सामने आया है। शहर के जुनी चौकी पाड़ा क्षेत्र में सजे एक विशेष पंडाल में प्रवेश करते ही भक्तों को किसी दूसरे ग्रह या अंतरिक्ष लोक में पहुंचने जैसा अहसास हो रहा है। स्थानीय आयोजक कृष्ण कन्हैया सेवा समिति ने इस वर्ष पारंपरिक सजावट से अलग हटकर सौर मंडल पर आधारित पंडाल का निर्माण कराया है, जो पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।

ग्रहों के घेरे में बप्पा की खड़ी प्रतिमा

इस अनूठे मंडप के भीतरी हिस्से को ब्रह्मांडीय परिदृश्य की तरह व्यवस्थित किया गया है। रंग-बिरंगी आधुनिक रोशनी और तारों-ग्रहों की प्रतिकृतियों के बीच भगवान गणेश की भव्य खड़ी प्रतिमा स्थापित की गई है। पंडाल की बनावट ऐसी रखी गई है कि केंद्र में विराजमान विघ्नहर्ता के चारों ओर सौर मंडल के विभिन्न ग्रह परिक्रमा करते प्रतीत होते हैं। यह मनोहारी नजारा वहां पहुंचने वाले हर श्रद्धालु को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।

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वर्ष 2012 से चली आ रही परंपरा

आयोजन से जुड़े समिति के सदस्य धर्मेंद्र गुप्ता ने बताया कि कृष्ण कन्हैया सेवा समिति वर्ष 2012 से लगातार शहर में गणेश उत्सव मनाती आ रही है। समिति की यह परंपरा रही है कि प्रत्येक वर्ष आम दर्शनार्थियों के लिए कुछ नया, रचनात्मक और विशिष्ट परिवेश तैयार किया जाए। इस कड़ी में इस बार अंतरिक्ष और खगोल विज्ञान पर आधारित स्वरूप चुना गया, जिससे धार्मिक आस्था के साथ-साथ एक नया दृष्टिकोण भी देखने को मिले।

बच्चों और युवाओं में दिखा भारी उत्साह

इस पंडाल की रचनात्मकता विशेष रूप से बाल वर्ग और युवाओं को अपनी ओर खींच रही है। भगवान श्रीगणेश के दर्शन करने पहुंच रहे लोग प्रतिमा की वंदना के उपरांत पंडाल की बारीक सजावट और खगोलीय प्रतिरूपों को कौतूहल से देख रहे हैं। धर्मेंद्र गुप्ता का कहना है कि आयोजन समिति की सोच सदैव यही रहती है कि उत्सव के जरिए भक्तों को आध्यात्मिक शांति के साथ एक यादगार और प्रेरणादायक अनुभव प्रदान किया जाए, और इस वर्ष की अंतरिक्ष थीम को आम जनता का भरपूर स्नेह मिल रहा है।

सवाल-जवाब

बाड़मेर में यह अंतरिक्ष थीम वाला गणेश पंडाल कहां स्थित है?
यह अनूठा पंडाल बाड़मेर शहर के जुनी चौकी पाड़ा क्षेत्र में तैयार किया गया है।
इस पंडाल का निर्माण किस संस्था द्वारा कराया गया है?
इस आयोजन और पंडाल की सजावट का कार्य कृष्ण कन्हैया सेवा समिति द्वारा किया गया है।
कृष्ण कन्हैया सेवा समिति कब से गणेश उत्सव मना रही है?
आयोजक धर्मेंद्र गुप्ता के अनुसार समिति वर्ष 2012 से लगातार गणेश उत्सव का आयोजन कर रही है।
पंडाल के भीतर भगवान गणेश की प्रतिमा किस रूप में स्थापित है?
पंडाल में ग्रहों और अंतरिक्षीय सजावट के बीच भगवान गणेश की खड़ी प्रतिमा स्थापित की गई है।
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टिप्पणियाँ 5

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·18 घंटे पहले

2012 से लगातार इस तरह के अनूठे आयोजन करना और हर साल कुछ नया पेश करना, उसी टीम भावना और सामूहिक समन्वय को दर्शाता है जो हमें किसी खेल क्लब या टीम मैनेजमेंट में दिखाई देता है। स्थानीय स्तर पर युवाओं और बच्चों को आकर्षित करने का यह रचनात्मक तरीका ठीक वैसा ही है जैसे खेल अकादमियां नई पीढ़ी को मैदान की ओर खींचने के लिए नए प्रयोग करती हैं। जमीनी स्तर पर ऐसी सामुदायिक भागीदारी और अनुशासन खेल आयोजनों की तरह ही युवाओं में सहयोग, लीडरशिप और एकजुटता की भावना को मजबूत करता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·23 घंटे पहले

बाड़मेर जैसे सीमावर्ती क्षेत्र में धार्मिक उत्सवों के माध्यम से अंतरिक्ष विज्ञान और खगोलीय चेतना का यह प्रसार जन-नीति और सामाजिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद ५१ए में नागरिकों के जिस वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकसित करने का उल्लेख है, उसका ऐसा व्यावहारिक क्रियान्वयन सरकारी अभियानों से अधिक प्रभावी साबित होता है। जब स्थानीय समितियां पारंपरिक मंचों को विज्ञान और नवाचार से जोड़ती हैं, तो यह भावी पीढ़ी में तार्किक सोच और जिज्ञासा को प्रोत्साहित करता है। सांस्कृतिक आयोजनों का जन-जागरूकता के माध्यम के रूप में बदलना नागरिक समाज की सकारात्मक प्रगति को दर्शाता है।

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

त्योहारों के मंच पर आधुनिक विज्ञान और अंतरिक्ष जैसे विषयों का समावेश भारतीय जनमानस में बदलते दृष्टिकोण को दर्शाता है। अंतरिक्ष अभियानों की हालिया सफलताओं के दौर में छोटे शहरों तक युवाओं में खगोल विज्ञान के प्रति गहरी दिलचस्पी देखी जा रही है। बाड़मेर जैसे सीमांत इलाके में धार्मिक परंपरा के साथ अंतरिक्ष विज्ञान का यह समन्वय न केवल उत्सव की रचनात्मकता को बढ़ाता है, बल्कि जमीनी स्तर पर बच्चों में वैज्ञानिक सोच और जिज्ञासा को भी अनौपचारिक रूप से बढ़ावा देता है। सांस्कृतिक आयोजनों का यह आधुनिक रुझान भविष्य में जन-जागरूकता और रचनात्मक अर्थव्यवस्था का सशक्त माध्यम बन सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

धार्मिक आयोजनों में विज्ञान और रचनात्मक विचारों का यह समावेश छोटे शहरों के बदलते सांस्कृतिक परिदृश्य को दर्शाता है। बाड़मेर जैसे सीमावर्ती क्षेत्र में सौर मंडल थीम पर पंडाल सजाना केवल एक कलात्मक प्रयोग नहीं, बल्कि बच्चों और युवाओं में खगोलीय जिज्ञासा जगाने का एक प्रभावी माध्यम भी है। मेट्रो शहरों से निकलकर अब छोटे जिलों और कस्बों तक थीम-बेस्ड पंडालों का चलन बढ़ रहा है, जो लोक-उत्सवों को केवल आस्था तक सीमित न रखकर शिक्षा और सामाजिक चेतना से जोड़ता है। इस तरह के प्रयास जन-भागीदारी को नया आयाम देते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

रोहन की बात सही है, लेकिन सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के नज़रिए से ऐसे लोकप्रिय आयोजनों का एक व्यावहारिक पहलू भी है। जब किसी घनी आबादी वाले इलाके में इस तरह के अनूठे थीम आधारित पंडाल भारी भीड़, खासकर बच्चों और युवाओं को आकर्षित करते हैं, तो सुरक्षा प्रबंधन सर्वोपरि हो जाता है। भारी बिजली की सजावट और कृत्रिम ढांचों के बीच अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन निकास और भगदड़ जैसी अप्रिय घटनाओं की रोकथाम के कड़े उपाय अनिवार्य हैं। सीमावर्ती इलाकों में आयोजकों और स्थानीय पुलिस के बीच यह अनुशासित समन्वय न केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखता है, बल्कि सामुदायिक पुलिसिंग को भी मजबूत करता है।

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