उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन करीब एक साल के अंतराल के बाद चीन की यात्रा पर पहुंचे हैं। दक्षिण कोरिया के मीडिया संस्थानों और आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारियों के अनुसार किम जोंग उन चीन की सीमा से सटे शहर डांडोंग पहुंच चुके हैं। इस औचक दौरे को बीजिंग और प्योंगयांग के आपसी आर्थिक संबंधों को नई गति देने और क्षेत्रीय भू-राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, दक्षिण कोरिया की सरकार की तरफ से अभी तक इस यात्रा की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
न्यू यालू रिवर ब्रिज के जरिए ड्रैगन की सीमा में प्रवेश
दक्षिण कोरियाई समाचार एजेंसी योनहाप की रिपोर्ट के मुताबिक किम जोंग उन ने चीन की सीमा में प्रवेश करने के लिए नवनिर्मित न्यू यालू रिवर ब्रिज का इस्तेमाल किया। यह रणनीतिक पुल साल 2014 में ही बनकर तैयार हो गया था, लेकिन सड़क संपर्क और सीमा शुल्क संबंधी बुनियादी ढांचा पूरा न हो पाने के कारण इसे जनता के लिए खोलने में लंबा विलंब हुआ। आखिरकार इस पुल को 15 अक्टूबर को आधिकारिक तौर पर आवाजाही के लिए खोल दिया गया था।
आर्थिक कूटनीति और बीजिंग का समर्थन हासिल करने की कवायद
चीन उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा और प्रमुख व्यापारिक साझेदार है। आर्थिक सहायता और वैश्विक मंचों पर कूटनीतिक बैकिंग के लिए प्योंगयांग बहुत हद तक बीजिंग पर आश्रित रहता है। ऐसे में किम की यह यात्रा दोनों पड़ोसी देशों के द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने के लिए अहम है। दक्षिण कोरिया के प्रमुख अखबार कोरिया जूंगआंग डेली के अनुसार चीन के प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने डांडोंग पहुंचने पर किम जोंग उन का गर्मजोशी से स्वागत किया। जानकारों का मानना है कि किम चीन के साथ पहले से तय समझौतों को तेजी से लागू करने पर जोर दे सकते हैं। इसके अलावा, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने वाली संभावित मुलाकात से पहले बीजिंग का भरोसा और समर्थन जुटाना भी इस यात्रा का एक बड़ा मकसद हो सकता है।
एशिया-प्रशांत शिखर सम्मेलन और क्षेत्रीय तनाव की पृष्ठभूमि
आगामी नवंबर महीने में चीन के शेनझेन शहर में एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग यानी एपेक शिखर सम्मेलन का आयोजन होना है, जिसमें दुनिया भर के कई दिग्गज नेता शिरकत करेंगे। इस आयोजन के दौरान किम और ट्रंप के बीच संभावित वार्ता को लेकर अंतरराष्ट्रीय हलकों में चर्चाएं गर्म हैं। हालांकि दोनों नेताओं के मिलने का कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। किम जोंग उन की यह चीन यात्रा ऐसे नाज़ुक वक्त में हुई है जब उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच आपसी रिश्ते भारी तनाव के दौर से गुजर रहे हैं।
सैन्य ताकत बढ़ाने के निर्देश और सुरक्षा पर असर
दूसरी तरफ, किम ने अपनी सेना को दुनिया की सबसे ताकतवर सेनाओं की श्रेणी में शामिल करने के वास्ते सैन्य प्रशिक्षण और अभ्यासों को और तेज करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। उत्तर कोरिया अपने परमाणु शस्त्रागार को अपनी संप्रभुता और सुरक्षा का स्थायी स्तंभ मानता आया है। इन तमाम घटनाक्रमों के बीच किम जोंग उन की इस बीजिंग यात्रा का सीधा प्रभाव क्षेत्रीय सुरक्षा और आने वाले दिनों में होने वाली कूटनीतिक गतिविधियों पर पड़ना तय माना जा रहा है।
















