उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के बिलासपुर इलाके में स्थित डाम कॉलोनी का पंचमुखी हनुमान मंदिर आज पूरे क्षेत्र में अगाध श्रद्धा और आस्था का मुख्य केंद्र बन चुका है। इस पावन स्थल की उत्पत्ति और विकास की कहानी बेहद अनोखी और चमत्कारों से जुड़ी हुई है। शुरुआत में एक आम भक्त के रूप में इस स्थान पर आने वाले दिनेश शर्मा का जीवन तब पूरी तरह बदल गया, जब उन्हें बाबा सीताराम जी का सानिध्य और आशीर्वाद प्राप्त हुआ। उस विशेष आशीर्वाद का ही प्रभाव था कि दिनेश शर्मा ने न केवल इस मंदिर की सेवा संभाली, बल्कि अपनी सच्ची निष्ठा और अटूट संकल्प के बल पर यहां एक विशाल पंचमुखी हनुमान धाम का निर्माण करवाया।
साधना और सेवा का लंबा सफर
इस पवित्र मंदिर की सेवा और देखभाल में करीब 40 साल बिताने वाले नरेंद्र कुमार बाबा भी मूल रूप से एक साधारण श्रद्धालु ही हुआ करते थे। समय के साथ उन्होंने मंदिर परिसर में ही निवास करना शुरू कर दिया और पूरी तरह से भगवान की आराधना तथा आगंतुकों की सेवा में समर्पित हो गए। स्थानीय लोगों का मानना है कि बाबा सीताराम जी की विशेष कृपा के कारण उन्हें असाधारण आध्यात्मिक ऊर्जा और प्रेरणा मिली थी। मान्यता थी कि जो भी दुखी या पीड़ित व्यक्ति अपनी समस्याओं के साथ यहां पहुंचता था, उसे यहां आकर मानसिक संबल और समाधान अवश्य मिलता था। कई लोग तो अपनी परेशानियों के निवारण के लिए दो से तीन दिनों तक मंदिर परिसर में ही ठहर जाते थे और जब वे वापस लौटते थे, तो उनकी समस्याएं पूरी तरह सुलझ चुकी होती थीं।
दूर-दूर तक फैली है मंदिर की ख्याति
नरेंद्र बाबा ने इस पूरे धार्मिक स्थल की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाया और अपनी देखरेख में पंचमुखी हनुमान जी के भव्य मंदिर का निर्माण कार्य पूरा कराया। आज के समय में यह स्थान केवल डाम कॉलोनी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि रामनगर, हल्द्वानी, बरेली और बहेड़ी जैसे तमाम दूरदराज के इलाकों में भी अत्यधिक प्रसिद्ध हो चुका है। हर सप्ताह आने वाले मंगलवार और शनिवार के विशेष अवसरों पर यहां भारी संख्या में भक्तों का तांता लगा रहता है और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
आज भी जीवित है बाबा की प्रेरणा
यद्यपि नरेंद्र बाबा अब इस भौतिक संसार में नहीं हैं, फिर भी उनकी उपस्थिति का अहसास आज भी भक्तों को गहराई से होता है। मंदिर परिसर में ही उनकी समाधि का निर्माण किया गया है, जिसके समीप बैठकर लोग आज भी अपने मन की बातें साझा करते हैं और यह विश्वास रखते हैं कि बाबा उनकी पुकार अब भी सुनते हैं। यही कारण है कि स्थानीय लोग और दूरदराज से आने वाले भक्त इस स्थान को पूरी श्रद्धा के साथ चमत्कारी मंदिर के रूप में याद करते हैं और यहां आकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।


















