अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंचों और शांति पुरस्कारों को लेकर अपनी नाराजगी सार्वजनिक की है। फ्लोरिडा में आयोजित एक जनसभा के दौरान उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अपने कार्यकाल में भारत और पाकिस्तान के बीच छिड़े गंभीर सैन्य टकराव समेत कुल 8 युद्धों को टालने में सीधी भूमिका निभाई। इसके बावजूद उन्हें वैश्विक स्तर पर वह सम्मान नहीं दिया गया जिसके वे हकदार थे। अपनी कूटनीतिक कोशिशों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर इतने बड़े संकटों को सुलझाने के बाद भी उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार नहीं दिया गया।
व्यापार पर पाबंदी और भारी टैरिफ की चेतावनी
जनसभा में उपस्थित भीड़ को संबोधित करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि उन्होंने दक्षिण एशिया के दोनों परमाणु हथियार संपन्न पड़ोसियों को सख्त लहजे में चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा कि यदि दोनों देशों ने सैन्य टकराव तुरंत बंद नहीं किया, तो वाशिंगटन उनके साथ सभी व्यापारिक संबंध पूरी तरह समाप्त कर देगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दोनों मुल्कों के सामने स्पष्ट शर्त रखी थी कि शांति स्थापित न होने की स्थिति में उनके उत्पादों पर 250 प्रतिशत का भारी टैरिफ थोप दिया जाएगा।
डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार इस आर्थिक दबाव की रणनीति ने तुरंत असर दिखाया। ट्रंप ने अपने भाषण में कहा, "मैंने आठ लड़ाइयां रोकीं हैं। क्या मुझे नोबेल प्राइज़ मिला? नहीं।" इसके साथ ही उन्होंने यह दावा भी दोहराया कि दोनों देशों के बीच हुए इस भीषण सैन्य गतिरोध के दौरान 11 सैन्य विमान मार गिराए गए थे। ट्रंप का मानना है कि उनकी 250 प्रतिशत टैरिफ लगाने की चेतावनी के बाद ही दोनों पक्ष युद्ध विराम की मेज पर आने के लिए मजबूर हुए थे।
भारत का रुख और बाहरी मध्यस्थता का खंडन
अमेरिकी राष्ट्रपति के इन दावों के विपरीत भारत ने हमेशा किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता या विदेशी दबाव की बातों को सिरे से खारिज किया है। नई दिल्ली ने 11 लड़ाकू विमानों के नुकसान संबंधी आंकड़ों को भी पूरी तरह तथ्यहीन करार दिया है। भारत का आधिकारिक रुख स्पष्ट रहा है कि दोनों देशों के बीच सीमा पर गोलाबारी रोकने का समझौता पूरी तरह से द्विपक्षीय स्तर पर हुआ था। जब पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस यानी डीजीएमओ ने भारतीय समकक्ष से संपर्क करके सैन्य कार्रवाई रोकने की गुहार लगाई, केवल तभी युद्ध विराम पर सहमति बनी थी।
पहलगाम हमला और ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि
यह पूरा सैन्य घटनाक्रम अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में निर्दोष पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले के बाद शुरू हुआ था। इस क्रूर घटना की साजिश सीमा पार से रची गई थी। इसके जवाब में भारत ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की। इस सटीक और रणनीतिक सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकी बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षण शिविरों को जड़ से खत्म करना था।
भारतीय सेना के इस शुरुआती प्रहार में सीमा पार सक्रिय कई आतंकी लॉन्चपैड पूरी तरह ध्वस्त कर दिए गए थे। इस नुकसान से बौखलाकर पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों और रिहायशी बस्तियों को निशाना बनाने की कोशिश की। हालांकि भारत की मजबूत और सतर्क एयर डिफेंस प्रणाली ने पड़ोसी मुल्क के हर हवाई हमले और मिसाइल प्रयास को हवा में ही नाकाम कर दिया।
ब्रह्मोस हमलों के बाद झुका पाकिस्तान
पाकिस्तानी सेना द्वारा लगातार जारी उकसावे वाली हरकतों के बाद भारत ने निर्णायक कदम उठाया। भारतीय सशस्त्र बलों ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों से सटीक निशाना साधते हुए पाकिस्तान के 11 प्रमुख सैन्य हवाई अड्डों पर भीषण प्रहार किए। इन हमलों में सीमा पार भारी सैन्य तबाही मची, जिससे पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व में भारी घबराहट फैल गई। अपने बुनियादी ढांचे के व्यापक विनाश को देखकर पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारतीय पक्ष को फोन मिलाया और सैन्य कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया, जिसके बाद दोनों देशों के बीच युद्ध विराम लागू हुआ।



















