संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से संबोधित करने के कुछ ही घंटों के भीतर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अपने कड़े तेवर दिखाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन के सामने इस्लामिक रिपब्लिक को लेकर केवल दो ही विकल्प मौजूद हैं, जिनमें पहला रास्ता बातचीत के जरिए समझौते का है और दूसरा कड़ा सैन्य कदम उठाने का है। यदि दोनों पक्षों के बीच किसी ठोस समझौते पर सहमति नहीं बन पाती है, तो ऐसी स्थिति में अमेरिका ईरान के अस्तित्व को समाप्त करने जैसी कठोर कार्रवाई करने से भी पीछे नहीं हटेगा।
समझौता अथवा कठोर सैन्य विकल्प
भाषण के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी रेखांकित किया कि यदि ईरान समझौते का मार्ग चुनता है, तो उसके पास अपने मुल्क का पुनर्निर्माण करने और विश्व के सर्वाधिक सशक्त राष्ट्रों की कतार में खड़े होने का सुनहरा अवसर होगा। दूसरी ओर, यदि कूटनीति विफल रहती है, तो अमेरिका की ओर से सभी सैन्य विकल्पों को पूरी तरह खुला रखा गया है। यह सख्त रुख ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देशों के बीच जारी सैन्य टकराव को टालने और शांति स्थापित करने की दिशा में कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। इस दीर्घकालिक तनाव का सीधा प्रभाव समूचे पश्चिम एशिया की क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति पर साफ तौर पर देखा जा रहा है।
न्यूयॉर्क में तीन घंटे तक चली कूटनीतिक चर्चा
कड़े बयानों के तुरंत बाद न्यूयॉर्क में अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधियों के बीच लगभग तीन घंटे तक गहन विचार विमर्श हुआ। पत्रकारों से बातचीत करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने इस बैठक को बेहद सकारात्मक और परिणामोन्मुख करार दिया। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों पक्षों के मध्य संवाद की यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी और बहुत जल्द एक और दौर की बैठक आयोजित किए जाने की संभावना है। हालांकि, अगली कूटनीतिक वार्ता की निर्धारित तिथि और उसमें भाग लेने वाले विशिष्ट अधिकारियों के नामों के संबंध में उन्होंने कोई विस्तृत विवरण साझा नहीं किया।
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव और ईरान का रुख
बातचीत की पृष्ठभूमि पर अपनी राय रखते हुए ट्रंप ने आशंका जताई कि ईरान संभवतः नवंबर महीने में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के संपन्न होने की प्रतीक्षा कर रहा है। उनके अनुसार, तेहरान अमेरिका के आंतरिक राजनीतिक घटनाक्रम और आगामी चुनावी परिणामों पर करीबी नजर रखे हुए है ताकि उसी अनुरूप अपनी रणनीति तय कर सके। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी घरेलू चुनावों को द्विपक्षीय बातचीत की प्रगति में किसी भी प्रकार की रुकावट नहीं बनना चाहिए, साथ ही उन्होंने अपने पिछले राष्ट्रपति चुनाव में दर्ज की गई जीत का भी उल्लेख किया।
फिलहाल सामने आए घटनाक्रम से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि अमेरिका कड़े प्रतिबंधों और धमकियों के जरिए दबाव बनाए रखते हुए कूटनीतिक रास्तों को भी समानांतर रूप से सक्रिय रखना चाहता है। हालांकि इस ताजा बैठक के बाद किसी अंतिम समझौते का ऐलान नहीं हुआ है, मगर दोनों पक्षों के बीच संवाद जारी रहने की उम्मीद अभी भी बनी हुई है।





















