अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के मतदाताओं के राजनीतिक रुझान में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कुछ समय पहले तक रिपब्लिकन पार्टी की ओर झुकाव रखने वाले यह मतदाता अब उससे दूर होते जा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि इस बदलाव के पीछे कई ऐसी नीतियां और बयानबाजी हैं जिन्होंने इस समुदाय के बीच गहरी नाराजगी पैदा की है।
भारत विरोधी रुख और पाकिस्तान से नजदीकी
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारत को लेकर रुख में आए बदलाव ने भारतीय प्रवासियों को निराश किया है। पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकियों और गाहे-बगाहे भारत के खिलाफ दिए जाने वाले बयानों ने इस पूरे समीकरण को पलट दिया। चुनाव नजदीक आते-आते यह असंतोष स्पष्ट रूप से वोटों के रूप में सामने आने लगा।
MAGA समर्थकों की बयानबाजी से बढ़ा तनाव
इस बदलाव के पीछे MAGA आंदोलन से जुड़े कुछ समर्थकों की टिप्पणियों को भी अहम वजह माना जा रहा है। इस राजनीतिक आंदोलन के दायरे में कई बार भारतीय प्रवासियों को निशाना बनाया गया, जिससे समुदाय के भीतर असुरक्षा की भावना पैदा हुई। इसके अलावा, भारत के रणनीतिक कदमों पर ट्रंप की टिप्पणियों ने भी स्थिति को और पेचीदा बना दिया।
विदेशी नीति विशेषज्ञों की राय
विदेश नीति मामलों के जानकार ध्रुव जयशंकर ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि अमेरिका की कुल आबादी में भारतीय-अमेरिकियों की हिस्सेदारी भले ही छोटी यानी करीब 1 से 1.5 प्रतिशत हो, लेकिन चंदे और चुनावी क्षेत्रों में प्रभाव के लिहाज से यह बेहद अहम हैं। साल 2024 के चुनाव में युवा भारतीय-अमेरिकी पुरुषों के एक वर्ग ने ट्रंप का समर्थन किया था, लेकिन तब भी अधिकांश मतदाताओं ने डेमोक्रेटिक पार्टी को ही चुना था।
सर्वे के आंकड़े और राजनीतिक समीकरण
कार्नेगी एंडोमेंट और रिसर्च फर्म YouGov द्वारा अक्टूबर 2026 में कराए गए सर्वे में भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं का यह नया रुख खुलकर सामने आया। एक हजार भारतीय-अमेरिकी वयस्कों पर किए गए इस अध्ययन में 62 प्रतिशत ने कांग्रेस चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान की इच्छा जताई, जबकि मात्र 19 प्रतिशत ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन किया। इसके अलावा 12 प्रतिशत मतदाता ऐसे थे जो किसी एक पक्ष पर तय नहीं कर पा रहे थे।
वीजा नियम और इमिग्रेशन नीतियां
भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं की नाराजगी के पीछे केवल कूटनीतिक कारण ही नहीं, बल्कि घरेलू और इमिग्रेशन नीतियां भी शामिल हैं। H1B वीजा के नियमों को कड़ा करना और इसे महंगा बनाना उन फैसलों में था जिसने पेशेवर भारतीयों के बीच चिंता बढ़ाई। ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिका में नौकरी और अवसरों को लेकर उठाए गए कदमों ने इस समुदाय को रिपब्लिकन पार्टी से दूर करने का काम किया।
पाकिस्तान के साथ संबंधों पर सवाल
भारत ने जब आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाते हुए पड़ोसी देश में कार्रवाई की, तो ट्रंप ने इस स्थिति को अपने नियंत्रण का नतीजा बताने की कोशिश की। इसके विपरीत, पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ अमेरिकी प्रशासन की मेलजोल भरी तस्वीरें और कूटनीतिक मेल-मुलाकातें भारतीय प्रवासियों को बिल्कुल रास नहीं आईं।
डेमोक्रेटिक पार्टी को मिला सीधा लाभ
हालिया चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी को इस नाराजगी का सीधा फायदा मिलता दिखाई दिया। इस दौरान सुहास सुब्रमण्यम और पिया दांडिया जैसे भारतीय मूल के कई उम्मीदवारों ने भी जीत हासिल की। जानकारों का कहना है कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय का मतदान अब किसी एक मुद्दे पर निर्भर नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रवासियों के अधिकारों, आर्थिक प्राथमिकताओं और कूटनीतिक रुख जैसे कई संयुक्त कारकों से तय हो रहा है।


















