पर्सियन गल्फ और ओमान की खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव बेहद गंभीर और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने 8 सितंबर 2026 को एक बड़ा सैन्य अभियान चलाते हुए ईरान से जुड़े 5 क्रूड ऑयल टैंकरों को निशाना बनाकर उन्हें चलने लायक नहीं छोड़ा। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार यह जोरदार कार्रवाई ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा पिछले 48 घंटों में अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत पर दो बार बैलिस्टिक मिसाइलें दागने के प्रयास के जवाब में की गई है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि ईरानी मिसाइल हमलों के बावजूद अमेरिकी युद्धपोत पूरी तरह सुरक्षित रहा, उसने दोनों हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम किया और क्षेत्र में अपनी नियमित समुद्री गश्त जारी रखी। इस पूरी घटना में किसी भी अमेरिकी सैन्यकर्मी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।
अमेरिकी नौसेना की बड़ी कार्रवाई: 8 सितंबर के हमले का पूरा ब्योरा
अमेरिकी सेना की मध्य पूर्व कमान यानी CENTCOM ने आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की है कि 8 सितंबर 2026 को चलाए गए इस लक्षित हमले में ईरान के 5 विशाल कच्चे तेल ले जाने वाले जहाजों को पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया गया। अमेरिकी नौसैनिक बलों ने कार्रवाई को अंजाम देने से ठीक पहले अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए इन सभी जहाजों पर मौजूद क्रू मेंबर्स को तुरंत जहाज छोड़कर सुरक्षित बाहर निकलने की सख्त चेतावनी दी थी। क्रू के खाली होने के बाद अमेरिकी बलों ने सटीक हमला कर जहाजों के मुख्य संचालन तंत्र को नष्ट कर दिया, जिससे ये टैंकर अब समुद्र में तैरने या तेल परिवहन करने की स्थिति में नहीं रहे हैं।
निशाने पर आए 5 टैंकर और उनकी रणनीतिक लोकेशन
CENTCOM द्वारा दी गई तकनीकी और भौगोलिक जानकारी के मुताबिक निशाना बनाए गए 5 ईरानी तेल टैंकरों में से 4 जहाज ओमान की खाड़ी में तैनात थे, जबकि 5वां बेहद महत्वपूर्ण टैंकर ईरान के सबसे प्रमुख तेल निर्यात टर्मिनल खार्ग आईलैंड के समीप खड़ा था। ओमान की खाड़ी में जिन चार क्रूड कैरियर को बेकार किया गया, उनके नाम कवीज, चारमीनार, होराइजन 1 और रिएस्को हैं। वहीं, खार्ग आईलैंड के तटीय जलक्षेत्र में मौजूद 5वें टैंकर का नाम दरिया था। खार्ग आईलैंड ईरान के कुल कच्चे तेल निर्यात का एक बड़ा हिस्सा संचालित करता है, इसलिए वहां मौजूद टैंकर को निशाना बनाना ईरान के लिए एक बहुत बड़ा सामरिक और आर्थिक झटका माना जा रहा है।
ईरान के ‘शैडो ऑयल नेटवर्क’ पर बड़ा आर्थिक प्रहार
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने आरोप लगाया है कि निशाना बनाए गए ये सभी क्रूड ऑयल टैंकर ईरान के बहु-अरब डॉलर वाले अवैध ‘शैडो ऑयल नेटवर्क’ का हिस्सा थे। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को दरकिनार कर इस गुप्त नेटवर्क के जरिए अवैध रूप से कच्चे तेल की बिक्री करता है। इस तेल बिक्री से मिलने वाले अरबों डॉलर के राजस्व का इस्तेमाल IRGC की सैन्य गतिविधियों और पूरे मध्य पूर्व में फैले उसके सहयोगी सशस्त्र संगठनों को वित्तीय मदद देने में किया जाता है। अमेरिका का मानना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल सैन्य मिसाइल हमले का जवाब देना नहीं है, बल्कि ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले अवैध तेल व्यापार को आर्थिक रूप से पंगु बनाना भी है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी इस सैन्य कार्रवाई के बाद वॉशिंगटन के रुख को पूरी तरह साफ कर दिया है। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान अमेरिकी नौसैनिक युद्धपोतों को निशाना बनाने की धृष्टता करेगा, तो उसे अपने राष्ट्रीय तेल बेड़े के टैंकरों को गंवाकर इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिकी संपत्तियों पर होने वाले हर हमले का करारा जवाब सीधे ईरान के ऊर्जा और तेल ढांचे पर हमला करके दिया जाएगा।
5 सितंबर की घटना: 4 दिनों में 8 टैंकरों पर हमला
8 सितंबर को हुई इस बड़ी कार्रवाई की नींव 5 सितंबर 2026 को घटी घटना से जुड़ी है। CENTCOM ने जानकारी दी थी कि 5 सितंबर को IRGC ने अंतरराष्ट्रीय जलसीमा में गश्त कर रहे दो अमेरिकी युद्धपोतों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया था। इन अमेरिकी जहाजों में एक विमानवाहक पोत (एयरक्राफ्ट कैरियर) और एक गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक (डिसट्रॉयर) शामिल था। हालांकि, अमेरिकी रक्षा प्रणाली ने ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों के खतरे को हवा में ही भांप लिया और दोनों जहाजों ने सफलतापूर्वक हमलों को चकमा दे दिया, जिससे अमेरिकी नौसेना को कोई नुकसान नहीं हुआ।
इसके तुरंत बाद पलटवार करते हुए अमेरिकी बलों ने 5 सितंबर को भी ईरान के 3 प्रमुख क्रूड ऑयल टैंकरों को निशाना बनाकर तबाह कर दिया था। उस दिन निशाना बनाए गए जहाजों में खार्ग आईलैंड के पास खड़ा एम/टी डाउनी, ओमान की खाड़ी में मौजूद एम/टी काइलो (जिसे नॉक्सन भी कहा जाता है) और स्टार्क 1 शामिल थे। अमेरिकी सेना के अनुसार एम/टी डाउनी और स्टार्क 1 को स्थायी रूप से नष्ट कर दिया गया था, जबकि एम/टी काइलो के महत्वपूर्ण हिस्सों को निशाना बनाकर उसे पूरी तरह बेकार कर दिया गया था। इस प्रकार 5 सितंबर को 3 और 8 सितंबर को 5 टैंकरों को ध्वस्त कर अमेरिका ने महज 4 दिनों के भीतर ईरान के 8 विशाल तेल टैंकरों को समुद्र में बेकार कर दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर खतरा
इस पूरे सैन्य घटनाक्रम का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि ये तमाम हमले हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और उसके आसपास के समुद्री व्यापारिक मार्गों पर हो रहे हैं। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया भर में कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण और संकरा समुद्री मार्ग है, जहां से वैश्विक तेल व्यापार का एक-पांचवां हिस्सा गुजरता है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सीधे टकराव के कारण इस इलाके में किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि केवल दोनों देशों के युद्धपोतों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अचानक आसमान छू सकती हैं और आपूर्ति श्रृंखला ठप हो सकती है।
ईरान का जवाबी हमला: जॉर्डन में बेस पर मिसाइलें और नई चेतावनी
8 सितंबर को अपने 5 तेल टैंकर गंवाने के बाद ईरान ने भी तीखी जवाबी कार्रवाई की है। ईरानी सरकारी मीडिया और IRGC के आधिकारिक बयानों के अनुसार, ईरान ने जॉर्डन स्थित अल-अजरक सैन्य अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइलों से बड़ा हमला किया, जिसका उपयोग अमेरिकी सेना करती है। हालांकि जॉर्डन के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि उसकी उन्नत वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान द्वारा दागी गई 20 बैलिस्टिक मिसाइलों में से 18 मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। बची हुई 2 मिसाइलें निर्जन इलाकों में जा गिरीं, जिससे वहां किसी प्रकार के जान-माल का नुकसान नहीं हुआ।
इसके अलावा ईरान ने दावा किया है कि उसने खाड़ी में मौजूद अन्य अमेरिकी नौसैनिक जहाजों और व्यावसायिक संपत्तियों को भी निशाना बनाया है, हालांकि स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा इन ईरानी दावों की पूर्ण पुष्टि होना अभी बाकी है। ईरान ने अपनी आक्रामक रणनीति को आगे बढ़ाते हुए कुवैत और बहरीन के बंदरगाहों पर खड़े तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों को भी निशाना बनाने की खुली चेतावनी दे डाली है। ईरान की इस धमकी के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में व्यावसायिक समुद्री यातायात, तेल परिवहन कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लाइनों के बीच भारी दहशत और अनिश्चितता का माहौल बन गया है।



















