भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद और मशहूर अभिनेत्री हेमा मालिनी ने नीम करौली बाबा के पावन जीवन से प्रेरित फिल्म 'हनुमान अंश' को मिल रही अभूतपूर्व सफलता पर अपनी खुशी जाहिर की है। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित हनुमान जी और नीम करौली बाबा के मंदिर से अपनी अटूट आध्यात्मिक आस्था का उल्लेख करते हुए उन्होंने इस फिल्म की बड़ी कामयाबी को पूरी तरह से हनुमान जी की कृपा और आशीर्वाद करार दिया। हेमा मालिनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह खुद इस फिल्म को बड़े पर्दे पर देखने के लिए बेहद उत्सुक हैं और जल्द ही इसे देखने की योजना बना रही हैं।
युवा निर्माता का डेब्यू और आध्यात्मिक विषय वस्तु
फिल्म 'हनुमान अंश' का निर्माण केवल 21 वर्ष की युवा निर्माता अनुप्रिया नागर ने किया है। हेमा मालिनी ने निर्माता के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि अनुप्रिया एक बेहद साधारण और सीधी-सादी लड़की हैं, जिनका फिल्मी दुनिया से पहले कोई बड़ा जुड़ाव या गहरा अनुभव नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने अपनी निष्ठा और मेहनत से एक ऐसी सिनेमाई कृति का निर्माण किया, जिसे देश भर के दर्शक खूब पसंद कर रहे हैं और बेहतरीन रिस्पॉन्स दे रहे हैं।
बहुत ही छोटे और सीमित बजट में तैयार की गई इस फिल्म ने अपनी अनूठी आध्यात्मिक पृष्ठभूमि के कारण हर किसी का ध्यान आकर्षित किया है। यह पूरी फिल्म महान संत नीम करौली बाबा के जीवन दर्शन और उनकी शिक्षाओं से प्रेरित है। इस फिल्म की पटकथा का लेखन और निर्देशन विशाल चतुर्वेदी ने संभाला है।
मुख्यमंत्रियों का समर्थन और उत्तराखंड में टैक्स फ्री की घोषणा
फिल्म 'हनुमान अंश' की सफलता की गूंज केवल हिंदी सिनेमा जगत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में भी इसकी व्यापक चर्चा हो रही है। हाल ही में फिल्म की निर्माण टीम ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। इस विशेष भेंट के दौरान मुख्यमंत्री को फिल्म के कुछ महत्वपूर्ण अंश दिखाए गए, जिनमें नीम करौली बाबा की आध्यात्मिक यात्रा के साथ-साथ नाथ संप्रदाय से जुड़े ऐतिहासिक और धार्मिक प्रसंगों का चित्रण किया गया है।
दूसरी तरफ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी यह फिल्म देख चुके हैं। फिल्म देखने के बाद उन्होंने इसकी सराहना की और इसे राज्य भर में पूरी तरह से टैक्स फ्री घोषित करने का ऐलान किया। पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस फिल्म के जरिए आम लोगों को नीम करौली बाबा के संपूर्ण जीवन, उनके आध्यात्मिक संदेशों और उनकी यात्रा को गहराई से समझने का एक बेहतरीन अवसर प्राप्त होगा।
फिल्म को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और बहस
जैसे-जैसे फिल्म 'हनुमान अंश' को दर्शकों का समर्थन मिल रहा है, वैसे-वैसे इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने फिल्म को लेकर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि सिनेमा के जरिए धार्मिक भावनाओं को प्रभावित किया जा रहा है और धर्म की राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है। उनका तर्क था कि इस तरह की फिल्मों का उपयोग जनता की आस्था को राजनीतिक रूप से मोड़ने के लिए किया जा रहा है।
इसके जवाब में भाजपा नेता राम कदम ने कांग्रेस नेता के आरोपों का खंडन करते हुए फिल्म का मजबूती से बचाव किया। राम कदम ने कहा कि किसी भी सिनेमाई रचना पर सवाल उठाने या आलोचना करने से पहले उसके कंटेंट और मूल भावना को समझना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर विषय को बेवजह विवाद का रूप देना सही नहीं है।
फिल्म की कहानी: स्वतंत्रता संग्राम से बाबा के बचपन का सफर
फिल्म 'हनुमान अंश' की कथावस्तु नीम करौली बाबा के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रेरणादायक पहलुओं को पर्दे पर उतारती है। फिल्म का कथानक भोसले नाम के एक बुजुर्ग किरदार से शुरू होता है, जो अपने पोते को नीम करौली बाबा के चमत्कारों और उनकी महिमा की गाथाएं सुनाता है। इसके बाद कहानी का ताना-बाना भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौर में ले जाता है।
कहानी में दिखाया गया है कि देश की आजादी से पहले के दौर में भोसले एक स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी के रूप में संघर्ष कर रहे थे। उस कठिन समय में संकट के क्षणों में नीम करौली बाबा किस तरह उनकी रक्षा करते हैं, इसे बेहद मार्मिक रूप से दर्शाया गया है। इसके बाद कई महत्वपूर्ण घटनाओं से गुजरते हुए कहानी बालक लक्ष्मी नारायण के बचपन तक पहुंचती है। यही लक्ष्मी नारायण आगे चलकर जन-जन के प्रिय संत नीम करौली बाबा के नाम से विख्यात हुए।



















