कनाडा और अमेरिका के मध्य जारी आर्थिक खींचतान अब एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुँच गई है। ओटावा और वॉशिंगटन के बीच प्रस्तावित व्यापारिक वार्ता किसी भी ठोस नतीजे पर पहुँचने में विफल रही, जिसके बाद कनाडा सरकार ने अमेरिका के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। अमेरिका द्वारा लगातार बढ़ाए जा रहे आर्थिक दबाव का जवाब देते हुए कनाडा ने मंगलवार, 8 सितंबर को रात 12:01 बजे से 600 से अधिक अमेरिकी सामानों पर 50 प्रतिशत तक का भारी जवाबी शुल्क लागू कर दिया है। इस कड़े फैसले से उत्तरी अमेरिका की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक बड़े ट्रेड वॉर की शुरुआत हो चुकी है।
ओटावा और वॉशिंगटन की वार्ता विफल, 629 उत्पाद श्रेणियों पर लगा कड़ा टैरिफ
कनाडा सरकार द्वारा जारी नए टैरिफ आदेश के तहत कुल 629 अलग-अलग प्रकार के अमेरिकी सामानों को निशाना बनाया गया है। इन शुल्कों का दायरा बेहद विस्तृत है, जिसमें न्यूनतम 15 प्रतिशत से लेकर अधिकतम 50 प्रतिशत तक की अलग-अलग दरें तय की गई हैं। कनाडाई सीमा शुल्क विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिन 629 उत्पाद श्रेणियों पर यह जवाबी टैरिफ लगाया गया है, उनका अमेरिका से कनाडा में सालाना आयात लगभग 27.6 अरब कनाडाई डॉलर (तकरीबन 20 अरब अमेरिकी डॉलर) के बराबर है। इसके दायरे में निर्माण क्षेत्र से जुड़ा स्टील, घर और दफ्तरों का फर्नीचर, तैयार कपड़े तथा कई तरह की कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सामग्री शामिल हैं।
इस अंतिम सूची को तैयार करने से पहले कनाडा के अधिकारियों ने काफी सावधानीपूर्वक आकलन किया था। शुरुआत में कनाडा सरकार ने 874 विभिन्न अमेरिकी सामग्रियों पर शुल्क थोपने का प्रस्ताव रखा था। हालाँकि, घरेलू बाजार की जरूरतों और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला का ध्यान रखते हुए बाद में मछली एवं अन्य समुद्री खाद्य पदार्थों की 254 श्रेणियों को इस सूची से बाहर कर दिया गया। इसके साथ ही व्यापार विशेषज्ञों के परामर्श पर 9 नई उत्पाद श्रेणियों को सूची में जोड़ा गया, जिससे अंतिम रूप से प्रभावित वस्तुओं की संख्या 629 हो गई।
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की दोटूक अपील: अमेरिका पर निर्भरता कम करे देश
नए व्यापारिक प्रतिबंध प्रभावी होने के तुरंत बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने देश के नाम एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी सरकार के रुख को स्पष्ट किया। प्रधानमंत्री कार्नी ने देश के सभी प्रमुख कारोबारियों, उद्योगपतियों और आम नागरिकों से खुलकर अपील की कि वे अब अमेरिका पर अपनी आर्थिक निर्भरता को चरणबद्ध तरीके से कम करने की दिशा में काम करें। उल्लेखनीय है कि अमेरिका ऐतिहासिक रूप से कनाडा का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में व्यापारिक प्राथमिकताओं को बदलना अनिवार्य हो गया है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने स्पष्ट स्वीकार किया कि इतने बड़े पैमाने पर व्यापारिक रास्तों और आदतों में बदलाव लाने की एक निश्चित आर्थिक कीमत चुकानी पड़ेगी। लेकिन उन्होंने दृढ़ता के साथ कहा, ‘हमारे पास अपनी दिशा बदलने और निडर होकर आगे बढ़ने के लिए जरूरी सब कुछ मौजूद है। इस व्यापारिक बदलाव की एक कीमत जरूर होगी, क्योंकि किसी भी बड़े कदम को उठाने का एक लागत मूल्य होता है। परंतु यह कीमत हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने और नुकसान सहते रहने के मुकाबले कुछ भी नहीं है।’
कनाडा के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इन जवाबी शुल्कों को रणनीतिक रूप से इस तरह डिजाइन किया गया है ताकि वॉशिंगटन पर अधिकतम आर्थिक और राजनीतिक दबाव बनाया जा सके। कनाडाई अधिकारियों का मानना है कि इन टैरिफ का सीधा और व्यापक प्रभाव अमेरिका के मिशिगन और ओहियो जैसे प्रमुख औद्योगिक राज्यों के कारखानों तथा विनिर्माण इकाइयों पर पड़ेगा, जिससे अमेरिकी प्रशासन को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
अमेरिकी कार्रवाई का जवाब और USMCA समझौते के भविष्य पर संकट
कनाडा द्वारा उठाया गया यह सख्त कदम दरअसल अमेरिका की उस पिछली कार्रवाई का सीधा जवाब है, जिसके तहत पिछले महीने अमेरिकी प्रशासन ने कनाडा के लगभग 20 अरब डॉलर मूल्य के सामानों पर भारी टैरिफ थोप दिए थे। उस समय अमेरिकी शुल्कों की मार कनाडा की वाइन, फर्नीचर उद्योग, डेयरी उत्पादों, सीमेंट उद्योग, परिधानों, फिशिंग रॉड और हॉकी उपकरणों जैसे लोकप्रिय उत्पादों पर पड़ी थी। दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ रहे इस द्विपक्षीय व्यापारिक तनाव ने अब अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा समझौते (USMCA) के भविष्य पर भी अनिश्चितता के बादल मंडरा दिए हैं, जिसने दशकों से इन तीनों देशों के मुक्त व्यापार को संरक्षण प्रदान किया था।
आधिकारिक व्यापार आंकड़ों के अनुसार, कनाडा अपनी अर्थव्यवस्था से होने वाले कुल निर्यात का लगभग 68 प्रतिशत हिस्सा सीधे अमेरिकी बाजारों को भेजता है। चालू वर्ष के दौरान USMCA समझौते के तहत मिली विशेष छूटों और प्रावधानों की बदौलत कनाडा के लगभग 80 प्रतिशत निर्यात पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लग रहा था। लेकिन ताजा विवाद के बाद इस समझौते का स्थायित्व दांव पर लग गया है।
डोनाल्ड ट्रंप का आक्रामक रुख और ऑटो सेक्टर पर नई पेनल्टी की चेतावनी
कनाडा की ओर से नए टैरिफ लागू किए जाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया मंचों पर ओटावा प्रशासन के खिलाफ हमला तेज कर दिया है। मंगलवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि कनाडा की प्रमुख विमान निर्माता कंपनी बॉम्बार्डियर तब तक अमेरिकी बाजार में अपने विमान नहीं बेच सकेगी, जब तक वह अमेरिका की सीमा के भीतर उनका निर्माण कार्य शुरू नहीं करती। हालाँकि, राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई औपचारिक या कानूनी आदेश जारी नहीं किया गया है।
इसके अतिरिक्त, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कनाडा पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से एक और बड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि यदि व्यापारिक विवाद का समाधान नहीं निकला, तो 1 जनवरी से कनाडा से आने वाली कारों, ट्रकों और ऑटोमोटिव स्पेयर पार्ट्स पर अमेरिकी टैरिफ को बढ़ाकर सीधे 50 प्रतिशत तक कर दिया जाएगा। इस घोषणा से दोनों देशों के ऑटोमोबाइल सेक्टर में भारी खलबली मच गई है।



















