पश्चिम एशिया में सैन्य संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाकर ईरान द्वारा किए गए बैलिस्टिक मिसाइल हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया है कि मध्य पूर्व क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों या सैन्य संपत्तियों पर आगे कोई भी हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यदि ईरान अपनी आक्रामक कार्रवाइयों से पीछे नहीं हटता है, तो अमेरिका उसे करारा सबक सिखाने और निर्णायक सैन्य कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
जॉर्डन सैन्य ठिकाने पर हमला और अमेरिकी राष्ट्रपति की सख्त चेतावनी
जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान की तरफ से बैलिस्टिक मिसाइल दागी गई, जिसके बाद पूरे इलाके में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया। एक फोन इंटरव्यू में फॉक्स न्यूज़ से बातचीत करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मिसाइल स्ट्राइक को अचानक हुआ हमला करार दिया। उन्होंने कहा कि रात के अंधेरे में किए गए इस हमले के कारण वहां मौजूद अमेरिकी सैनिकों के पास आ रही मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने या रोकने के लिए बेहद कम समय बचा था। ट्रंप ने कड़े शब्दों में कहा कि अमेरिका अपनी संपत्तियों पर हुए इस हमले का अत्यंत जोरदार और मुंहतोड़ जवाब देगा। उन्होंने तेहरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका ईरान को बुरी तरह से कुचल देगा और उसे एक बड़ी और करारी हार का सामना करना पड़ेगा।
इराक में संयुक्त कार्रवाई, ईरानी सलाहकारों की मौत और कूटनीति पर रुख
जॉर्डन बेस पर हुए इस हमले से पहले इराक के भीतर अमेरिका और सऊदी अरब द्वारा एक बड़ा सैन्य ऑपरेशन चलाया गया था। इराकी मिलिशिया के 2 अधिकारियों ने जानकारी दी कि इस संयुक्त कार्रवाई में ईरान के 6 सैन्य सलाहकारों की मौत हो गई। इस घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि पिछले सप्ताह कूटनीतिक बातचीत के लिए रास्ते खुले रखने के उद्देश्य से अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों को रोक दिया गया था। सैन्य कार्रवाई पर लगे उस विराम के बाद जॉर्डन के अमेरिकी बेस पर ईरान का यह पहला सीधा मिसाइल हमला माना जा रहा है। कड़ा सैन्य रुख अपनाने के साथ ही राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका इस समूचे विवाद का कूटनीतिक समाधान ढूंढने के प्रयास जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ अच्छी बातचीत चल रही थी, लेकिन अमेरिका अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा और नए हमलों की स्थिति में भारी तबाही मचाने वाला जवाब देगा।



















