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दिल्ली में जर्जर और अवैध निर्माण का कहर, इस साल 5 हादसों में 16 लोगों की मौतदिल्ली
9 सित॰ 2026, 6:22 pm (1 घंटे पहले)· 4

दिल्ली में जर्जर और अवैध निर्माण का कहर, इस साल 5 हादसों में 16 लोगों की मौत

राजधानी दिल्ली में चालू वर्ष के दौरान अवैध निर्माण और जर्जर इमारतों के ढहने की 5 अलग-अलग घटनाओं में कुल 16 लोगों की दर्दनाक मौत हुई है, जबकि दर्जनों घायल हुए हैं।

राजधानी दिल्ली में जर्जर ढाँचों और अवैध निर्माण के कारण जानलेवा हादसों का सिलसिला थम नहीं रहा है। दक्षिणी दिल्ली के घनी आबादी वाले सत्य निकेतन क्षेत्र में 6 सितंबर को एक पांच मंजिला पीजी इमारत ढहने से 7 लोगों की मौत हो गई। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के निकट हुई इस दुखद घटना के साथ ही चालू वर्ष के दौरान दिल्ली में इमारतें गिरने से जान गँवाने वाले लोगों की कुल संख्या बढ़कर 16 हो गई है। सरकारी आँकड़ों और पुलिस जानकारी के अनुसार, ये सभी मौतें तीन प्रमुख हादसों में हुई हैं।

साकेत से रोहिणी तक हादसों की श्रृंखला

चालू वर्ष में दिल्ली के विभिन्न इलाकों में इमारतें गिरने से भारी तबाही देखने को मिली है। मई माह के दौरान साकेत क्षेत्र में हुए हादसे में 6 लोगों की मौत हुई थी। इसके पश्चात जुलाई महीने में रोहिणी में एक निर्माणाधीन इमारत गिरने से 3 लोगों ने अपनी जान गँवाई। वहीं सितंबर की शुरुआत में सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक हादसे ने 7 और जिंदगियाँ छीन लीं। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इन सभी हादसों के पीछे सुरक्षा मानकों की अनदेखी और नियमों का उल्लंघन ही मुख्य वजह रही है।

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साकेत हादसे में प्रशासनिक लापरवाही और सीलिंग विफलता

दक्षिणी दिल्ली के साकेत इलाके में 30 मई को एक बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई थी। इस इमारत में कोचिंग सेंटर, दफ्तर और कैफे संचालित हो रहे थे, जिसके चलते मारे गए 6 लोगों में से अधिकतर प्रतियोगी छात्र थे। घटना के बाद दिल्ली सरकार द्वारा कराई गई मजिस्ट्रेट जाँच में दिल्ली नगर निगम (MCD) की गंभीर लापरवाही उजागर हुई। जाँच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि इमारत की तीसरी और चौथी मंजिल का निर्माण पूरी तरह अवैध रूप से किया गया था।

स्थानीय नागरिकों द्वारा अवैध निर्माण की शिकायत दो महीने पहले ही दर्ज कराई गई थी, परंतु संबंधित निकाय ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। हादसे के बाद अपना बचाव करने के लिए अधिकारियों ने कागजों में हेरफेर कर फर्जी रिकॉर्ड तैयार करने का प्रयास भी किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम ने अपने 2 इंजीनियरों को तुरंत निलंबित कर दिया, जबकि पुलिस ने इमारत के मालिक तथा 2 ठेकेदारों को गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई शुरू की।

रोहिणी में निर्माणाधीन इमारत ढहने से 3 मौतें

मानसून के दौरान 8 जुलाई को रोहिणी के सेक्टर-16 इलाके में तेज बारिश के बीच एक निर्माणाधीन चार मंजिला इमारत अचानक गिर गई। इस हादसे में 3 लोगों की जान चली गई और कई अन्य मजदूर मलबे के नीचे दब गए। इस मामले पर सफाई देते हुए नगर निगम ने बताया कि उक्त इमारत का नक्शा सरल योजना के तहत स्वीकृत किया गया था। इस योजना के अंतर्गत संपत्ति मालिक किसी पंजीकृत आर्किटेक्ट या इंजीनियर के सत्यापन पत्र के आधार पर स्वतः निर्माण अनुमति प्राप्त कर सकते हैं।

मुकुंदपुर और करावल नगर में ढाँचे ढहे

जानलेवा हादसों के अलावा शहर में दो अन्य स्थानों पर भी इमारतें ढहने की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें संपत्ति को भारी नुकसान पहुँचा। उत्तर दिल्ली के मुकुंदपुर क्षेत्र में 2 जून को एक गैर-कानूनी बर्तन रंगने की इकाई में एलपीजी सिलेंडर फटने के बाद पूरी इमारत गिर गई, जिससे 11 कामगार गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके ठीक अगले दिन 3 जून को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के करावल नगर में नाले के सुंदरीकरण और मरम्मत कार्य के दौरान एक चार मंजिला मकान में गहरी दरारें आ गईं और वह ढह गया। गनीमत यह रही कि हादसा होने से ठीक पहले स्थानीय निवासियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

सवाल-जवाब

इस साल दिल्ली में इमारत गिरने से कुल कितनी मौतें हुई हैं?
दिल्ली में इस साल इमारत ढहने की 5 घटनाओं में से 3 जानलेवा हादसों में कुल 16 लोगों की मौत दर्ज की गई है।
6 सितंबर को सत्य निकेतन में क्या हादसा हुआ?
सत्य निकेतन में दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास एक 5 मंजिला पीजी इमारत ढह गई, जिसमें 7 लोगों की मौत हो गई।
साकेत इमारत हादसे में जांच के दौरान क्या प्रशासनिक खामियां पाई गईं?
साकेत की इमारत में तीसरी और चौथी मंजिल अवैध थी। शिकायतों के बावजूद MCD ने कार्रवाई नहीं की और हादसे के बाद फर्जी रिकॉर्ड बनाए, जिससे 2 इंजीनियर निलंबित और 3 लोग गिरफ्तार हुए।
रोहिणी में इमारत ढहने की क्या वजह थी?
रोहिणी सेक्टर-16 में भारी बारिश के दौरान 8 जुलाई को एक निर्माणाधीन 4 मंजिला इमारत ढह गई थी, जिसमें 3 लोगों की जान चली गई।
क्या बिना किसी हताहत के भी इमारत ढहने की घटनाएं हुईं?
हाँ, मुकुंदपुर में सिलेंडर ब्लास्ट से फैक्ट्री ढहने पर 11 मजदूर घायल हुए थे, जबकि करावल नगर में नाला मरम्मत के दौरान दरारें आने पर 4 मंजिला इमारत गिरी थी, जहां समय रहते निकासी कर ली गई थी।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·49 मिनट पहले

राजधानी में जर्जर ढाँचों और अवैध निर्माण से होने वाली ये मौतें शहरी शासन और स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। साकेत और सत्य निकेतन जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में शिकायतों के बावजूद प्रशासनिक उदासीनता और कागजी हेरफेर यह साबित करती है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों और भ्रष्ट तंत्र के बीच गहरी सांठगांठ है। यदि समय रहते सुरक्षा मानकों की कड़ाई से जाँच नहीं की गई और अवैध निर्माण पर बुलडोजर नहीं चला, तो आने वाले दिनों में यह संकट और अधिक भीषण रूप ले सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·48 मिनट पहले

रोहन मल्होत्रा का यह विश्लेषण बिल्कुल सटीक है। जब तक नगर निगम और स्थानीय निकायों में बैठे भ्रष्ट इंजीनियरों और अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक धाराओं में मुकदमे दर्ज कर बर्खास्तगी की कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी प्रशासनिक लापरवाही रुकने वाली नहीं है। पुलिस जाँच और मजिस्ट्रेट रिपोर्ट के बाद भी यदि दोषियों को केवल निलंबन जैसी मामूली सजा देकर छोड़ दिया गया, तो यह स्पष्ट है कि सिस्टम कागजी खानापूर्ति कर रहा है। भविष्य में ऐसे जानलेवा हादसों को रोकने के लिए केवल नोटिस थमाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि अवैध निर्माण करने वालों और उन्हें संरक्षण देने वाले तंत्र पर कठोर कानूनी प्रहार करना ही एकमात्र उपाय है।

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