अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में आगामी सीनेट चुनावों को लेकर माहौल गरमाता जा रहा है और इसी बीच एक तीखा विवाद सामने आया है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और मिशिगन से डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेट उम्मीदवार अब्दुल अल-सईद के बीच जुबानी जंग तब और भड़क गई जब पारिवारिक पृष्ठभूमि को राजनीतिक मंच पर घसीट लिया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने चुनावी सरगर्मी को काफी बढ़ा दिया है, जहां दोनों नेता एक-दूसरे पर हमलावर रुख अपनाए हुए हैं।
मिशिगन रैली में जेडी वेंस का तीखा हमला
मिशिगन राज्य में रिपब्लिकन पार्टी के सीनेट उम्मीदवार माइक रोजर्स के पक्ष में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए जेडी वेंस ने अपने प्रतिद्वंद्वी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने मंच से बेहद कड़े शब्दों में आपत्ति जताई कि उनके पारिवारिक जीवन और निजी रिश्तों को राजनीतिक बयानों का हिस्सा बनाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट लहजे में चेतावनी दी कि उनकी पत्नी उषा वेंस का जिक्र सार्वजनिक बहसों में कतई न किया जाए।
सोशल मीडिया पर छिड़ी थी जुबानी जंग
इस पूरे विवाद की जड़ें कुछ दिन पुरानी हैं जब ओहायो में आयोजित एक अन्य रैली के दौरान जेडी वेंस ने अब्दुल अल-सईद के अतीत में शरिया कानून को लेकर दिए गए बयानों का जिक्र किया था। उस दौरान उन्होंने अपने दादा को याद करते हुए विरोधी उम्मीदवार की नीतियों की आलोचना की थी। इसके जवाब में अब्दुल अल-सईद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए तंज कसा था कि क्या जेडी वेंस अपनी पत्नी उषा को भी समय यात्रा कराकर अपने दादा से मिलवाएंगे। इसी टिप्पणी के बाद से दोनों के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया।
धार्मिक पृष्ठभूमि और नीतिगत मतभेद
उषा वेंस एक भारतीय प्रवासी परिवार से ताल्लुक रखती हैं और उनका पालन-पोषण एक हिंदू घराने में हुआ है, जिसके चलते अमेरिकी राजनीतिक हलकों में उनकी पहचान पर अक्सर चर्चा होती रहती है। जेडी वेंस ने अब्दुल अल-सईद पर आरोप लगाया कि वह लोगों के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया रखते हैं और उनका यह तरीका पूरी तरह गलत है। दूसरी ओर, अब्दुल अल-सईद ने भी पलटवार करते हुए नीतिगत मुद्दों पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि आम जनता से स्वास्थ्य सेवाएं छीनकर अरबपतियों को करों में छूट देना ही असली समस्या है।
चुनावी समीकरण और आने वाला समय
मिशिगन की सीनेट सीट के लिए हो रहा यह मुकाबला बेहद कड़ा माना जा रहा है और दोनों पक्षों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। जनमत सर्वेक्षणों के आंकड़े भी इस बात की गवाही देते हैं कि चुनावी मैदान में हार-जीत का अंतर बेहद कम रह सकता है। ऐसे में उषा वेंस के नाम से शुरू हुआ यह नया विवाद आने वाले दिनों में इस चुनावी मुकाबले को और अधिक आक्रामक बना सकता है।



















