अमेरिका के कम से कम सात राज्यों में पानी की सप्लाई और वेस्टवॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाकर किए गए बड़े साइबर हमलों के बाद हड़कंप मच गया है। इस अचानक हुए साइबर हमले के कारण वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट्स के ऑटोमैटिक मैनेजमेंट सिस्टम को बंद करना पड़ा और अधिकारियों को पानी की बर्बादी व जहरीले तत्वों के खतरे से बचने के लिए हाथों से यानी मैनुअल मोड में सिस्टम संभालना पड़ा। एक तरफ जहां सुरक्षा विशेषज्ञ इस हमले को विदेशी साइबर समूहों से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की भूमिका से इनकार करते हुए इस विफलता का पूरा ठीकरा स्थानीय राज्य प्रशासन पर फोड़ दिया है।
मिनेसोटा से शुरू हुई साइबर घुसपैठ की जांच
साइबर हमले की इस श्रृंखला का पहला मामला 26 और 27 जुलाई के दौरान सामने आया, जब मिनेसोटा राज्य के 30 से अधिक कम्युनिटी वॉटर सिस्टम्स में संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों का पता चला। मिनेसोटा आईटी सर्विसेज के सुरक्षा विशेषज्ञों ने तुरंत जांच शुरू की और पाया कि अज्ञात हैकर्स ने पानी की सप्लाई को नियंत्रित करने वाले संवेदनशील डिजिटल नेटवर्क का अनधिकृत एक्सेस हासिल कर लिया था। इसके बाद महज एक हफ्ते के भीतर यह हमला देश के सात अलग-अलग राज्यों के वॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर तक फैल गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अमेरिका की शीर्ष जांच और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत हरकत में आईं। फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI), साइबर सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षा एजेंसी (CISA), और पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) ने संयुक्त रूप से जांच अभियान शुरू किया। केंद्रीय टीमें प्रभावित प्लांट्स के सिस्टम लॉग्स की जांच कर रही हैं ताकि घुसपैठ के पूरे दायरे को समझा जा सके और अन्य क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित किया जा सके।
औद्योगिक कंट्रोलर्स (PLCs) को बनाया गया निशाना
तकनीकी जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि हैकर्स ने वॉटर प्लांट्स में लगे 'प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर्स' (PLCs) को मुख्य रूप से अपना शिकार बनाया। यह डिजिटल उपकरण पानी के दबाव, पंपिंग सिस्टम और पानी में मिलाए जाने वाले रसायनों की सही मात्रा को ऑटोमैटिक तरीके से नियंत्रित करते हैं। यदि इन PLCs का एक्सेस किसी बाहरी हैकर के हाथ में चला जाए, तो वह पूरे शहर की जलापूर्ति को पूरी तरह ठप कर सकता है या फिर पानी में रसायनों का संतुलन बिगाड़कर उसे दूषित बना सकता है।
आधिकारिक जांच मेमो के अनुसार, हैकर्स का प्राथमिक मकसद पानी के प्रेशर को गिराना और सप्लाई में दूषित पदार्थ मिलाना था। हालांकि, इस हमले को अंजाम देने के लिए हैकर्स ने किसी अत्यधिक जटिल या नई तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया। इसके बजाय, उन्होंने इंटरनेट से सीधे जुड़े उन कमजोर सिस्टम्स को निशाना बनाया जिनके सुरक्षा पासवर्ड बेहद साधारण और कमजोर थे।
मिनेसोटा के चीफ इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी ऑफिसर जॉन इजराइल ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि हैकर्स देश भर के इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क को खंगाल रहे हैं और जहां भी सुरक्षा में ढील मिल रही है, वहां घुसपैठ की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, मिनेसोटा आईटी सर्विसेज की प्रवक्ता एमिली जिमर ने बताया कि इस हमले का तरीका ठीक वैसा ही है जैसा पहले भी महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए हमलों में देखा गया है। अगर प्लांट्स के कर्मचारियों ने तत्परता दिखाते हुए समय पर मैनुअल कंट्रोल अपने हाथ में न लिया होता, तो कई अमेरिकी शहरों में पीने के पानी का संकट खड़ा हो जाता।
डोनाल्ड ट्रंप के बयान से भड़का राजनीतिक विवाद
सुरक्षा एजेंसियों की शुरुआती समीक्षा में इस हमले का पैटर्न ईरान के साइबर समूहों की कार्यप्रणाली से मेल खाता हुआ पाया गया था। इसके बावजूद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख इस मामले में पूरी तरह अलग नजर आया। एक कैबिनेट बैठक के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से ईरान का बचाव करते हुए सारा दोष मिनेसोटा के स्थानीय प्रशासन और वहां के गवर्नर टिम वॉल्ज़ पर मढ़ दिया।
ट्रंप ने बैठक में कहा कि मिनेसोटा के 30 वॉटर प्लांट्स पर हुए हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। उन्होंने इसके लिए राज्य के कमजोर प्रशासन को जिम्मेदार बताया और तर्क दिया कि ईरान के पास मिनेसोटा जैसे राज्यों के वॉटर प्लांट्स पर हमला करने से ज्यादा बड़े मुद्दे मौजूद हैं। राष्ट्रपति के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में बहस छेड़ दी है, क्योंकि एक्सपर्ट्स इसे राष्ट्रीय सुरक्षा की सच्चाई को नजरअंदाज करने के रूप में देख रहे हैं।
गवर्नर टिम वॉल्ज़ का पलटवार और सुरक्षा उपाय
राष्ट्रपति के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मिनेसोटा के गवर्नर टिम वॉल्ज़ ने कहा कि ट्रंप को अच्छी तरह पता है कि इस हमले के पीछे कौन से विदेशी तत्व शामिल हैं, लेकिन वे सच्चाई को स्वीकार करने से भाग रहे हैं। गवर्नर वॉल्ज़ ने कहा कि जब केंद्रीय नेतृत्व बयानबाजी कर रहा था, तब राज्य के तकनीशियन और सुरक्षा दल नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में लगे हुए थे।
फिलहाल प्रभावित राज्यों में वॉटर फैसिलिटीज की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। FBI और CISA ने देश भर के सभी जल निकायों और क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर ऑपरेटर्स को निर्देश दिए हैं कि वे इंटरनेट से जुड़े सभी औद्योगिक उपकरणों का पासवर्ड मजबूत रखें, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन लागू करें और किसी भी आपात स्थिति के लिए मैनुअल बैकअप प्रणालियों को हमेशा तैयार रखें।



















