भारतीय आवासीय रियल एस्टेट बाजार की चाल को लेकर कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की ओर से एक विस्तृत रिसर्च रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें देश के प्रमुख शहरी बाजारों में घरों के दाम बढ़ने की बात कही गई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान आवासीय संपत्तियों की औसत कीमतों में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले छह फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि यदि इस साल की शुरुआत यानी जनवरी से मार्च की तिमाही के आंकड़ों से तुलना की जाए, तो कीमतों में मामूली सुस्ती या गिरावट देखने को मिली है। इस पूरे दौर में नई दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, चेन्नई, ग्रेटर नोएडा और बेंगलुरु जैसे महानगर रियल एस्टेट कारोबार में सबसे आगे नजर आए हैं।
गुरुग्राम और बेंगलुरु के प्रोजेक्ट्स का प्रदर्शन
कोटक की इस रिपोर्ट के विश्लेषण से यह बात सामने आती है कि बेंगलुरु और गुरुग्राम के कई चुनिंदा आवासीय प्रोजेक्ट्स में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट यानी सीएजीआर में बेहतरीन उछाल आया है। इन प्रमुख माइक्रो-मार्केट्स में बेहतर प्रदर्शन के दम पर कुल रियलाइजेशन यानी संपत्ति से होने वाली प्राप्ति के आंकड़े में भी इजाफा दर्ज किया गया है। जानकारों का मानना है कि इन इलाकों में निवेशकों और घर खरीदारों की ओर से लगातार मिल रहे समर्थन के कारण रियल एस्टेट की सेहत मजबूत बनी हुई है, हालांकि नए लॉन्च की रफ्तार पर कुछ असर जरूर पड़ा है।
बिक्री वॉल्यूम की तुलना में कीमतों की रफ्तार तेज
प्रमुख बाजारों में औसत प्रॉपर्टी रियलाइजेशन वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही में बढ़कर नौ हजार छह सौ उनतीस रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गया है, जो कि सालाना आधार पर छह फीसदी अधिक है। हालांकि पिछली तिमाही के आंकड़ों से अगर तुलना की जाए तो इसमें दो फीसदी की गिरावट आई है। संपत्तियों के मूल्य में आई इस तेजी ने अपेक्षाकृत कमजोर बिक्री वॉल्यूम के नकारात्मक असर को काफी हद तक संभाल लिया। यही वजह है कि कीमतों में बढ़ोतरी के चलते कुल बिक्री के वित्तीय मूल्य में सालाना आधार पर नौ फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है, भले ही इकाइयां बिकने की संख्या सीमित रही हो।
सीमित दायरे में सिमटा रहा बिक्री का कुल वॉल्यूम
समीक्षाधीन अवधि यानी वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही के दौरान पूरे देश में घरों की कुल बिक्री चौवालीस मिलियन वर्ग फुट दर्ज की गई, जो कि साल-दर-साल तीन फीसदी तो बढ़ी, लेकिन पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें तीन फीसदी की गिरावट आ गई। इसके साथ ही नए प्रोजेक्ट्स के बाजार में आने की रफ्तार में तेज कमी आई और यह आंकड़ा बयालीस मिलियन वर्ग फुट पर सिमट गया, जो कि सालाना आधार पर चौदह फीसदी और तिमाही आधार पर सोलह फीसदी कम है। रिपोर्ट के अनुसार बीते दो वर्षों से रियल एस्टेट सेक्टर की कुल वृद्धि मुख्य रूप से प्रॉपर्टी की कीमतों में आए उछाल पर टिकी हुई है। ऐसे में बाजार जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में वास्तविक मांग की मजबूती परखने के लिए बिक्री के वॉल्यूम में निरंतर सुधार होना बेहद जरूरी होगा।
एनसीआर क्षेत्र में बिक्री वॉल्यूम में आई सबसे बड़ी गिरावट
देश के अलग-अलग हिस्सों के आंकड़ों पर नजर डालें तो एनसीआर यानी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र बिक्री वॉल्यूम के मोर्चे पर सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले बाजारों में शुमार रहा है। इस क्षेत्र में आवासीय संपत्तियों की बिक्री सालाना आधार पर सत्ताईस फीसदी और तिमाही आधार पर आठ फीसदी लुढ़ककर तेईस दशमलव पांच मिलियन वर्ग फुट पर आ गई, जबकि नई लॉन्चिंग का आंकड़ा इक्कीस दशमलव दो मिलियन वर्ग फुट दर्ज किया गया। इसके मुकाबले महानगर मुंबई यानी एमएमआर में इकतालीस दशमलव पांच मिलियन वर्ग फुट की भारी-भरकम बिक्री दर्ज की गई, जिसे अड़तीस दशमलव आठ मिलियन वर्ग फुट की नई लॉन्चिंग का पूरा समर्थन मिला। इसी तरह बेंगलुरु में तीस दशमलव सात मिलियन वर्ग फुट और हैदराबाद में चौंतीस दशमलव तीन मिलियन वर्ग फुट की बिक्री दर्ज की गई, जहां अकेले हैदराबाद में पचपन दशमलव पांच मिलियन वर्ग फुट के नए प्रोजेक्ट उतारे गए।
अनसोल्ड इन्वेंट्री और बाजार का दायरा
बेंगलुरु, हैदराबाद और एनसीआर जैसे प्रमुख केंद्रों में बिना बिकी इन्वेंट्री यानी अनसोल्ड स्टॉक में तिमाही आधार पर थोड़ी बढ़ोतरी देखी गई है, जिसके पीछे नए प्रोजेक्ट्स की लगातार होती लॉन्चिंग भी एक प्रमुख वजह है। पूरे भारत के स्तर पर जून 2026 तक अनसोल्ड रेजिडेंशियल स्टॉक शून्य दशमलव आठ बिलियन वर्ग फुट के स्तर पर बना रहा, जो कि पिछले बारह महीनों की कुल बिक्री के हिसाब से लगभग एक दशमलव नौ साल की इन्वेंट्री के बराबर बैठता है। रिपोर्ट इस बात पर भी प्रकाश डालती है कि रेजिडेंशियल रियल एस्टेट का कुल बिक्री वॉल्यूम पिछले तीन वर्षों से एक सीमित दायरे में ही घूम रहा है। हालांकि देश के बड़े डेवलपर्स नए शहरों और अनछुए इलाकों में अपने कारोबार का विस्तार करके लगातार अपनी बाजार हिस्सेदारी मजबूत कर रहे हैं।
इंडस्ट्री के दिग्गजों की राय
इस पूरी रिपोर्ट और बाजार के मौजूदा रुख पर अपनी बात रखते हुए जेएमएस ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर पुष्पेंद्र सिंह ने कहा, “गुरुग्राम और नोएडा जैसे बाजारों में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी किसी सामान्य या अस्थायी तेजी के बजाय एक बड़े और स्थायी बदलाव को दिखाती है।” उन्होंने आगे बताया कि इस डेटा का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि इसी अवधि के दौरान रेंटल यील्ड में अस्सी बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे यह साफ होता है कि खरीदारों को सिर्फ संपत्तियों के दाम बढ़ने का फायदा नहीं मिल रहा, बल्कि किराये के रिटर्न से भी पूरा तालमेल बैठा हुआ है।
इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए बीपीटीपी लिमिटेड के प्रेसिडेंट और सीईओ मानिक मलिक का कहना है कि आज के दौर में घर खरीदने वाले लोग मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर कनेक्टिविटी और एक उन्नत सोशल इकोसिस्टम वाले इलाकों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे लंबी अवधि में उस प्रॉपर्टी की वैल्यू में जबरदस्त इजाफा होता है।
वहीं पायनियर अर्बन लैंड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ऋषभ पेरिवाल ने अपने विचार रखते हुए कहा कि देश के विभिन्न शहरी क्षेत्रों से आ रहे आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि रियल एस्टेट बाजार में लगातार सकारात्मक गतिविधियां जारी हैं, और हमारा मुख्य फोकस गुरुग्राम के तेजी से आगे बढ़ रहे सेक्टर पर है जहां आधुनिक सुविधाओं से लैस प्रोजेक्ट्स की मांग बनी हुई है।
आगे कैसी रहेगी बाजार की चाल
सामने आई रिपोर्ट के निष्कर्षों के मुताबिक, हालांकि रेजिडेंशियल रियल एस्टेट बाजार में संपत्तियों के दाम लगातार ऊंचे बने हुए हैं, लेकिन उसके मुकाबले बिक्री में वैसी तेजी दिखाई नहीं दे रही है। देश के स्थापित और बड़े बाजारों में प्रॉपर्टी की कीमतें मजबूत स्तर पर टिकी हुई हैं, जबकि नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग और कुल बिक्री के आंकड़ों में थोड़ी नरमी आई है। ऐसे में यह उम्मीद की जा रही है कि डेवलपर्स आगामी समय में नई सप्लाई उतारने को लेकर काफी सतर्क रुख अपनाएंगे और अपना ज्यादा ध्यान उन चुनिंदा बाजारों तथा प्रोजेक्ट्स पर केंद्रित रखेंगे जहां घर खरीदने वाले ग्राहकों की मांग सबसे अधिक मजबूत और स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।



















