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झारखंड के कोडरमा में मनीषा मेहता ने 20 हजार से शुरू किया मुर्गी पालन, हर महीने कमा रहीं 10 से 12 हजार रुपयेझारखंड
9 सित॰ 2026, 7:10 am (1 घंटे पहले)· 2

झारखंड के कोडरमा में मनीषा मेहता ने 20 हजार से शुरू किया मुर्गी पालन, हर महीने कमा रहीं 10 से 12 हजार रुपये

झारखंड के कोडरमा जिले के भेलवाटांड़ गांव की मनीषा मेहता ने बीवी 300 प्रजाति की मुर्गियों का पालन कर आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की है। सरकारी अनुदान का लाभ उठाकर उन्होंने महज 20 हजार रुपये में यह कारोबार शुरू किया था।

ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका और स्वरोजगार के नए अवसर तेजी से उभर रहे हैं। झारखंड के कोडरमा जिले के डोमचांच प्रखंड स्थित भेलवाटांड़ गांव की रहने वाली मनीषा मेहता ने कुक्कुट पालन के जरिए वित्तीय स्वावलंबन का एक बेहतरीन मार्ग तैयार किया है। उन्होंने अपने गांव में ही छोटा सा पोल्ट्री फार्म स्थापित कर न केवल अपनी आमदनी का साधन बनाया है, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गई हैं।

20 हजार रुपये के शुरुआती खर्च से खड़ा किया पोल्ट्री फार्म

मनीषा मेहता ने वर्ष 2025 में अपने घर के करीब 1000 वर्गफीट की जगह में मुर्गी पालन की नींव रखी थी। व्यवसाय के शुरुआती ढांचे को समझने के बाद उन्होंने 100 मुर्गियों की क्षमता वाला एक केज स्थापित किया। सामान्य तौर पर 100 मुर्गियों के इस पूरे केज सेटअप को तैयार करने में लगभग 1,08,560 रुपये की लागत आती है। हालांकि, झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी द्वारा दिए जाने वाले 80 प्रतिशत अनुदान की मदद से उनका व्यक्तिगत खर्च घटकर केवल 20,000 रुपये रह गया। इस सरकारी सहायता ने उनके शुरुआती वित्तीय जोखिम को काफी हद तक कम कर दिया।

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BV 300 नस्ल की मुर्गियों से रोजाना 80 से 100 अंडों की पैदावार

अंडा उत्पादन के मामले में बीवी 300 प्रजाति की मुर्गियों को काफी बेहतर माना जाता है। मनीषा के केज में मौजूद 100 मुर्गियां प्रतिदिन औसतन 80 से 100 अंडों का उत्पादन करती हैं। बाजार में अंडों की नियमित बिक्री से प्रतिदिन होने वाली आय में से दाना, दवाइयां और अन्य रख-रखाव के खर्च निकालने के बाद भी उन्हें प्रतिदिन लगभग 400 रुपये की शुद्ध बचत हो जाती है। इस प्रकार नियमित अंडा उत्पादन से एक स्थिर आय चक्र तैयार हो गया है।

घरेलू कामकाज के साथ 10 से 12 हजार रुपये की मासिक आय

पोल्ट्री फार्म के संचालन के लिए दिन भर में केवल कुछ घंटों की देखभाल की आवश्यकता होती है। मनीषा बताती हैं कि घर के सभी दैनंदिन काम निपटाने के बाद वे आसानी से इस व्यवसाय की देखरेख कर लेती हैं। इससे उन्हें प्रति माह 10,000 से 12,000 रुपये तक की निश्चित आमदनी हो जाती है, जिससे वे अपनी व्यक्तिगत आवश्यकताओं और इच्छाओं को पूरा कर पा रही हैं। मनीषा ने ग्रामीण महिलाओं का आह्वान किया है कि वे स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संगठित होकर और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाकर स्वरोजगार से जुड़ें और आर्थिक रूप से सशक्त बनें।

सवाल-जवाब

मनीषा मेहता ने मुर्गी पालन का व्यवसाय किस स्थान से शुरू किया?
उन्होंने झारखंड के कोडरमा जिले के डोमचांच प्रखंड अंतर्गत भेलवाटांड़ गांव से इस व्यवसाय की शुरुआत की।
100 मुर्गियों के केज सेटअप की कुल लागत कितनी है और सरकारी अनुदान के बाद कितना खर्च आता है?
इस केज की कुल लागत 1,08,560 रुपये है, लेकिन जेएसएलपीएस से 80 प्रतिशत अनुदान मिलने के बाद यह व्यवसाय लगभग 20,000 रुपये में शुरू हो जाता है।
बीवी 300 प्रजाति की 100 मुर्गियों से रोजाना कितने अंडों का उत्पादन होता है?
100 मुर्गियों के एक केज से प्रतिदिन लगभग 80 से 100 अंडों का उत्पादन होता है।
खर्च निकालने के बाद इस व्यवसाय से प्रतिदिन और प्रति माह कितनी बचत होती है?
चारा और दवाओं का खर्च निकालने के बाद प्रतिदिन करीब 400 रुपये की बचत होती है, जिससे महीने में 10,000 से 12,000 रुपये की आमदनी हो जाती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·40 मिनट पहले

यह खबर ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं के सही क्रियान्वयन और स्वरोजगार की संभावनाओं को रेखांकित करती है। झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के 80 प्रतिशत अनुदान जैसी पहलों से वित्तीय जोखिम कम होता है, जिससे ग्रामीण महिलाएं छोटे पैमाने पर भी आर्थिक स्वावलंबन हासिल कर सकती हैं। भविष्य में ऐसी सूक्ष्म इकाइयों के समूहीकरण और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला के सुदृढ़ीकरण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और अधिक गति मिल सकती है।

Rohan Verma@rohan-verma·40 मिनट पहले

करन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था में माइक्रो-फाइनेंस और स्वयं सहायता समूहों की भूमिका को स्पष्ट करता है। झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी जैसी योजनाओं के 80 प्रतिशत अनुदान ने जिस तरह 1,08,560 रुपये के कुल सेटअप को मात्र 20,000 रुपये के व्यक्तिगत खर्च तक सीमित किया, वह वित्तीय बाधाओं को पाटने का एक प्रभावी उदाहरण है। यदि ऐसी इकाइयों से बीवी 300 प्रजाति की मुर्गियों के माध्यम से हो रहे 80 से 100 अंडों के दैनिक उत्पादन को सीधे स्थानीय बाजारों और स्कूलों की पोषाहार योजनाओं से जोड़ा जाए, तो न केवल महिलाओं की 10 से 12 हजार रुपये की मासिक आय सुरक्षित होगी, बल्कि ग्रामीण स्तर पर स्थायी आजीविका के बुनियादी ढांचे को भी एक नया आयाम मिलेगा।

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