नई दिल्ली ब्रिक्स सम्मेलन पर टिकीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की निगाहें, जानिए डॉलर और टैरिफ से जुड़ा पूरा गणितबिलासपुर में तीजा पर्व पर बनाएं छत्तीसगढ़ की पारंपरिक खुरमी, जानें आसान रेसिपी और खस्ता बनाने का सीक्रेटहिमाचल प्रदेश में 11 सितंबर तक धूप खिला रहेगा मौसम, 12 तारीख से फिर बदलेगा हवा का मिजाजवॉल स्ट्रीट में भारी गिरावट, डाउ जोन्स 630 अंक लुढ़का; कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया तनाव का असरपेरिस ओलंपिक मेडलिस्ट शूटर की दादी का निधन, भोपाल में ट्रेनिंग छोड़ रोहतक के लिए रवाना हुईं मनु भाकरचीन के महंगाई आंकड़ों के बाद जापानी येन के मुकाबले मजबूत हुआ ऑस्ट्रेलियाई डॉलरचीन के महंगाई आंकड़ों और ईंधन के बढ़ते दामों के बीच AUD/USD बहु-मासिक उच्च स्तर के करीब कायमस्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में फिर से विवाह बंधन में बंधना शुभ है या अशुभ, जानिए इसके गहरे मायनेहॉटसीट पर प्रतियोगियों के दर्द से भावुक हुए अमिताभ बच्चन, केबीसी 18 के अनुभव को बताया दिल तोड़ने वालाभाद्रपद की पिठोरी अमावस्या 2026 पर बन रहा विशेष योग, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और 64 योगिनियों के पूजन का नियम
श्रीनगर में राष्ट्रगीत के सम्मान में खड़े हुए उमर अब्दुल्ला, केसी वेणुगोपाल के बयान से उभरा विपक्षी मतभेदराजनीति
9 सित॰ 2026, 7:12 am (1 घंटे पहले)· 2

श्रीनगर में राष्ट्रगीत के सम्मान में खड़े हुए उमर अब्दुल्ला, केसी वेणुगोपाल के बयान से उभरा विपक्षी मतभेद

श्रीनगर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पूरे वंदे मातरम् के समय खड़े रहे, जिस पर कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने आपत्ति जताई है। इस विवाद ने विपक्षी गठबंधन के भीतर राष्ट्रगीत को लेकर गहरे मतभेदों को उजागर कर दिया है।

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर शहर में 7 सितंबर को आयोजित एक सांस्कृतिक और सिनेमाई आयोजन के दौरान एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। एक स्थानीय फिल्म फेस्टिवल के औपचारिक उद्घाटन समारोह के अवसर पर राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का पूरे 3 मिनट 10 सेकंड तक सरगम और गायन चलता रहा। इस दौरान जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पूरे समय सम्मानपूर्वक खड़े रहे। उनके साथ मंच पर उनके पिता तथा नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे। हालांकि, इस पूरे गायन और मुख्यमंत्री के रुख का वीडियो सार्वजनिक होते ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की तरफ से इस पर कड़ी असहमति जाहिर की गई, जिससे विपक्षी खेमे के भीतर वैचारिक मतभेद सतह पर आ गए हैं।

राष्ट्रगीत के पूर्ण गायन पर उठे सवाल और इतिहास का हवाला

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर लिखा कि राष्ट्रगीत का पूरा संस्करण भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों द्वारा अपनाई गई बहुलतावादी और समावेशी सोच से पूरी तरह मेल नहीं खाता है। पार्टी ने अपने बयान में ऐतिहासिक संदर्भों को रेखांकित करते हुए स्वतंत्रता आंदोलन के कई प्रमुख प्रतीकों और नेताओं का उल्लेख किया। इनमें महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, आचार्य नरेंद्र देव, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सरोजिनी नायडू और जे.बी. कृपलानी जैसी महान शख्सियतों के विचारों तथा उनके द्वारा लिए गए निर्णयों का हवाला दिया गया।

केसी वेणुगोपाल ने अपने वक्तव्य में जोर देकर कहा कि कांग्रेस पार्टी अपने सभी सहयोगी राजनीतिक दलों से अत्यंत सम्मानपूर्वक यह आग्रह करती है कि वे देश के स्वाधीनता सेनानियों की ऐतिहासिक समझ और उनके द्वारा तय किए गए मानकों का पूर्ण आदर करें। कांग्रेस का स्पष्ट मानना है कि सार्वजनिक आयोजनों में वंदे मातरम् का केवल वही मर्यादित संस्करण गाया जाना चाहिए जिसे आजादी की लड़ाई के दौर में राष्ट्रीय नेताओं ने स्वीकृत किया था। उनके अनुसार, स्वतंत्रता सेनानियों ने उस विशिष्ट संस्करण का चयन इसलिए किया था ताकि इस राष्ट्रीय गीत को किसी भी प्रकार के सांप्रदायिक रंग में न रंगा जा सके और देश के बहुसांस्कृतिक ताने-बाने की रक्षा की जा सके। पार्टी का तर्क है कि भारत की धर्मनिरपेक्ष पहचान और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने वाली गौरवशाली परंपरा को अक्षुण्ण रखने के लिए यही ऐतिहासिक मार्ग सबसे अधिक उपयुक्त है।

सत्तारूढ़ पार्टी की तीखी प्रतिक्रिया और कांग्रेस पर हमले

दूसरी ओर, वंदे मातरम् के पूरे संस्करण को लेकर कांग्रेस द्वारा जताई गई आपत्ति पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर सीधा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी पूरी तरह से कट्टरपंथी ताकतों के दबाव में काम कर रही है। त्रिवेदी ने अपने वक्तव्य में कहा, "कांग्रेस अब कट्टरपंथी तत्वों के हाथों की कठपुतली बनकर रह गई है।" बीजेपी प्रवक्ता ने इस बात पर विशेष बल दिया कि खुद कांग्रेस के अपने राजनीतिक सहयोगी भी वंदे मातरम् के मुद्दे पर उसके कड़े दृष्टिकोण से इत्तेफाक रखते नहीं दिखते।

बीजेपी की ओर से यह सवाल भी उठाया गया कि जब विपक्षी गठबंधन में शामिल अन्य प्रमुख राजनीतिक दलों को राष्ट्रगीत के पूरे संस्करण का गायन किए जाने से कोई बुनियादी समस्या या परहेज नहीं है, तो फिर कांग्रेस इस विषय पर इतना कठोर और आक्रामक रुख क्यों अपना रही है। उल्लेखनीय है कि बीजेपी ने पूर्व में ही वंदे मातरम् के राष्ट्रव्यापी सम्मान, गरिमा और इसकी ऐतिहासिक विरासत की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण तथा विस्तृत प्रस्ताव पारित किया हुआ है, जिसमें इसके गायन और आदर से जुड़े 10 प्रमुख बिंदुओं को समाहित किया गया है।

अगस्त के मध्य से शुरू हुआ विवाद और पार्टी का आधिकारिक रुख

राष्ट्रगीत के गायन को लेकर कांग्रेस पार्टी का वर्तमान दृष्टिकोण 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सामने आई एक घटना के बाद से लगातार राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में बना हुआ है। उस दिन नई दिल्ली स्थित कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय में आयोजित समारोह के दौरान जब वंदे मातरम् की पंक्तियां बजाई जा रही थीं, तब पार्टी की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी आरंभिक अंतरा समाप्त होने के तुरंत बाद गीत को वहीं रोक देने का इशारा करती हुई देखी गई थीं। इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित होने के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में भारी राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। कई संगठनों और राजनीतिक विरोधियों ने कांग्रेस से सार्वजनिक माफी की मांग की थी, जबकि देश के कुछ इलाकों में इस मामले को लेकर कानूनी शिकायतें और केस दर्ज होने की खबरें भी सामने आई थीं।

वीडियो सामने आने के बाद हालांकि कांग्रेस पार्टी के विभिन्न प्रवक्ताओं ने इस पर अलग-अलग तरह की सफाई देने का प्रयास किया था, लेकिन पार्टी अपने मूल सिद्धांत पर कायम रही। बाद में विवाद को विराम देने और अपनी स्थिति स्पष्ट करने के उद्देश्य से कांग्रेस ने यह औपचारिक फैसला लिया कि पार्टी के किसी भी मंच पर वंदे मातरम् के केवल पहले दो अंतरे ही गाए जाएंगे। इस फैसले को संस्थागत रूप देने के लिए पार्टी की सर्वोच्च नीति-निर्धारक इकाई, कांग्रेस कार्यसमिति (CWC), में एक आधिकारिक प्रस्ताव पारित किया गया। इसके उपरांत, 18 अगस्त को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने स्वयं मीडिया के समक्ष आकर पार्टी के इस आधिकारिक रुख को सार्वजनिक तौर पर स्पष्ट किया था।

तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का इस मुद्दे पर दृष्टिकोण पहले दिन से ही स्पष्ट और सुसंगत रहा है। जब 15 अगस्त की घटना के बाद संवाददाताओं ने सोनिया गांधी के वीडियो को लेकर उमर अब्दुल्ला से प्रतिक्रिया मांगी थी, तब उन्होंने बिना किसी झिझक के पूरे वंदे मातरम् का गायन किए जाने की वकालत की थी। ऐसे में 7 सितंबर को श्रीनगर के फिल्म फेस्टिवल में पूरे राष्ट्रगीत के दौरान उमर अब्दुल्ला का गरिमापूर्ण ढंग से खड़े रहना किसी अचानक बदले हुए राजनीतिक रुख का परिणाम नहीं है, बल्कि वह अपने पुराने और सार्वजनिक रूप से घोषित स्टैंड पर ही मजबूती से कायम हैं।

गठबंधन सहयोगियों के बीच भिन्न राय और सियासी अलगाव

वंदे मातरम् के गायन की अनिवार्यता और इसके स्वरूप को लेकर विपक्षी गठबंधन INDIA के घटक दलों के बीच स्पष्ट विभाजन दिखाई दे रहा है, जिससे कांग्रेस इस संवेदनशील मुद्दे पर अपने ही खेमे में अलग-थलग पड़ती नजर आ रही है। गठबंधन में शामिल प्रमुख दलों का रुख इस प्रकार है

  • कांग्रेस: पार्टी का बिल्कुल साफ और औपचारिक स्टैंड है कि वह सार्वजनिक व पार्टी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के केवल प्रथम दो अंतरे ही गाएगी।
  • नेशनल कॉन्फ्रेंस: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पार्टी पूरे वंदे मातरम् गीत का गायन करने और उसका सम्मान करने के पक्षधर हैं।
  • तृणमूल कांग्रेस (TMC): पार्टी पूरे गीत के सभी अंतरों को अनिवार्य बनाए जाने का विरोध करती है, लेकिन उसने कांग्रेस की भांति संपूर्ण गीत के गायन का कोई प्रखर विरोध नहीं किया है।
  • समाजवादी पार्टी: राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी वंदे मातरम् के पूरे संस्करण के गायन के खिलाफ कोई आक्रामक रुख नहीं रखती।
  • शिवसेना (यूबीटी): उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने इस मुद्दे पर कांग्रेस की आधिकारिक लाइन का समर्थन नहीं किया है।
  • द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके): पार्टी वंदे मातरम् के सभी छह अंतरों को अनिवार्य रूप से गाए जाने के नियम का स्पष्ट विरोध करती है।
  • राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी): इस मामले में पार्टी की आधिकारिक लाइन अभी तक पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो सकी है।
  • राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी-एसपी): शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट ने भी कांग्रेस की तरह पूरे राष्ट्रगीत के विरोध का रुख नहीं अपनाया है।

राष्ट्रीय राजनीति के विश्लेषकों का मानना है कि यही भिन्नता अब कांग्रेस के लिए एक बड़ा राजनीतिक यक्ष प्रश्न बन चुकी है। एक तरफ जहां पार्टी ने अपनी पुरानी वैचारिक सोच का हवाला देते हुए केवल दो अंतरे गाने का कड़ा फैसला लागू किया है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी गठबंधन के बड़े और असरदार सहयोगी दल इस मुद्दे पर उसके साथ खड़े होने से हिचकिचा रहे हैं। उमर अब्दुल्ला द्वारा पूरे राष्ट्रगीत का सम्मान किए जाने से कांग्रेस के सामने असहज स्थिति पैदा हो गई है, क्योंकि नेशनल कॉन्फ्रेंस विपक्षी मोर्चे का एक बेहद महत्वपूर्ण स्तंभ है। जब एक ही गठबंधन के भीतर राष्ट्रगीत जैसे भावनात्मक और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दे पर ऐसी विरोधाभासी राय सामने आती है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या कांग्रेस अपने इस कड़े रुख के कारण चुनावी और राजनीतिक पटल पर एकाकी पड़ती जा रही है।

ये भी पढ़ें

सवाल-जवाब

श्रीनगर में 7 सितंबर को क्या घटना हुई थी?
श्रीनगर में एक फिल्म फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का 3 मिनट 10 सेकंड तक पूरा गायन हुआ, जिसके दौरान जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला खड़े रहे।
उमर अब्दुल्ला के अलावा मंच पर और कौन मौजूद था?
मंच पर उनके पिता और नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला तथा अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे।
कांग्रेस ने उमर अब्दुल्ला के खड़े रहने पर क्या आपत्ति जताई?
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि वंदे मातरम् का पूरा संस्करण स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा अपनाई गई बहुलतावादी और समावेशी सोच के अनुरूप नहीं है।
बीजेपी ने इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया दी?
बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस कट्टरपंथी ताकतों की कठपुतली बन गई है और सवाल उठाया कि उसके सहयोगी दल जब विरोध नहीं कर रहे हैं तो कांग्रेस क्यों अड़ी है।
कांग्रेस ने वंदे मातरम् को लेकर अपनी पार्टी लाइन कब तय की थी?
15 अगस्त को सोनिया गांधी से जुड़े वीडियो विवाद के बाद कांग्रेस कार्यसमिति ने प्रस्ताव पारित किया था और 18 अगस्त को अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने साफ किया था कि पार्टी केवल दो अंतरे ही गाएगी।
उमर अब्दुल्ला का वंदे मातरम् को लेकर पहले क्या रुख था?
15 अगस्त की घटना के बाद जब उमर अब्दुल्ला से सवाल पूछा गया था, तब उन्होंने स्पष्ट रूप से पूरा वंदे मातरम् गाने की पैरवी की थी।
विपक्षी गठबंधन के अन्य दलों का इस मुद्दे पर क्या रुख है?
टीएमसी, समाजवादी पार्टी, शिवसेना यूबीटी और एनसीपी-एसपी जैसी पार्टियां पूरे गीत के गायन का कांग्रेस की तरह कड़ा विरोध नहीं करती हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 1

Rohan Verma@rohan-verma·41 मिनट पहले

श्रीनगर में उमर अब्दुल्ला द्वारा पूरे राष्ट्रगीत के सम्मान में खड़े होने और उस पर कांग्रेस के विरोध से विपक्षी गठबंधन में वैचारिक दरारें खुलकर सामने आ गई हैं। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि राष्ट्रीय प्रतीकों के मामलों में क्षेत्रीय सहयोगियों और मुख्य विपक्षी दल के बीच कोई आम सहमति नहीं है। इसका सीधा राजनीतिक लाभ सत्तारूढ़ दल को मिल रहा है, जो इसे अवसरवादी राजनीति बताकर आक्रामक तेवर अपनाए हुए है। आने वाले समय में चुनावी मैदान या संयुक्त मोर्चों पर इस तरह के मतभेद विपक्ष की एकजुटता के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR