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रूसी तेल खरीद पर 100 प्रतिशत टैरिफ के खतरे के बीच अमेरिकी बयान, डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी खुद सुलझाएंगे द्विपक्षीय व्यापार मुद्देअमेरिका
12 अग॰ 2026, 11:50 pm (61 दिन पहले)· 1

रूसी तेल खरीद पर 100 प्रतिशत टैरिफ के खतरे के बीच अमेरिकी बयान, डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी खुद सुलझाएंगे द्विपक्षीय व्यापार मुद्दे

व्हाइट हाउस के सलाहकार पीटर नवारो ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबंध बहुत अच्छे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों नेता 100 प्रतिशत टैरिफ और व्यापारिक मुद्दों को सीधे बातचीत से सुलझा लेंगे।

वाशिंगटन में व्हाइट हाउस के भीतर एक प्रेस वार्ता के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति के सलाहकार पीटर नवारो ने भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच अत्यंत प्रगाढ़ और बेहतर कामकाजी संबंध हैं। नवारो का मानना है कि दोनों देशों के शीर्ष नेता आपस में बातचीत करके द्विपक्षीय व्यापारिक मुद्दों और संभावित टैरिफ चिंताओं को आसानी से सुलझा लेंगे। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी विधायिका में रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने से जुड़ा एक प्रस्ताव चर्चा का विषय बना हुआ है।

द्विपक्षीय संबंधों और व्यापारिक मुद्दों पर पीटर नवारो का रुख

मीडियाकर्मियों के सवालों का जवाब देते हुए पीटर नवारो ने कहा कि दोनों देशों के मध्य व्यापारिक वार्ता की प्रक्रिया में उनकी अपनी कोई व्यक्तिगत भूमिका नहीं है। उन्होंने बल देकर कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वयं इन विषयों पर सीधी चर्चा करने देनी चाहिए, क्योंकि दोनों नेताओं में आपसी समझ बहुत अच्छी है। व्हाइट हाउस में बात करते हुए नवारो ने इस बात पर जोर दिया कि शीर्ष स्तर का यह संवाद ही दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच व्यापारिक असंतुलन और नीतिगत असहमतियों को दूर करने का सबसे प्रभावी मार्ग है।

रूसी तेल व्यापार और वित्तीय प्रतिबंधों पर चर्चा

बातचीत के दौरान नवारो ने करीब 6 महीने पहले फ़ाइनेंशियल टाइम्स में प्रकाशित अपने एक लेख की याद दिलाई। उन्होंने उल्लेख किया कि यूक्रेन संघर्ष शुरू होने से पहले भारत रूस से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल नहीं खरीदता था। हालांकि बाद के दिनों में भारतीय रिफाइनरियों द्वारा रूसी कच्चे तेल का आयात तेजी से बढ़ा और उससे तैयार रिफाइंड उत्पादों की बिक्री में बढ़ोतरी देखी गई। नवारो के अनुसार इस व्यापार ने रूसी अर्थव्यवस्था और उसकी सैन्य गतिविधियों के वित्तीय तंत्र को सहारा दिया था। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उस विशेष विषय को अब सुलझा लिया गया है। नवारो ने यह खुलासा भी किया कि उस लेख के प्रकाशन के बाद उन्हें इंटरनेट पर भारतीय नागरिकों की ओर से काफी तीखी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ा था, लेकिन अमेरिका में नीतियां इंटरनेट पर होने वाली बहस के आधार पर तय नहीं की जाती हैं।

अमेरिकी सीनेट का नया विधेयक और 100 प्रतिशत टैरिफ का प्रावधान

यह पूरा मामला अमेरिकी सीनेट द्वारा 7 अगस्त को पारित किए गए एक नए कानून के इर्द-गिर्द घूमता है। सीनेट में 86 के मुकाबले 11 वोटों के भारी बहुमत से पारित इस विधेयक के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया गया है कि वे रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों पर 100 प्रतिशत तक का दंडात्मक टैरिफ लगा सकते हैं। इस सूची में भारत और चीन प्रमुखता से शामिल हैं। अमेरिकी सांसदों का तर्क है कि इस प्रकार का ऊर्जा व्यापार रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए राजस्व जुटाने का जरिया बनता है, जिससे यूक्रेन के खिलाफ सैन्य अभियानों को फंडिंग मिलती है। यह नया कानून दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा लगभग एक वर्ष तक चलाए गए उस अभियान का परिणाम है, जिसका उद्देश्य यूक्रेन के लिए अमेरिकी समर्थन को सशक्त करना और मास्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाना था।

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सवाल-जवाब

पीटर नवारो ने डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी के संबंधों के बारे में क्या कहा?
पीटर नवारो ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच मजबूत कामकाजी संबंध हैं और दोनों नेता आपस में व्यापारिक मुद्दों का समाधान निकालने में सक्षम हैं।
अमेरिकी सीनेट में कौन सा विधेयक पारित किया गया है?
अमेरिकी सीनेट ने 7 अगस्त को एक विधेयक पारित किया है जो राष्ट्रपति को रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख 5 देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है।
100 प्रतिशत टैरिफ वाले विधेयक का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य रूसी तेल और गैस से होने वाली आय को रोकना है, ताकि यूक्रेन में जारी सैन्य अभियानों के लिए रूस के राजस्व स्रोतों पर दबाव बनाया जा सके।
अमेरिकी सीनेट में यह विधेयक किस बहुमत से पारित हुआ?
यह विधेयक अमेरिकी सीनेट में 86 के मुकाबले 11 वोटों के भारी बहुमत से पारित हुआ।
पीटर नवारो ने अपने फ़ाइनेंशियल टाइम्स के लेख के संबंध में क्या कहा?
नवारो ने बताया कि उन्होंने करीब 6 महीने पहले एक लेख लिखा था जिसमें यूक्रेन युद्ध के बाद रूस से तेल व्यापार में बढ़ोतरी का उल्लेख किया गया था, जिसके बाद उन्हें ऑनलाइन आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।
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