रियाद को आधुनिक हथियारों की आपूर्ति को लेकर वॉशिंगटन के रक्षा गलियारों में एक गंभीर रणनीतिक बहस छिड़ गई है। पश्चिम एशिया में बदलते कूटनीतिक समीकरणों के बीच सऊदी अरब दोहरी चुनौतियों से रूबरू हो रहा है, जहां एक तरफ यमन सीमा पर तनाव और संघर्ष का सामना है, वहीं दूसरी तरफ उसके सबसे आधुनिक सैन्य विमानों की खरीद प्रक्रिया पर सुरक्षा चिंताओं के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिका के साथ प्रस्तावित रक्षा सौदे के तहत सऊदी अरब को 48 F-35 स्टील्थ विमान मिलने की योजना पर विचार चल रहा है, लेकिन अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) के गोपनीय मूल्यांकन में बीजिंग के साथ रियाद के बढ़ते तकनीकी और रणनीतिक संबंधों को लेकर खतरे रेखांकित किए गए हैं। नीति निर्माताओं के लिए यह सौदा केवल रक्षा व्यापार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल सीधे तौर पर वॉशिंगटन की सबसे गोपनीय युद्ध तकनीक के संरक्षण से जुड़ गया है।
स्टील्थ तकनीक और पांचवीं पीढ़ी का तकनीकी ढांचा
F-35 केवल एक पारंपरिक लड़ाकू विमान नहीं है, बल्कि यह पांचवीं पीढ़ी का ऐसा उड़ता हुआ डिजिटल नेटवर्क है जिसकी प्रभावशीलता कई जटिल प्रणालियों के तालमेल पर निर्भर करती है। अमेरिकी रक्षा दस्तावेजों में इस विमान की कम रडार पकड़ में आने वाली लो-ऑब्जर्वेबल बनावट, AN/APG-81 रडार, शक्तिशाली F135 इंजन और अत्यधिक उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम को बेहद संवेदनशील माना गया है। इसके अलावा, विभिन्न स्रोतों से प्राप्त युद्धक्षेत्र की सूचनाओं को पलक झपकते संसाधित करने वाली AI तकनीक और सेंसर फ्यूजन इसे दुनिया के अन्य विमानों से अलग पायदान पर खड़ा करते हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सऊदी अरब और चीन के बीच बढ़ते सहयोग के चलते इस तंत्र के किसी भी हिस्से की भनक बीजिंग को लगती है, तो इससे पूरी पश्चिमी रक्षा प्रणाली की रणनीतिक बढ़त को आघात पहुंच सकता है।
तकनीकी रिसाव और काउंटरमेजर विकसित होने की आशंकाएं
अमेरिकी खुफिया समुदाय का सबसे बड़ा संशय यह नहीं है कि कोई विरोधी मुल्क सीधे तौर पर विमान को हासिल कर लेगा, बल्कि मुख्य जोखिम इसके तकनीकी नेटवर्क के आसपास मौजूद कड़ियों से जुड़ा है। एक आधुनिक लड़ाकू विमान के संचालन में नियमित रखरखाव, पायलट और इंजीनियरों का प्रशिक्षण, संचार तंत्र, सॉफ्टवेयर अपडेट, सेंसर पैकेज और संबंधित लॉजिस्टिक्स का एक विशाल तंत्र सक्रिय रहता है। इस तरह के पूरे ढांचे के संपर्क में आने से संवेदनशील डिजिटल और हार्डवेयर संबंधी जानकारियां बाहर जा सकती हैं। यदि किसी तकनीकी रूप से सक्षम विरोधी को विमान के हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली समझ में आ जाती है, तो वह इसकी खूबियों की नकल किए बिना भी इसके खिलाफ मारक काउंटरमेजर या रडार रक्षा प्रणाली तैयार कर सकता है। यानी विमान को कैसे पकड़ा जाए, उसका ग्राउंड संचार कैसे बाधित किया जाए और उसकी इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा को कैसे भेदा जाए, यह जानकारी विरोधी के लिए किसी पूरे विमान की नकल तैयार करने से भी ज्यादा मूल्यवान साबित हो सकती है।
मौजूदा सुरक्षा उपाय और निगरानी की सीमाएं
F-35 कार्यक्रम के तहत ऐसी संवेदनशील तकनीकों की सुरक्षा के लिए कई तरह के सख्त नियम और तकनीकी सुरक्षा कवच पहले से तय किए गए हैं। इनमें निरंतर चलने वाले साइबर सुरक्षा परीक्षण, सॉफ्टवेयर की कड़ी जांच और किसी भी अनधिकृत तकनीकी गतिविधि पर सीधी निगरानी रखने वाली प्रणालियां शामिल हैं। इसके बावजूद सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि केवल इन रक्षात्मक पैमानों के आधार पर किसी मित्र देश की धरती पर मौजूद विमान को चीनी तकनीकी निगरानी से पूरी तरह महफूज रखना आसान काम नहीं है। F-35 कोई अलग-थलग संचालित होने वाली मशीन नहीं है, बल्कि यह डेटा, सेंसर, सॉफ्टवेयर कोड और अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स से जुड़ा एक समूचा पारिस्थितिकी तंत्र है, जहां सूचना प्रवाह के हर बिंदु पर अत्यधिक सतर्कता की जरूरत होती है।
यमन सीमा पर सैन्य टकराव और विमानों की पीढ़ियों का अंतर
इस रक्षा समीक्षा के बीच 16 सितंबर को यमन के हूतियों ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि उन्होंने मारिब प्रांत के ऊपर सऊदी F-15 लड़ाकू विमान को मार गिराया है। हूती सैन्य प्रवक्ता के अनुसार, इस कार्रवाई में स्थानीय स्तर पर तैयार की गई एयर-टू-एयर मिसाइल का इस्तेमाल किया गया था और इसके समर्थन में मलबे का एक वीडियो भी जारी किया गया। हालांकि, इस घटना की किसी भी स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही सऊदी पक्ष ने इस दावे की तत्काल तस्दीक की है। जानकारों का कहना है कि F-15 से जुड़े दावों को F-35 की सुरक्षा चिंताओं के साथ जोड़कर नहीं देखा जा सकता, क्योंकि दोनों विमान बिल्कुल अलग पीढ़ियों के हैं। F-15 जहां चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान है, वहीं F-35 को पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ प्लेटफॉर्म के तौर पर विकसित किया गया है, जिसकी वास्तविक शक्ति कम रडार क्रॉस-सेक्शन के साथ-साथ अभेद्य इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा, सेंसर फ्यूजन और आधुनिक नेटवर्क युद्ध क्षमता के अनूठे मेल में निहित है।



















