ईटानगर में अरुणाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री पासंग दोरजी सोना ने यह घोषणा की है कि राज्य सरकार निजी शिक्षण संस्थानों पर अपनी निगरानी और नियंत्रण को काफी ज्यादा सख्त कर रही है। अपने विभाग की जिम्मेदारी संभालने के बाद से उन्होंने अभी तक किसी भी नए निजी स्कूल के प्रस्ताव को हरी झंडी नहीं दी है और न ही किसी निजी विश्वविद्यालय के आवेदन पर कोई विचार किया गया है। मंत्री का यह कदम मौजूदा नियामक प्रणाली में मौजूद कमियों और खामियों को दूर करने के उद्देश्य से उठाया गया है, क्योंकि उनका मानना है कि नए संस्थानों को अनुमति देने से पहले कड़े नियम बनाना बेहद जरूरी है।
सोमवार को राजीव गांधी यूनिवर्सिटी रिसर्च स्कॉलर्स फोरम के पहले स्थापना दिवस और शोधार्थी सम्मेलन को संबोधित करते हुए मंत्री ने साफ शब्दों में बताया कि उन्होंने नए निजी स्कूलों के रजिस्ट्रेशन पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध तब तक जारी रहेगा जब तक कि पूरी तरह से व्यापक दिशा-निर्देशों को दोबारा तैयार नहीं किया जाता और पहले से चल रहे संस्थानों की व्यवस्था में सुधार नहीं किया जाता। मंत्री के सामने कई आवेदन आए थे, लेकिन उन्होंने यह फैसला किया कि जब तक तय मापदंड और सही गाइडलाइंस जमीन पर नहीं उतरतीं, तब तक किसी भी नए स्कूल को मान्यता नहीं दी जाएगी।
शिक्षा क्षेत्र में निजी संस्थानों के योगदान को स्वीकार करते हुए पासंग दोरजी सोना ने इस बात पर जोर दिया कि केवल संख्या बढ़ाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उनके विस्तार के साथ गुणवत्ता, सुरक्षा और जवाबदेही के तय मानकों का पालन होना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई ऐसे स्कूल संचालित हो रहे हैं जो निर्धारित नियमों का पूरी तरह से पालन नहीं कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने मौजूदा निरीक्षण तंत्र और चेकलिस्ट आधारित व्यवस्था में कई तरह की कमियों की तरफ भी इशारा किया, जिससे यह स्थिति पैदा हुई है।
राज्य सरकार ने अब नए निजी स्कूलों के पंजीकरण को नियंत्रित करने के लिए नियमों का एक नया मसौदा तैयार कर लिया है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि लाइसेंस या मान्यता के नवीनीकरण से जुड़े आवेदनों पर तभी विचार किया जाएगा जब इस संशोधित नियामक ढांचे को पूरी तरह से लागू कर दिया जाएगा। सरकार का मुख्य ध्यान केवल संस्थानों की संख्या बढ़ाने पर नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्चा एक सुरक्षित, जवाबदेही से भरा और उच्च गुणवत्ता वाला शैक्षणिक माहौल पा सके।
निजी विश्वविद्यालयों के मोर्चे पर बात करते हुए पासंग दोरजी सोना ने बताया कि उन्होंने नियामक आयोग को राज्य के सभी प्राइवेट विश्वविद्यालयों का एक गोपनीय आकलन करने के निर्देश दिए हैं। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान यह जांचा जाएगा कि क्या ये संस्थान अपने स्थापना से जुड़े मूल अधिनियमों और नियमों के अनुसार ही काम कर रहे हैं या नहीं। इसके अलावा, सरकार एक सामान्य मास्टर कानून लाने की दिशा में भी सक्रिय रूप से काम कर रही है, जिसका उद्देश्य अरुणाचल प्रदेश के सभी निजी विश्वविद्यालयों को एक समान नियामक दायरे में लाना है।



















