अरुणाचल प्रदेश के किबिथू इलाके में रविवार को भारत और चीन की सेना के बड़े अधिकारियों की मुलाकात हुई, जिसमें वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर मौजूदा हालात की समीक्षा की गई और सीमा पर शांति बनाए रखने के तरीकों पर बातचीत हुई। यह जानकारी मामले से जुड़े लोगों ने दी। जमीन पर तैनात कमांडरों के बीच होने वाली ऐसी मुलाकातें दोनों सेनाओं के लिए विवादित सीमा पर तनाव कम करने के सबसे सीधे जरियों में से एक मानी जाती हैं।
कहां हुई बातचीत, किसने की अगुवाई
यह कोर कमांडर स्तर की बैठक किबिथू सेक्टर के वाचा-दमई सीमा बिंदु पर हुई। भारतीय पक्ष की अगुवाई लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया ने की, जो दीमापुर मुख्यालय वाली सेना की 3 कोर के कमांडर हैं। भारतीय सेना की ओर से इस बैठक को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
बीजिंग वार्ता के तुरंत बाद हुई मुलाकात
यह सीमा बैठक ऐसे समय हुई जब कुछ दिन पहले ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी, जो दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधि के तौर पर काम करते हैं, बीजिंग में सीमा विवाद और सीमा पार सहयोग पर चर्चा कर चुके थे। रविवार की यह मुलाकात बीजिंग वार्ता के बाद इस सेक्टर में हुई पहली कोर कमांडर स्तर की बैठक थी। बीजिंग में हुई बातचीत में भारत और चीन आठ बिंदुओं पर सहमत हुए थे, जिनमें सीमा प्रबंधन मजबूत करने के मकसद से वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की मुलाकात के लिए दो और जगहों की पहचान करना भी शामिल था।
तकसिन में तनाव की खबरें
रविवार की बातचीत ऐसी खबरों के बीच हुई जिनमें कहा गया था कि अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले के दूरदराज इलाके तकसिन में भारतीय सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जवानों के बीच तनातनी हुई है। इस इलाके में असल हालात अभी साफ नहीं हैं। मामले से जुड़े लोगों ने पहले बताया था कि तकसिन में दोनों देशों के जवानों के बीच कई बार आमना-सामना हुआ था और जुलाई के आखिर तक यह स्थिति और गंभीर हो गई थी।
शांति की बात इतनी अहम क्यों
25 अगस्त को हुई विशेष प्रतिनिधियों की बैठक में भारत ने साफ कहा था कि भारत-चीन सीमा पर शांति बनाए रखना दोनों देशों के रिश्तों में आगे बढ़ने के लिए बेहद जरूरी है। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी ब्योरे में भी कहा गया था कि सीमावर्ती इलाकों में शांति बने रहना दोनों देशों के रिश्ते आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है। सैन्य स्तर की यह ताजा बातचीत ऐसे समय हुई है जब नई दिल्ली और बीजिंग, 2020 में पूर्वी लद्दाख में हुए सैन्य टकराव के बाद से रिश्तों को पटरी पर लाने की कोशिश में जुटे हैं। डोभाल और वांग यी की अगस्त वाली मुलाकात असल में अक्टूबर 2024 में दोनों देशों के बीच लद्दाख गतिरोध सुलझाने पर बनी सहमति के बाद हुई विशेष प्रतिनिधियों की बातचीत का तीसरा दौर थी। उस लंबे टकराव ने भारत-चीन रिश्तों को 1962 की जंग के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिया था।



















