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पेमा खांडू ने अरुणाचल के मछली पालकों को दिए इलेक्ट्रिक रिक्शा, बिचौलियों से मिलेगी राहतअरुणाचल प्रदेश
7 सित॰ 2026, 3:33 pm (1 घंटे पहले)· 2

पेमा खांडू ने अरुणाचल के मछली पालकों को दिए इलेक्ट्रिक रिक्शा, बिचौलियों से मिलेगी राहत

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने नाहरलागुन में मत्स्य ई-वाहिनी योजना के तहत इलेक्ट्रिक रिक्शा लॉन्च किए, ताकि मछली पालक नए बाजारों तक पहुंच सकें और बिचौलियों पर निर्भरता घटे।

अरुणाचल प्रदेश के मछली पालकों को अब अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने के लिए एक नया साधन मिल गया है। मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने सोमवार को नाहरलागुन में एक कार्यक्रम के दौरान मत्स्य ई-वाहिनी नाम की योजना के तहत इलेक्ट्रिक ई-रिक्शा का बेड़ा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह योजना उस पुरानी दिक्कत को दूर करने के मकसद से लाई गई है, जिसमें ताजा मछली को अच्छे दाम देने वाले खरीदारों तक पहुंचाने से पहले ही उसकी कीमत रास्ते में गिर जाती थी।

मछली पालकों के लिए ई-रिक्शा क्यों जरूरी थे

तालाबों और फार्म से मछली को बाजार तक ले जाने के लिए अब तक किसान महंगे या भरोसेमंद न होने वाले साधनों पर निर्भर रहते थे, जिसकी वजह से उन्हें अक्सर पास के बिचौलिए को ही जल्दी और सस्ते दाम पर माल बेचना पड़ता था। मत्स्य ई-वाहिनी के वाहन किसानों को अपना सस्ता और बैटरी से चलने वाला परिवहन साधन देकर यह तस्वीर बदलने की कोशिश करते हैं, ताकि वे अपनी उपज दूर तक ले जा सकें, बेचने की जगह खुद तय कर सकें और मोलभाव में मजबूत स्थिति में रहें।

इको फ्रेंडली वाहनों से क्या बदलाव आएगा

राज्य सरकार के मुताबिक, ये इलेक्ट्रिक रिक्शा मछली पालकों को अपने इलाके से बाहर के बाजारों तक पहुंचने, सीधे ग्राहकों को माल बेचने और बिचौलियों पर निर्भरता घटाने में मदद करेंगे, जो आमतौर पर बिक्री कीमत का एक हिस्सा अपने पास रख लेते हैं। अधिकारियों ने बताया कि बेहतर परिवहन और सीधी बाजार पहुंच किसानों को ढुलाई से जुड़ी दिक्कतों से निपटने और अपनी उपज का बेहतर दाम पाने में मदद करेगी, वहीं इको फ्रेंडली वाहनों के इस्तेमाल से मछली पालन से जुड़ी ढुलाई भी साफ-सुथरी और टिकाऊ बनेगी।

खांडू ने सोशल मीडिया पर क्या लिखा

पेमा खांडू ने एक्स पर लिखा, "मत्स्य ई-वाहिनी और ई-रिक्शा पहल की शुरुआत की, ताकि हमारे मछली पालकों को बाजार तक बेहतर पहुंच और अपनी आमदनी बढ़ाने के मजबूत मौके मिल सकें।"

कार्यक्रम में 12 किसान सम्मानित

नाहरलागुन के इस कार्यक्रम में 12 प्रगतिशील मछली पालकों को भी सम्मानित किया गया। इन्हें उनकी मेहनत, नयापन और आधुनिक मछली पालन तरीकों को अपनाने के लिए चुना गया। अधिकारियों ने कहा कि इनका उदाहरण राज्य के बाकी मछली पालकों को भी नए तरीके और तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित कर सकता है।

उसी दिन किसानों के लिए नया हब भी शुरू

उसी दिन खांडू ने नाहरलागुन में राज्य कृषि सूचना हब-सह-किसान छात्रावास का भी उद्घाटन किया। यह केंद्र किसानों को कृषि से जुड़ी जानकारी और बाकी जरूरी सुविधाएं एक ही जगह देने के मकसद से बनाया गया है, ताकि शहर आने पर उन्हें मार्गदर्शन के लिए एक तय ठिकाना मिल सके।

कृषि और मत्स्य पालन को आधुनिक बनाने की बड़ी कोशिश का हिस्सा

ये दोनों पहल राज्य सरकार की उस बड़ी योजना का हिस्सा हैं, जिसके तहत अरुणाचल प्रदेश में खेती और मछली पालन को आधुनिक बनाकर किसानों की कमाई के मौके बढ़ाए जा रहे हैं। मत्स्य ई-वाहिनी योजना असल में एक कल्याणकारी और स्वरोजगार योजना है, जिसमें इलेक्ट्रिक ई-रिक्शा के साथ-साथ इको फ्रेंडली मोबाइल फिश वेंडिंग कियोस्क भी शामिल किए गए हैं, ताकि राज्य में मछली की मार्केटिंग और वितरण व्यवस्था मजबूत हो सके। अधिकारियों ने बताया कि परिवहन और मार्केटिंग ढांचे में यह सुधार उत्पादकों को ग्राहकों से सीधे जोड़ने और मछली पालन की पूरी वैल्यू चेन को बेहतर बनाने में मदद करेगा, और नया सूचना हब भी ग्रामीण आजीविका के लिए मजबूत सहयोग व्यवस्था बनाने की इसी कोशिश का हिस्सा है।

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सवाल-जवाब

मत्स्य ई-वाहिनी योजना क्या है?
यह अरुणाचल प्रदेश सरकार की एक योजना है जिसके तहत मछली पालकों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने के लिए इलेक्ट्रिक रिक्शा दिए जा रहे हैं।
योजना की शुरुआत कब और कहां हुई?
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने सोमवार को नाहरलागुन में इसे लॉन्च किया।
इस योजना से मछली पालकों को क्या फायदा होगा?
वे नए बाजारों तक पहुंच सकेंगे, सीधे ग्राहकों को बेच सकेंगे और बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी।
कार्यक्रम में और क्या हुआ?
12 प्रगतिशील मछली पालकों को सम्मानित किया गया और राज्य कृषि सूचना हब-सह-किसान छात्रावास का उद्घाटन हुआ।
मत्स्य-वाहिनी योजना में क्या शामिल है?
इसमें इलेक्ट्रिक ऑटोरिक्शा के साथ इको फ्रेंडली मोबाइल फिश वेंडिंग कियोस्क भी शामिल हैं।
नया हब किसानों की कैसे मदद करेगा?
यह किसानों को कृषि से जुड़ी जानकारी और जरूरी सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध कराएगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·5 मिनट पहले

अरुणाचल प्रदेश सरकार की मत्स्य ई-वाहिनी योजना और कृषि सूचना हब का शुभारंभ किसानों की आय बढ़ाने और लॉजिस्टिक्स की अड़चनों को दूर करने की दिशा में एक प्रभावी कदम है। ई-रिक्शा के माध्यम से बिचौलियों पर निर्भरता घटने और दूरदराज के बाजारों तक सीधी पहुंच मिलने से मछली पालकों को उनकी उपज के उचित दाम मिलेंगे। इस तरह की जमीनी पहलें पूर्वोत्तर राज्यों में कृषि और मत्स्य पालन जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक आत्मनिर्भरता और स्थायी विकास को मजबूत करती हैं, जो देश के पर्वतीय इलाकों में आपूर्ति श्रृंखला सुधारने का एक अनुकरणीय मॉडल बन सकती हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 मिनट पहले

अरुणाचल प्रदेश में मत्स्य ई-वाहिनी योजना और किसान हब जैसी बुनियादी पहलें इस बात का उदाहरण हैं कि कैसे लक्षित सरकारी नीतियां पूर्वोत्तर के पर्वतीय भूगोल में लॉजिस्टिक्स की पारंपरिक बाधाओं को भेद सकती हैं। जब सुदूर इलाकों के किसानों को बैटरी चलित परिवहन और सीधे बाजार का विकल्प मिलता है, तो मूल्य श्रृंखला में बिचौलियों का ह्रास तय है। यह शासन मॉडल न केवल राज्य के कृषि और मत्स्य पालन क्षेत्र में स्वरोजगार को गति देगा, बल्कि पर्वतीय अर्थव्यवस्थाओं में टिकाऊ विकास और वित्तीय समावेशन का एक व्यावहारिक खाका भी पेश करता है।

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