अरुणाचल प्रदेश में पुलिस ने एक बड़े अभियान में मानव तस्करी के 38 पीड़ितों को छुड़ाया है, जिनमें 34 बच्चे शामिल हैं, वहीं इस मामले में चार कथित सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
कहां-कहां मिले बच्चे
छुड़ाए गए बच्चों को राज्य के अलग-अलग हिस्सों से ढूंढा गया, जिनमें आलो, मेचुका, पासीघाट, नाहरलगुन, ईटानगर और लोंगडिंग शामिल हैं। इसके अलावा पड़ोसी असम के कुछ हिस्सों में भी बच्चे मिले।
नामसाई से शुरू हुई जांच
इतने बड़े रेस्क्यू अभियान की जड़ें पिछले महीने नामसाई थाने में दर्ज एक मानव तस्करी के मामले में हैं। यही एक मामला आगे चलकर पूरे राज्य में फैली एक बड़ी जांच में बदल गया, जिसमें छह अलग-अलग जगहों के साथ-साथ असम तक पीड़ितों का पता लगाया गया।
जांच की कमान किसके हाथ
इस जांच की अगुवाई नामसाई की डिप्टी एसपी केंगो दिरची कर रही हैं, जबकि पूरी कार्रवाई एसपी संगेय थिनले की निगरानी में चल रही है। पूरे अभियान के दौरान पुलिस टीम ने चाइल्ड वेलफेयर कमेटी और डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट के साथ लगातार तालमेल बनाए रखा।
थिनले के मुताबिक अब तक तस्करी में मदद के शक में चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें सबसे ताजा गिरफ्तारी रूपाली पादुंग की है, जिन पर पीड़ितों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने और गैरकानूनी तरीके से ठिकानों पर पहुंचाने में शामिल होने का शक है, और इस पहलू की अलग से जांच हो रही है।
तस्करी के पूरे नेटवर्क की तलाश
पुलिस अब इस पूरे रैकेट के पीछे के बड़े नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। इसके लिए आरोपियों के बैंक लेन-देन और डिजिटल सबूतों की जांच की जा रही है, साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि इस गिरोह के और कौन-कौन से लोगों से संबंध हैं। इसके साथ ही पुलिस ने बच्चों के माता-पिता, अभिभावकों और उन लोगों से भी पूछताछ शुरू कर दी है जिनके ठिकानों पर कुछ पीड़ितों को कथित तौर पर रखा गया था। अधिकारियों ने बताया कि जांच में मिलने वाले सबूतों के आधार पर आगे और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
छुड़ाए गए बच्चों की देखभाल
थिनले ने बताया कि छुड़ाए गए बच्चों की देखभाल अभी चाइल्ड वेलफेयर कमेटी और डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट के जरिए की जा रही है, जहां उन्हें काउंसलिंग और पुनर्वास से जुड़ी मदद दी जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि जांच जारी रहने के बीच कानूनी प्रावधानों के मुताबिक छुड़ाए गए नाबालिगों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जा रही है।


















