छीनी और हथौड़ी से गढ़ते आस्था के रूप: हैदराबाद की पारंपरिक काष्ठकला में छिपे कड़े जोखिम और भाईचारे की मिसालआवारापन 2 से सिनेमाघरों में छाया इमरान हाशमी का जादू, जानिए भट्ट खानदान से क्या है अभिनेता का खास रिश्तागॉल टेस्ट में यशस्वी जायसवाल ने आईपीएल कॉन्ट्रैक्ट का ताना देकर निरोशन डिकवेला को फंसायाआर्थर रोड जेल में जब राज कुंद्रा ने सुनी शिल्पा शेट्टी से तलाक की अफवाह, आ गए थे जिंदगी खत्म करने के ख्यालअरुणाचल प्रदेश के वालोंग में तितलियों की 85 प्रजातियां दर्ज, जैव विविधता खोज अभियान में दुर्लभ जीव कैमरे में कैदलंदन के मेफेयर में वकील विजय अग्रवाल हिरासत में लिए गए, वर्क परमिट उल्लंघन का लगा आरोपयूक्रेन में युद्ध के बीच चुनाव कराने की उठी मांग, पूर्व रक्षा मंत्री मिखाइलो फेदोरोव ने उठाये सवाल2004 पाकिस्तान दौरे पर कराची टेस्ट कराने की परवेज़ मुशर्रफ की मांग, लालकृष्ण आडवाणी ने क्यों ठुकराई थी?1 महीने के नवजात शिशु के 5 महत्वपूर्ण विकास संकेत और लगातार टकटकी लगाने की वजहभारत को अलविदा कहकर न्यू यॉर्क शिफ्ट हुईं अपूर्वा मखीजा, सोशल मीडिया पर बताई देश छोड़ने की वजह
अरुणाचल प्रदेश ने आईसीएआर से की कीवी अनुसंधान संस्थान और पर्वतीय कृषि के लिए जल्द रोडमैप बनाने की मांगअरुणाचल प्रदेश
19 अग॰ 2026, 11:42 am (2 घंटे पहले)· 3

अरुणाचल प्रदेश ने आईसीएआर से की कीवी अनुसंधान संस्थान और पर्वतीय कृषि के लिए जल्द रोडमैप बनाने की मांग

अरुणाचल प्रदेश के कृषि मंत्री गेब्रियल डी वांगसू ने आईसीएआर से पर्वतीय कृषि रोडमैप में तेजी लाने, 10 नए केवीके स्वीकृत करने और राज्य में सेंट्रल कीवी रिसर्च इंस्टीट्यूट स्थापित करने की मांग की है।

अरुणाचल प्रदेश ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से राज्य के कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए एक विशेष कार्ययोजना में तेजी लाने, कीवी फल के लिए समर्पित संस्थान स्थापित करने और दूरदराज के पहाड़ी इलाकों तक तकनीकी सहायता बढ़ाने का आग्रह किया है। नई दिल्ली में मंगलवार को आयोजित आईसीएआर की 97वीं वार्षिक आम बैठक को संबोधित करते हुए कृषि और बागवानी मंत्री गेब्रियल डी वांगसू ने जोर देकर कहा कि विषम पर्वतीय भौगोलिक स्थिति और बिखरी हुई ग्रामीण आबादी को ध्यान में रखते हुए विशेष वैज्ञानिक समाधान लागू करना आवश्यक है।

समयबद्ध कृषि रोडमैप की तैयारी में तेजी लाने पर जोर

मंत्री ने 30 जून को केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के राज्य दौरे के दौरान हुई विस्तृत चर्चा का संदर्भ दिया। उस बैठक के बाद राज्य के लिए एक व्यापक कृषि विकास खाका तैयार करने की जिम्मेदारी एनईएच रीजन के लिए बने आईसीएआर अनुसंधान परिसर के निदेशक को सौंपी गई थी। गेब्रियल डी वांगसू ने संस्था से इस प्रक्रिया को तेज करने की अपील की और कहा कि यह रोडमैप व्यावहारिक होने के साथ-साथ एक निश्चित समयसीमा के भीतर मापने योग्य परिणाम देने वाला होना चाहिए।

ये भी पढ़ें

देश के 60 प्रतिशत कीवी उत्पादन के लिए समर्पित संस्थान की मांग

बागवानी क्षेत्र के विकास पर बल देते हुए गेब्रियल डी वांगसू ने राज्य में आईसीएआर सेंट्रल कीवी रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना की अपनी पुरानी मांग को दोहराया। इस प्रस्ताव को पहले 96वीं आईसीएआर वार्षिक आम बैठक में भी प्रस्तुत किया गया था। इस फसल के महत्व को रेखांकित करते हुए मंत्री ने बताया कि भारत के कुल कीवी उत्पादन में अरुणाचल प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत है। यह उच्च मूल्य वाली फसल राज्य के समशीतोष्ण क्षेत्रों में रहने वाले किसानों की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बन चुकी है।

कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से जमीनी स्तर तक विस्तार

तकनीकी सहायता और अनुसंधान को किसानों के दरवाजे तक पहुंचाने के लिए मंत्री ने 10 नए कृषि विज्ञान केंद्र स्वीकृत करने का अनुरोध किया। ये केंद्र उन जिलों में स्थापित किए जाएंगे जहां फिलहाल ऐसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। अरुणाचल प्रदेश में वर्तमान में 17 कृषि विज्ञान केंद्र कार्यरत हैं, जबकि 10 अतिरिक्त केंद्रों के प्रस्ताव गुवाहाटी स्थित आईसीएआर-अटारी को पहले ही भेजे जा चुके हैं। वांगसू ने कहा कि कठिन इलाके और बिखरी आबादी के कारण जमीनी स्तर पर तकनीकी मार्गदर्शन देना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जलवायु-अनुकूल और तकनीक-आधारित कृषि अर्थव्यवस्था के निर्माण में आईसीएआर को एक रणनीतिक ज्ञान भागीदार मानती है।

सवाल-जवाब

अरुणाचल प्रदेश समर्पित कीवी अनुसंधान संस्थान की मांग क्यों कर रहा है?
अरुणाचल प्रदेश भारत के कुल कीवी उत्पादन का लगभग 60 प्रतिशत पैदा करता है, इसलिए पैदावार और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए एक विशेष शोध संस्थान की मांग की गई है।
राज्य द्वारा मांगी गई कृषि कार्ययोजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य अरुणाचल प्रदेश के कठिन पर्वतीय इलाकों और बिखरी हुई ग्रामीण आबादी के लिए व्यावहारिक, समयबद्ध और परिणाम-उन्मुख वैज्ञानिक समाधान तैयार करना है।
अरुणाचल प्रदेश के लिए कृषि रोडमैप तैयार करने की जिम्मेदारी किसे दी गई है?
30 जून को हुई बैठकों के बाद एनईएच रीजन के लिए बने आईसीएआर अनुसंधान परिसर के निदेशक को यह कार्ययोजना तैयार करने का दायित्व सौंपा गया था।
अरुणाचल प्रदेश ने आईसीएआर से कितने नए कृषि विज्ञान केंद्रों की मांग की है?
राज्य ने उन जिलों के लिए 10 नए कृषि विज्ञान केंद्रों की स्वीकृति मांगी है जहां अभी यह सुविधा उपलब्ध नहीं है।
वर्तमान में अरुणाचल प्रदेश में कितने कृषि विज्ञान केंद्र कार्यरत हैं?
वर्तमान में अरुणाचल प्रदेश में 17 कृषि विज्ञान केंद्र संचालित हो रहे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR