भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से लगातार 13वीं बार राष्ट्र को संबोधित किया। इस संबोधन में देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और इसे विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में विकसित भारत के निर्माण के लिए एक नई विकास धारा की आवश्यकता पर बल दिया और इसके लिए सप्त सिंधु की सात प्रमुख शक्तियों का खाका देश के सामने रखा।
प्रधानमंत्री के इस आर्थिक एजेंडे में औद्योगिकीकरण, आधारभूत ढांचा, कृषि कल्याण, पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा और वैश्विक व्यापार रणनीतियों का समावेश रहा। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच देश को आत्मनिर्भर बनाने और भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्थापित करने के लिए सरकार ने प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है।
विकसित भारत का विजन और सप्त सिंधु की सात शक्तियां
संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सप्त सिंधु अवधारणा के अंतर्गत सात प्रमुख स्तंभों का उल्लेख किया। ये सात शक्तियां देश के सर्वांगीण विकास को गति देने का कार्य करेंगी। इन प्रमुख शक्तियों में शामिल हैं
- मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर: देश में औद्योगिक उत्पादन की क्षमता को कई गुना बढ़ाना।
- फूड प्रोसेसिंग: कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहन देना।
- टेक्नोलॉजी और इनोवेशन: आधुनिक तकनीक और अनुसंधान के माध्यम से नई राहें खोलना।
- गति-शक्ति: देश भर में निर्बाध और तीव्र कनेक्टिविटी का नेटवर्क तैयार करना।
- डिफेंस प्रोडक्शन: रक्षा निर्माण क्षेत्र में पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल करना।
- ग्रीन इकोनॉमी और ब्लू इकोनॉमी: पर्यावरण संरक्षण और समुद्री संसाधनों का सतत विकास।
- सॉफ्ट पावर: भारत की सांस्कृतिक एवं योग-आयुर्वेद जैसी विरासतों से दुनिया को जोड़ना।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में क्वालिटी, कॉस्ट और स्केल पर फोकस
देश के औद्योगिक परिदृश्य को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए प्रधानमंत्री ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए तीन बुनियादी सिद्धांतों पर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय उद्योगों को कॉस्ट, क्वालिटी और स्केल इन तीन प्रमुख पहलुओं पर विशेष ध्यान देना होगा। उत्पादन लागत को नियंत्रित रखते हुए बड़े पैमाने पर निर्माण क्षमता विकसित करना समय की मांग है।
गुणवत्ता पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि निर्मित वस्तुओं की क्वालिटी से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि यही गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की ब्रांड वैल्यू तय करेगी। वर्ष 2014 से अब तक भारत ने दुनिया के लगभग 40 देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) किए हैं। इन समझौतों के जरिए भारतीय कंपनियों के लिए वैश्विक बाजारों के रास्ते खुल चुके हैं, और देश अपनी आंतरिक क्षमता के बल पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
वैश्विक संकट के बीच किसानों के लिए फर्टिलाइजर सब्सिडी सुरक्षा
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे आर्थिक और राजनीतिक संकटों का जिक्र करते हुए संबोधन में कहा गया कि वैश्विक उतार-चढ़ाव का असर हर देश पर पड़ा है। इसके बावजूद, सरकार ने वैश्विक महंगाई का बोझ देश के किसानों पर नहीं पड़ने दिया है। उर्वरक कीमतों का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने आंकड़े प्रस्तुत किए।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की एक बोरी की कीमत 3,000 रुपये तक पहुंच चुकी है, लेकिन सरकार इसे स्वयं वहन करते हुए भारतीय किसानों को यूरिया की बोरी केवल 300 रुपये में उपलब्ध करा रही है। इसी प्रकार, वैश्विक बाजार में डीएपी (DAP) की कीमत 5,000 रुपये तक हो जाने के बाद भी देश के किसानों को यह केवल 1,250 रुपये में दी जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य कृषि लागत को नियंत्रित रखना और किसानों को आर्थिक राहत पहुंचाना है।
गति-शक्ति इंफ्रास्ट्रक्चर और डिफेंस एक्सपोर्ट में आत्मनिर्भरता
देश के बुनियादी ढांचे के कायाकल्प के लिए गति-शक्ति योजना के तहत हाई-स्पीड कनेक्टिविटी का विस्तार किया जा रहा है। भारत का लक्ष्य एक ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क तैयार करना है जो बिना किसी रुकावट के व्यापार और आवागमन को सुगम बनाए। इसके अंतर्गत देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क, आधुनिक एक्सप्रेसवे और हाईवे, अंतर्देशीय जलमार्ग, नए एयरपोर्ट, मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब और आधुनिक बंदरगाहों का निर्माण तेजी से जारी है। सरकार का जोर पोर्ट-लेड डेवलपमेंट पर है ताकि समुद्री व्यापार को नई दिशा मिल सके।
इसके साथ ही रक्षा क्षेत्र में भारत को न केवल आत्मनिर्भर बनाने बल्कि एक प्रमुख ग्लोबल सप्लायर के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। रक्षा उत्पादन में स्वदेशी तकनीकों को अपनाकर भारत दुनिया के अन्य देशों को सैन्य उपकरणों का निर्यात करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
वैश्विक संसाधनों की वेपनाइजेशन और आत्मनिर्भरता का महत्व
अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया के कई हिस्सों में संसाधनों को हथियार बनाने का खेल खेला जा रहा है। वैश्विक ताकतें अपना प्रभुत्व कायम करने के लिए आवश्यक वस्तुओं पर नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास कर रही हैं। चाहे वह पेट्रोल, डीजल, फर्टिलाइजर, दवाइयां, टेक्नोलॉजी चिप्स हों या फिर जमीन, हर संसाधन का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि पिछले 10 वर्षों में आत्मनिर्भरता का मंत्र अपनाकर सही दिशा में कदम न उठाए गए होते, तो आज देश के सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता था। पिछले दशक में किए गए सुधारों के कारण ही भारत आज ऐसी वैश्विक चुनौतियों का डटकर मुकाबला करने में सक्षम है।
ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी के जरिए टिकाऊ आर्थिक प्रगति
पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के संतुलन को बनाए रखने के लिए ग्रीन इकोनॉमी और ब्लू इकोनॉमी को भविष्य का मुख्य आधार माना गया है। ग्रीन इकोनॉमी के तहत रिन्यूएबल एनर्जी, एनर्जी स्टोरेज टेक्नोलॉजी, ग्रीन स्टोरेज और पर्यावरण-अनुकूल मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों में निवेश व कार्य करने पर जोर दिया गया है।
दूसरी ओर, भारत के पास विस्तृत समुद्री तट रेखा होने के कारण ब्लू इकोनॉमी के क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। ब्लू इकोनॉमी का अर्थ समुद्री एवं तटीय संसाधनों का जिम्मेदारी, समझदारी और सतत रूप से उपयोग करना है। इसका प्राथमिक उद्देश्य समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचाए बिना देश की आर्थिक वृद्धि को गति देना, तटीय क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करना और स्थानीय नागरिकों की आजीविका के स्तर को सुधारना है।
एमएसएमई के लिए ग्लोबल ट्रेड और 6 करोड़ लखपति दीदी का ऐलान
वैश्विक व्यापार समझौतों का लाभ उठाने के लिए प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) का आह्वान किया। लगभग 40 देशों के साथ हुए एफटीए के माध्यम से भारतीय टेक्सटाइल, भारी मशीनरी और फार्मास्युटिकल उत्पादों को विदेशी बाजारों तक पहुंचाने का ऐतिहासिक अवसर मिला है। एमएसएमई सेक्टर को इस मौके का पूरा फायदा उठाते हुए अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चैन का हिस्सा बनना चाहिए।
इसके अलावा, भारत की सॉफ्ट पावर का उल्लेख करते हुए योग, आयुर्वेद, पारंपरिक हस्तशिल्प, सांस्कृतिक धरोहर, सिनेमा, एनिमेशन, गेमिंग और डिजिटल कंटेंट को विदेशी पर्यटकों एवं निवेशकों को आकर्षित करने का प्रमुख जरिया बताया गया। देश में मौजूद 100 से अधिक नेशनल पार्क और डब्ल्यूएवीईएस (WAVES) समिट जैसी पहल भारत की वैश्विक पहचान को मजबूत कर रही हैं।
संबोधन के अंत में लाल किले से महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़ी एक बड़ी घोषणा भी की गई, जिसके तहत देश भर में 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगी।


















