फ्लाईदुबई के एक यात्री विमान में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर हुए जानलेवा हमले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कॉकपिट के भीतर रची गई खतरनाक साजिश की परतें खुलती जा रही हैं। संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई की सुरक्षा एजेंसियां इस समय आरोपी ओमानी को-पायलट हमाम अल-हम्मामी से सघन पूछताछ में जुटी हैं। पूछताछ और प्रारंभिक जांच के जरिए यह स्पष्ट हुआ है कि हमाम काफी समय से इजरायल जाने वाली किसी उड़ान को निशाना बनाने और विमान को क्रैश कराने की फिराक में था। इसी सोची-समझी योजना के तहत उसने उस विमानन कंपनी में नौकरी पाई थी जो तेल अवीव और इजरायल के अन्य गंतव्यों के लिए सीधी सेवाएं संचालित करती है।
कॉकपिट में खूनी संघर्ष और विमान बचाने की जंग
जांच विवरण और कैप्टन स्मित मच्छार के बयानों से उस दिन कॉकपिट में घटे भयानक घटनाक्रम का ब्योरा सामने आया है। उड़ान के दौरान सह-पायलट हमाम अल-हम्मामी नमाज पढ़ने के बहाने अपनी निर्धारित पायलट सीट से उठा। नमाज अदा करने के तुरंत बाद उसने अचानक कॉकपिट में मौजूद आपातकालीन क्रैश एक्स उठा ली और मुख्य पायलट कैप्टन स्मित पर जानलेवा वार कर दिया। इस अचानक हुए बर्बर हमले में भारतीय कैप्टन के सिर पर गंभीर चोटें आईं और काफी खून बहने लगा। हमाम की पूरी कोशिश विमान के नियंत्रण तंत्र पर पूरी तरह काबिज होने और उसे दुर्घटनाग्रस्त करने की थी।
सिर से लगातार बहते खून और असहनीय दर्द के बावजूद कैप्टन स्मित मच्छार ने अपने होश और हौसले को डिगने नहीं दिया। उन्हें भली-भांति अहसास था कि यदि हमलावर को-पायलट विमान के मुख्य कंट्रोल पर हावी हो गया, तो विमान में सवार सभी यात्रियों की जान नहीं बचेगी। बेहद नाजुक हालत में भी उन्होंने कॉकपिट का सुरक्षा दरवाजा खोलने का प्रयास किया। पहली कोशिश में दरवाजा खुला जरूर, लेकिन वह फौरन दोबारा बंद हो गया। कैप्टन स्मित ने हार नहीं मानी और दूसरी बार पूरी ताकत लगाकर दरवाजा खोला। इस बार दरवाजा खुला रहा, जिससे बाहर मौजूद सतर्क यात्रियों को भीतर की भयावह स्थिति का पता चला। यात्रियों ने तुरंत कॉकपिट में घुसकर हमलावर को-पायलट को दबोच लिया और उसे काबू में कर लिया। इसके तुरंत बाद विमान को सुरक्षित रूप से नजदीकी हवाई अड्डे की ओर डायवर्ट कर सुरक्षित उतारा गया, जिससे सैकड़ों जिंदगियां बच गईं।
जांच एजेंसियों के सामने सुरक्षा और अतीत से जुड़े अहम सवाल
यूएई की जांच एजेंसियां अब इस बात की तह तक जाने में लगी हैं कि हमाम अल-हम्मामी ने इस साजिश की योजना कब बनाई थी। पूछताछ में यह तथ्य भी सामने आया है कि उसने पूर्व में भी इसी तरह विमान को दुर्घटनाग्रस्त कराने की कोशिश की थी, जिसमें वह सफल नहीं हो सका था। जांचकर्ता यह पड़ताल कर रहे हैं कि क्या इस पूरी साजिश के पीछे कोई संगठित तंत्र या अन्य सहयोगी भी शामिल थे। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा प्रोटोकॉल पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं कि कड़ी सुरक्षा जांच और बैकग्राउंड वेरिफिकेशन के बावजूद एक संदिग्ध मानसिकता वाले व्यक्ति को संवेदनशील कॉकपिट तक पहुंचने और उड़ान संचालित करने की मंजूरी कैसे मिलती रही।
मेलबर्न और आरएमआईटी यूनिवर्सिटी का पुराना कनेक्शन
इस साजिश के अंतरराष्ट्रीय तारों की पड़ताल करते हुए जांच एजेंसियां हमाम के ऑस्ट्रेलियाई अतीत को भी खंगाल रही हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, लगभग एक दशक पहले वह ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में रह रहा था, जहां उसने पढ़ाई की थी। वह वहां आरएमआईटी यूनिवर्सिटी से जुड़ा हुआ था। ऑस्ट्रेलियाई जांच एजेंसियां अब मेलबर्न में उसके तत्कालीन संपर्कों, दोस्तों, सोशल गतिविधियों और संभावित कट्टरपंथी संपर्कों का पूरा रिकॉर्ड जुटा रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसके भीतर इस तरह की चरमपंथी सोच की शुरुआत कब और कहां से हुई थी।
इजरायल में भारतीय कैप्टन का सम्मान और राजकीय न्योता
कैप्टन स्मित मच्छार के इस असाधारण पराक्रम की गूंज वैश्विक स्तर पर सुनाई दे रही है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने खुद कैप्टन स्मित से सीधे फोन पर बातचीत की। बातचीत के दौरान नेतन्याहू ने उनके शौर्य के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया और उन्हें इजरायल आने का औपचारिक निमंत्रण दिया। इजरायली प्रधानमंत्री चाहते हैं कि कैप्टन स्मित इजरायल के आगामी स्वतंत्रता दिवस समारोह में एक विशेष अतिथि के रूप में शामिल हों और इस ऐतिहासिक अवसर पर पारंपरिक मशाल प्रज्वलित करें। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस गरिमामय समारोह में शिरकत करने का न्योता दिया गया है।
इजरायल के आम नागरिकों के बीच भी भारतीय कैप्टन के प्रति जबर्दस्त सम्मान देखा जा रहा है। वहां की सड़कों और प्रमुख चौराहों पर हिंदी भाषा में बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए हैं, जिन पर 'धन्यवाद नायक' लिखा हुआ है। इजरायल में बसे भारतीय समुदाय ने भी कैप्टन स्मित के सम्मान में विशेष प्रार्थना सभाओं और कार्यक्रमों का आयोजन किया है, जिसमें उनके पूर्ण और शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की गई है।
राजनयिकों की सराहना और भारतीय नेतृत्व से संवाद
भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने कैप्टन स्मित के अदम्य साहस की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। उन्होंने रेखांकित किया कि कैप्टन स्मित ने न केवल यात्रियों और विमान दल की जान बचाई, बल्कि वैश्विक विमानन सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद संभावित कमियों और गंभीर खामियों की ओर भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचा है। वहीं दूसरी ओर, यूएई में इजरायल के राजदूत योसी अब्राहम शेली ने अस्पताल पहुंचकर उपचाराधीन कैप्टन स्मित से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की। उन्होंने भारतीय पायलट को सच्चा नायक करार देते हुए उनके जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की।
कैप्टन स्मित मच्छार ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी बातचीत की है। इस संवाद के दौरान उन्होंने कॉकपिट के भीतर लड़े गए उस खूनी संघर्ष, अपनी शारीरिक स्थिति और विमान को बचाने के लिए किए गए तमाम प्रयासों की विस्तार से जानकारी दी। सिर में गंभीर चोट लगने के बाद भी जिस तरह उन्होंने सूझबूझ से दरवाजा खोलकर यात्रियों को मदद के लिए अंदर आने का रास्ता दिया, उसकी चौतरफा सराहना की जा रही है।
कठिन घड़ी में आध्यात्मिक संबल और हनुमान चालीसा का पाठ
इस पूरे खौफनाक मंजर के बीच कैप्टन स्मित ने अपने व्यक्तिगत अनुभव को साझा करते हुए बताया कि जब वह कॉकपिट में खून से लथपथ थे और हमलावर उन पर हावी होने की कोशिश कर रहा था, तब उन्होंने भगवान हनुमान को याद किया। उन्होंने संकट के उन पलों में मन ही मन हनुमान चालीसा का पाठ किया। कैप्टन के अनुसार, उस बेहद नाजुक और जानलेवा स्थिति में इसी आध्यात्मिक विश्वास और आस्था ने उन्हें असाधारण मानसिक शक्ति और जूझने का साहस प्रदान किया। कैप्टन के इस बयान की चर्चा भारत भर में सोशल मीडिया और आम जनमानस के बीच व्यापक स्तर पर हो रही है।



















