पारंपरिक खेती के साथ-साथ अब आम के बगीचे तैयार करना किसानों के लिए लाभ का एक बड़ा माध्यम बन रहा है। खासकर भागलपुर और आसपास के इलाकों में किसान बागवानी की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। मौजूदा मौसम में लगाए गए आम के नए पौधों की जड़ें मिट्टी में अच्छी तरह जम जाती हैं। इसके बाद जैसे ही मार्च का महीना शुरू होता है और तापमान में बढ़ोतरी होती है, पौधों का विकास और वानस्पतिक बढ़वार काफी तेज हो जाती है। आम की सफल खेती के लिए सबसे बुनियादी और अहम कदम उपयुक्त किस्म का चयन करना होता है। जर्दालू, हेम सागर अथवा मालदा जैसी उन्नत किस्में सही समय पर बाजार पहुंचकर किसानों को बेहतरीन रिटर्न दे सकती हैं।
अनुकूल मौसम में पौधारोपण से मिलता है सीधा फायदा
बिहार में मैंगो मैन के रूप में पहचान बना चुके विशेषज्ञ अशोक चौधरी के अनुसार, इस समय नए बगीचे लगाना उत्पादकों के लिए व्यावहारिक रूप से काफी मुफीद रहता है। अनुकूल मौसमी परिस्थितियों के चलते नए रोपे गए पौधे तेजी से जमीन पकड़ लेते हैं। इसके बाद मार्च के दौरान मौसम बदलते ही उनकी शाखाओं और तनों में तीव्र वृद्धि देखी जाती है। बागवानी को सफल बनाने के लिए केवल पौधा रोप देना भर काफी नहीं होता। किसानों को खेत की मिट्टी की जांच करवानी चाहिए, पौधों के बीच तय दूरी रखनी चाहिए, और सिंचाई के साथ संतुलित खाद की व्यवस्था करनी चाहिए। हर किस्म की कीमत और मांग मंडियों में अलग होती है, इसलिए किस्म के चुनाव में दूरदर्शिता बरतना आवश्यक है।
भागलपुर की शान जर्दालू आम और उसका बाजार मूल्य
भागलपुर क्षेत्र की पहचान हमेशा से जर्दालू आम से जुड़ी रही है। जिले भर में किसान बड़े पैमाने पर इस खास किस्म के बगीचे विकसित कर रहे हैं। जर्दालू आम अपनी बेजोड़ खुशबू, मिठास और सुपाच्य प्रकृति के चलते ग्राहकों के बीच विशेष रूप से पसंद किया जाता है। अशोक चौधरी के मुताबिक, मंडियों में जर्दालू की सामान्य बिक्री दर ₹60 से ₹80 प्रति किलो तक देखने को मिलती है। हालांकि, यह बिक्री मूल्य फसल के मौसम, फलों की गुणवत्ता और स्थानीय मंडियों में आपूर्ति एवं मांग के रुख पर भी निर्भर करता है।
हेम सागर और मालदा के जरिए बाजार में कमाई के विकल्प
यदि किसान जर्दालू के अलावा अन्य विकल्प तलाशना चाहते हैं, तो हेम सागर एक बेहतरीन प्रजाति साबित हो सकती है। हेम सागर एक ऐसी किस्म है जो अपेक्षाकृत देर से पककर तैयार होती है। बाजार में जब आम की शुरुआती किस्में समाप्त होने लगती हैं, तब हेम सागर की आवक होती है, जिससे उत्पादकों को इसका अतिरिक्त प्रीमियम मूल्य मिलने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं मालदा आम भी किसानों के लिए अत्यधिक मुनाफे वाला विकल्प है। अपने रसीले गूदे और विशिष्ट स्वाद के कारण मालदा की मांग बिहार के साथ-साथ देश के दूसरे राज्यों में भी भरपूर रहती है।
किस्म के साथ बागवानी प्रबंधन का भी रखें ध्यान
आम के बगीचे से बंपर उत्पादन हासिल करने के लिए केवल किस्म का चयन ही एकमात्र पैमाना नहीं है। किसानों को संपूर्ण प्रबंधन पर ध्यान देना जरूरी है। इसमें खेत में उचित जल निकासी का प्रबंध, पंक्तियों और पौधों के बीच पर्याप्त दूरी, समयानुकूल सिंचाई चक्र, जैविक व रासायनिक उर्वरकों का संतुलित प्रयोग, रोगों तथा कीटों से बचाव और नियमित छंटाई शामिल हैं। इन सभी वैज्ञानिक उपायों को अमल में लाकर ही किसान अपनी फसल की गुणवत्ता सुधार सकते हैं और अधिकतम लाभ अर्जित कर सकते हैं।





















