पाकिस्तान की सियासत में एक बार फिर भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है, जहाँ पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की जेल से रिहाई की मांग को लेकर उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने राजधानी का रुख कर लिया है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ का यह विशाल लॉन्ग मार्च धीरे-धीरे इस्लामाबाद की तरफ कदम बढ़ा रहा है। इस विरोध प्रदर्शन की कमान खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सुहैल आफरीदी के हाथों में है, जिनके नेतृत्व में हजारों समर्थक सड़कों पर उतर आए हैं। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री पहले ही यह साफ कर चुके हैं कि उनके सूबे में केवल इमरान खान की नीतियां ही लागू रहेंगी। समर्थकों के इस लगातार बढ़ते रेले ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के प्रशासनिक तंत्र के लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है, क्योंकि रास्ते में जैसे-जैसे यह काफिला आगे निकल रहा है, इसमें शामिल लोगों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है।
प्रशासन का कड़ा पहरा और धरपकड़ का अभियान
राजधानी की तरफ बढ़ते इस जनसैलाब को थामने के लिए शहबाज शरीफ की हुकूमत ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। पूरे प्रशासनिक अमले को अलर्ट पर रखा गया है और मार्च को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। तहरीक-ए-इंसाफ के वरिष्ठ नेताओं और उनके नजदीकी सहयोगियों के अलग-अलग ठिकानों पर पुलिस लगातार छापे मार रही है। कई प्रमुख नेताओं को हिरासत में भी ले लिया गया है, लेकिन इन प्रशासनिक बंदिशों के बावजूद मार्च में शामिल इमरान समर्थकों के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। आंदोलन की अगुवाई कर रहे सुहैल आफरीदी ने समर्थकों का आह्वान करते हुए कहा कि उनकी रणनीति बेहद व्यापक है, इसलिए हर किसी को तैयार रहना होगा क्योंकि यह जंग बहुत बड़ी होने वाली है।
रक्षा मंत्री ने टीटीपी से जोड़ा आंदोलन का तार
पीटीआई समर्थकों के इस तेवर से सत्ताधारी गठबंधन में बेचैनी साफ नजर आ रही है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस मार्च पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि हुकूमत बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन जेल में बंद नेता के समर्थक वार्ता की आड़ में सत्ता को ब्लैकमेल करने की कोशिश में जुटे हैं। रक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि आंदोलनकारी मुल्क को दोबारा बंधक जैसी स्थिति में धकेलना चाहते हैं। ख्वाजा आसिफ ने गंभीर आरोप मढ़ते हुए पीटीआई का संबंध प्रतिबंधित आतंकी संगठन टीटीपी से जोड़ दिया। उनका दावा है कि इन दोनों का साझा मकसद मुल्क को अस्थिर करना और पूरे देश को अशांति तथा जंग की आग में झोंकना है।
दबाव और बंदूक की नोक पर मांगें मानने से इनकार
इस्लामाबाद की ओर बढ़ रहे इस विशाल मार्च ने पाकिस्तान के राजनीतिक माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है। शहबाज सरकार ने आंदोलनकारियों के सामने किसी भी तरह झुकने से साफ मना कर दिया है। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया है कि सरकार किसी किस्म के दबाव में आकर कोई रियायत नहीं देगी। उन्होंने कहा कि तहरीक-ए-इंसाफ को यह मुगालता अपने दिमाग से निकाल देना चाहिए कि वह बंदूक की नोक पर अपनी शर्तें मनवा सकती है। हुकूमत किसी भी गैर-संवैधानिक दबाव के आगे घुटने टेकने को तैयार नहीं है।
बार-बार मार्च निकालने पर ख्वाजा आसिफ का तंज
विपक्षी दल को नसीहत देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि पीटीआई के नेतृत्व को सड़कों का टकराव छोड़कर बातचीत की मेज पर लौटना चाहिए और अपने घरों को वापस जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी अगर यह सोचती है कि हर बार लॉन्ग मार्च निकालकर वह हुकूमत को मजबूर कर देगी, तो सरकार किसी भी सूरत में ऐसी ब्लैकमेलिंग बर्दाश्त नहीं करेगी। ख्वाजा आसिफ ने यह भी कहा कि पीटीआई के लिए हर दो से तीन महीने के भीतर इस्लामाबाद की तरफ मार्च निकालना अब एक तरह का दस्तूर या परंपरा बन चुकी है, जिससे आम व्यवस्था लगातार प्रभावित होती है।
इमरान खान के चचेरे भाई पर प्रशासनिक शिकंजा
आंदोलन को कमजोर करने के लिए सरकारी मशीनरी ने कानूनी शिकंजा और तेज कर दिया है। इसी कड़ी में इमरान खान के चचेरे भाई कासिम जमान को एमपीओ यानी मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर कानून के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके अलावा राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के मकसद से पीटीआई के प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं की धरपकड़ के लिए बड़े पैमाने पर पुलिसिया कार्रवाई जारी है, ताकि इस मार्च को इस्लामाबाद की सीमा में दाखिल होने से पहले ही रोका जा सके।


















