फारस की खाड़ी के भीतरी समुद्री मार्ग में एक वाणिज्यिक तेल और रासायनिक टैंकर पर अचानक दागे गए कई प्रोजेक्टाइल टकराने से गंभीर नुकसान पहुंचा है और कई नाविक हताहत हुए हैं। यह सनसनीखेज हमला कतर के उत्तरी तटवर्ती इलाके में हुआ, जिसने खाड़ी के जलक्षेत्र में वाणिज्यिक पोतों की आवाजाही को लेकर एक बार फिर भीषण खतरे की घंटी बजा दी है। समुद्री सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियों के अनुसार, यह घटना मदीनत अल-शमाल से लगभग 51 समुद्री मील यानी करीब 94 किलोमीटर की दूरी पर घटी। खाड़ी के इतने पश्चिमी और भीतरी इलाके में किसी व्यापारिक जहाज को निशाना बनाए जाने की यह एक दुर्लभ और अप्रत्याशित घटना मानी जा रही है।
हमले का शिकार बने जहाज और घटनाक्रम का ब्योरा
समुद्री खुफिया विश्लेषण से जुड़ी फर्म वैनगार्ड के अनुसार, जिस जहाज पर यह हमला हुआ उसकी पहचान एंटीगुआ और बारबुडा के ध्वज वाले तेल और रासायनिक टैंकर एसर्स के रूप में की गई है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, शनिवार को यह जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य की तरफ आगे बढ़ रहा था। यह संकरा जलमार्ग फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा व्यापार की जीवनरेखा माना जाता है।
ब्रिटेन की समुद्री व्यापार संचालन एजेंसी यानी यूकेएमटीओ ने पुष्टि की है कि जहाज पर एक साथ कई अज्ञात प्रोजेक्टाइल आकर लगे। इस हमले में जहाज के भीतर मौजूद कर्मियों के हताहत होने की खबर है। हालांकि अभी तक हताहतों की सटीक संख्या और उनकी चोटों की स्थिति का पूरा ब्योरा सामने नहीं आ पाया है, लेकिन इस घटना ने पूरे समुद्री उद्योग को सकते में डाल दिया है।
होर्मुज के पश्चिमी जलक्षेत्र में महीनों बाद दुर्लभ हमला
ईओएस रिस्क ग्रुप के सलाहकार प्रमुख मार्टिन केली के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के इतने पश्चिम में किसी व्यापारिक जहाज पर हुआ यह हमला 9 सितंबर के बाद की पहली घटना है। 9 सितंबर को पनामा के ध्वज वाले टैंकर एल गैया पर होर्मुज जलडमरूमध्य में ओमान के मुसैंडम प्रायद्वीप के ठीक उत्तर में घातक हमला किया गया था, जिसमें दो नाविकों की जान चली गई थी।
संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) के आंकड़ों से पता चलता है कि 9 सितंबर की उस त्रासदी के बाद से यह पहला ऐसा हमला है जिसमें फिर से नाविक हताहत हुए हैं। आईएमओ के दस्तावेजों के अनुसार, फरवरी के महीने में ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल के युद्ध की शुरुआत होने के बाद से अब तक इस पूरे क्षेत्र में कम से कम 24 नाविक अपनी जान गंवा चुके हैं। इस संघर्ष के दौरान अब तक 93 ऐसे पुष्ट मामले दर्ज किए जा चुके हैं जिनमें व्यापारिक जहाजों को सीधा निशाना बनाया गया है।
ओमान की खाड़ी में दूसरे जहाज को लेकर भ्रम की स्थिति सुलझी
इस ताजा हमले के समानांतर गुरुवार को ओमान की खाड़ी से भी एक अन्य पोत के संबंध में भ्रामक सूचनाएं सामने आई थीं। संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह से लगभग 40 किलोमीटर पूर्व में एक टैंकर में आग लगने का दावा किया गया था। इस पोत की पहचान मार्शल आइलैंड्स के ध्वज वाले ढलकुट के रूप में की गई थी।
हालांकि, समुद्री ट्रैकिंग फर्म वैनगार्ड ने अपनी पिछली रिपोर्ट में तुरंत सुधार करते हुए स्थिति को साफ किया। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि जहाज ढलकुट पर आग लगने या किसी हमले के कोई संकेत नहीं मिले हैं और पहले दी गई सूचना पूरी तरह निराधार थी। इसके बावजूद, इस तरह की अपुष्ट खबरों ने भी क्षेत्र में फैले भारी तनाव और भय के माहौल को उजागर कर दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी और शांति समझौते की नाकामी
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे संवेदनशील ऊर्जा चोकपॉइंट है, जहां से सामान्य दिनों में पूरी दुनिया की कुल तेल और गैस आपूर्ति का पांचवां हिस्सा गुजरता है। फरवरी में युद्ध भड़कने के बाद से यह जलमार्ग लगभग ठप पड़ गया था। इसका मुख्य कारण तेहरान द्वारा व्यापारिक जहाजों पर लगातार किए जा रहे ड्रोन और मिसाइल हमले तथा इसके जवाब में अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों की की गई सख्त समुद्री नाकेबंदी थी।
हालांकि जून के महीने में तनाव घटाने की एक बड़ी कूटनीतिक कोशिश हुई थी। उस समय अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से सुचारू रूप से खोलने को लेकर एक प्रारंभिक समझौता हुआ था। लेकिन यह सहमति चंद हफ्तों से ज्यादा नहीं टिक सकी। व्यापारिक जहाजों पर ईरानी हमलों का सिलसिला दोबारा शुरू होते ही समझौता पूरी तरह टूट गया, जिसके चलते अमेरिका को भी अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को फिर से लागू करना पड़ा।
वैकल्पिक समुद्री मार्गों पर नियंत्रण की जंग और अमेरिकी सुरक्षा
ईरान लगातार इस बात पर अड़ा रहा है कि वह इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अपना प्रभाव और नियंत्रण किसी भी कीमत पर कम नहीं होने देगा। रणनीतिक रूप से, तेहरान ने उन जहाजों को विशेष रूप से निशाना बनाना शुरू कर दिया जो ओमान के क्षेत्रीय जल से होकर गुजरने वाले दक्षिणी मार्ग का इस्तेमाल कर रहे थे। व्यापारिक जहाज ईरानी जलक्षेत्र से बचने के लिए इस वैकल्पिक मार्ग का सहारा ले रहे थे, लेकिन ईरान ने उन पर भी हमले तेज कर दिए।
फारस की खाड़ी के अरब देशों से कच्चे तेल के निर्यात को पूरी तरह ठप होने से बचाने के लिए अमेरिकी सेना ने खुद आगे आकर सुरक्षा कवच प्रदान करना शुरू किया है। अमेरिकी युद्धपोत और सैन्य इकाइयां होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की ढुलाई करने वाले टैंकरों को सुरक्षा एस्कॉर्ट दे रही हैं। शिपिंग डेटा कंपनी केपलर के विश्लेषकों के आंकड़ों के अनुसार, बीते दो हफ्तों के दौरान इस जलमार्ग से कच्चे तेल का निर्यात औसतन 1.2 करोड़ बैरल प्रतिदिन रहा है। यह स्तर युद्ध शुरू होने से पहले की सामान्य आपूर्ति का लगभग 80 प्रतिशत है। लेकिन कतर के करीब हुआ यह ताजा हमला दिखाता है कि सुरक्षा घेरे के बावजूद खाड़ी का पूरा इलाका अभी भी बारूद के ढेर पर बैठा है।


















