मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) के संस्थापक और प्रमुख अल्ताफ हुसैन ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में अपने बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे निहत्थे नागरिकों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की हिंसक कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है। बेगुनाह लोगों की मौत और बड़ी संख्या में नागरिकों के घायल होने पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्होंने पाकिस्तान सरकार और पुलिस-प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अल्ताफ हुसैन के अनुसार, अपने हक के लिए आवाज उठा रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर सेना और पुलिस ने अंधाधुंध गोलियां बरसाईं, जिससे पूरे क्षेत्र में स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है।
अत्याचार और अस्पतालों पर कब्जे के गंभीर आरोप
सोशल मीडिया के जरिए आयोजित एक आपातकालीन बैठक को संबोधित करते हुए अल्ताफ हुसैन ने कहा कि कश्मीरी नागरिक कई दिनों से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बुनियादी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। हालांकि, उनकी न्यायसंगत मांगों को सुनने और उनका समाधान निकालने के बजाय पाकिस्तान सरकार ने बल प्रयोग का रास्ता चुना। उन्होंने कहा कि कश्मीरियों का खून बहुत बेरहमी से बहाया गया है और पाकिस्तान प्रशासन ने दमन की सभी सीमाएं लांघ दी हैं, जिसके चलते सैकड़ों लोग मारे गए हैं या गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
एमक्यूएम नेता ने बताया कि जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के आह्वान पर रावलाकोट, मीरपुर और आसपास के अन्य शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए थे। इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों ने सीधी गोलीबारी की। उन्होंने दावा किया कि शहरों की सड़कों पर कई घंटों तक शव और घायल पड़े रहे, जबकि सुरक्षा बल कई शवों और घायल नागरिकों को अपने साथ उठाकर ले गए। इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा बलों ने स्थानीय अस्पतालों पर कब्जा कर लिया, ताकि घायल प्रदर्शनकारियों को समय पर चिकित्सकीय उपचार न मिल सके।
लंदन से संबोधन, निर्वासन का इतिहास और भावनात्मक अपील
अल्ताफ हुसैन ने कहा कि सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया पर सामने आ रही तस्वीरें तथा वीडियो देखकर कोई भी संवेदनशील इंसान सिहर उठेगा। उन्होंने पाकिस्तानी अधिकारियों से तत्काल प्रभाव से बेगुनाह लोगों का खून बहाना बंद करने, अत्याचारों पर रोक लगाने और कश्मीरियों को उनके वास्तविक अधिकार प्रदान करने की गुजारिश की। इसके साथ ही, उन्होंने हिंसा में जान गवाने वाले नागरिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि इस कठिन समय में एमक्यूएम उनके साथ खड़ी है।
उल्लेखनीय है कि अल्ताफ हुसैन अपनी जान के खतरे और पाकिस्तानी सेना व सरकार के लगातार हो रहे दमन के कारण वर्ष 1992 में देश छोड़कर लंदन चले गए थे और तब से वहीं राजनीतिक निर्वासन में जीवन बिता रहे हैं। इससे पूर्व, उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चित हुआ था, जिसमें वे प्रसिद्ध शायर अल्लामा इकबाल द्वारा रचित गीत 'सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा' गाते हुए दिखाई दिए थे।
79 वर्षों के शोषण और मीडिया पर पाबंदी का मुद्दा
पाकिस्तान के नीति-निर्धारकों और सरकारी तंत्र पर सीधा हमला बोलते हुए अल्ताफ हुसैन ने कहा कि पिछले 79 वर्षों के दौरान कश्मीर के नाम पर पूरी दुनिया से अरबों और खरबों डॉलर जुटाए गए। आम जनता को 'कश्मीर बनेगा पाकिस्तान' जैसे खोखले नारों के जरिए गुमराह किया गया, लेकिन आज जब वहां के नागरिक अपने बुनियादी अधिकारों का हिसाब मांग रहे हैं, तो उन्हें संवाद के बजाय गोलियों से जवाब दिया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बेगुनाह लोगों का खून बहाकर किसी मुल्क को एकजुट रखा जा सकता है या फिर बंदूक के बल पर जनभावनाओं को दबाया जा सकता है?
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान सरकार ने देश के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर सख्त सेंसरशिप लागू कर दी है। समाचार चैनलों को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं कि वे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की वास्तविक घटनाओं और जमीनी हालातों का प्रसारण न करें, ताकि दुनिया के सामने पाकिस्तानी बलों की इस कार्रवाई का सच उजागर न हो सके।
वार्ता में विफलता, मुजफ्फराबाद मार्च और मौतों के आंकड़े
क्षेत्र में फैला यह आंदोलन उस समय और अधिक उग्र हो गया जब सरकार और जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत बेनतीजा साबित हुई। जेएएसी ने सरकार को 27 जुलाई की दोपहर 1 बजे तक अपनी मांगें स्वीकार करते हुए आधिकारिक आदेश जारी करने का अल्टीमेटम दिया था। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि समय रहते प्रशासनिक आदेश जारी नहीं किए गए, तो हजारों की संख्या में लोग रावलाकोट से मुजफ्फराबाद तक विरोध मार्च निकालेंगे।
जब सरकार की ओर से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो हजारों प्रदर्शनकारी रावलाकोट में एकत्र हुए और मुजफ्फराबाद की ओर बढ़ना शुरू कर दिया। इसके बाद सुरक्षा बलों ने मार्च को रोकने के लिए हिंसक कार्रवाई की और अंधाधुंध गोलीबारी की। जेएएसी के दावों के अनुसार, 5 जून से 28 जुलाई के बीच सरकारी कार्रवाई और झड़पों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 67 तक पहुंच गई है। वहीं, विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में पुष्टि की गई है कि इस हिंसा में 30 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।



















