पाकिस्तान में एक 18 वर्षीय ईसाई युवती के कथित अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन के मामले ने अंतरराष्ट्रीय तूल पकड़ लिया है। अमेरिकी संसद के 11 सदस्यों के एक सर्वदलीय समूह ने पाकिस्तान सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और पीड़िता के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने की अपील की है। अमेरिकी सांसद क्रिस स्मिथ के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों ने इस संबंध में पाकिस्तान के संघीय कानून एवं न्याय मंत्री आजम नजीर तरार को एक आधिकारिक पत्र सौंपा है, जिसमें युवती की सुरक्षा और उसकी स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की गई है।
लाहौर के मदरसे में मिली थी सिलाई सीखने गई युवती
पीड़ित युवती की पहचान 18 वर्षीय नेहा फकीर के रूप में हुई है। वह इस साल 24 मार्च को अपने घर से सिलाई का काम सीखने के लिए निकली थी, लेकिन इसके बाद वापस नहीं लौटी। परिजनों द्वारा काफी तलाश किए जाने के बावजूद जब उसका कोई सुराग नहीं मिला, तो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन 'क्रिश्चियन सॉलिडैरिटी इंटरनेशनल' ने 10 जून को इस मामले को वैश्विक पटल पर उजागर किया। बाद में पता चला कि नेहा लाहौर स्थित एक मदरसे में मौजूद है। आरोप है कि वहां उसका अपहरण कर दबाव में धर्म परिवर्तन कराया गया और उसे इस्लाम स्वीकार करने पर मजबूर किया गया।
अदालत से अर्जी खारिज होने के बाद बढ़ा तनाव
नेहा के परिजनों ने अपनी बेटी को वापस पाने और उसे सुरक्षित घर लाने के लिए पाकिस्तान की स्थानीय अदालत में कानूनी याचिका दायर की थी। हालांकि, अदालत ने परिजनों की मांग को खारिज कर दिया, जिससे पीड़ित परिवार की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा। अदालत के इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मामले को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। अमेरिकी सांसद क्रिस स्मिथ ने स्पष्ट किया कि जिस प्रकार की परिस्थितियों में नेहा गायब हुई और फिर उसका धर्मांतरण हुआ, वे घटनाएं उसकी व्यक्तिगत सुरक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता और बिना किसी भय अथवा दबाव के अपने अधिकारों का उपयोग करने की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
पाक कानून मंत्री से अमेरिकी सांसदों की सीधी मांग
क्रिस स्मिथ के साथ अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के 10 अन्य सांसदों ने पाकिस्तान के संघीय कानून एवं न्याय मंत्री आजम नजीर तरार को भेजे संयुक्त पत्र में मामले के निष्पक्ष और उचित समाधान पर जोर दिया है। दोनों प्रमुख अमेरिकी राजनीतिक दलों के इन सांसदों ने मांग की है कि पाकिस्तान की न्यायिक व्यवस्था के तहत ऐसे प्रभावी कदम उठाए जाएं, जिससे नेहा फकीर को पूरी सुरक्षा मिल सके। इसके साथ ही, सांसदों ने शर्त रखी है कि नेहा को किसी भी बाहरी दबाव से दूर एक स्वतंत्र कानूनी सलाहकार से गोपनीय रूप से परामर्श करने की कानूनी सुविधा प्रदान की जानी चाहिए।
संवैधानिक प्रावधानों और धरातल की विषमता पर सवाल
अमेरिकी प्रतिनिधियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि पाकिस्तानी अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि नेहा अपने परिवार के सदस्यों से बिना किसी निगरानी या बंदिश के निजी तौर पर बातचीत कर सके। सांसद क्रिस स्मिथ ने इस बात का उल्लेख किया कि यद्यपि पाकिस्तान का संविधान अपने सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता और कानून के समक्ष बराबरी की गारंटी देता है, लेकिन जब कोई युवा महिला भयमुक्त माहौल में अपनी बात नहीं रख सकती, तो इन संवैधानिक अधिकारों का वास्तविक महत्व खत्म हो जाता है। उन्होंने कहा कि यह मामला पाकिस्तान में रह रहे धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है, जिन्हें आए दिन अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और दबाव में होने वाले विवाह जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।


















