थाईलैंड की राजकुमारी बज्रकितियाभा का 47 की उम्र में निधन, तीन साल कोमा में रहीं; भारत ने जताया शोकएशिया
19 घंटे पहले· 1

थाईलैंड की राजकुमारी बज्रकितियाभा का 47 की उम्र में निधन, तीन साल कोमा में रहीं; भारत ने जताया शोक

तीन साल से कोमा में रहीं थाईलैंड की राजकुमारी बज्रकितियाभा नरेन्द्रदेब्यावती का 47 वर्ष की आयु में निधन हो गया। भारत ने थाई शाही परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि पब्लिक सर्विस और कूटनीति में उनका योगदान याद रखा जाएगा।

बैंकॉक: थाईलैंड की राजकुमारी बज्रकितियाभा नरेन्द्रदेब्यावती ने 47 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। बीते 3 साल से वह कोमा में थीं और एक लंबे अरसे से गंभीर बीमारी का सामना कर रही थीं। उनके निधन से भारत भी शोक में डूबा है। बैंकॉक में मौजूद भारतीय दूतावास ने थाई राजपरिवार और वहां की जनता के प्रति गहरी संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि इस कठिन समय में भारत की भावनाएं थाईलैंड के राजा, शाही परिवार और समूचे देश के साथ खड़ी हैं। दूतावास ने यह भी जोड़ा कि लोक सेवा और कूटनीति के क्षेत्र में राजकुमारी ने जो कुछ किया, उसे हमेशा स्मरण किया जाता रहेगा।

राजकुमारी ने 11 जून 2026 को ली अंतिम सांस

थाईलैंड के सरकारी जनसंपर्क विभाग और प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी राजकुमारी के निधन की आधिकारिक पुष्टि की। थाई सरकार ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक संदेश साझा करते हुए बताया कि राजा महा वजिरालोंगकोर्न की सबसे बड़ी बेटी राजकुमारी बज्रकितियाभा ने 11 जून 2026 को अपनी आखिरी सांस ली। सरकार ने कहा कि राष्ट्र के प्रति उनकी जीवनभर की सेवा और समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणास्रोत बना रहेगा। शाही गृह ब्यूरो के अनुसार, राजकुमारी ने गुरुवार शाम बैंकॉक के किंग चुलालोंगकोर्न मेमोरियल अस्पताल में दम तोड़ा, जहां उनका इलाज लगातार जारी था।

ट्रेनिंग के दौरान अचानक गिर पड़ी थीं राजकुमारी

ब्यूरो ने जानकारी दी कि चिकित्सकों की कड़ी निगरानी और सतत उपचार के बावजूद उन्होंने शाम 7 बजकर 48 मिनट पर शांतिपूर्वक अंतिम सांस ली। राजकुमारी को 15 दिसंबर 2022 को अस्पताल में दाखिल कराया गया था। उस वक्त वह नाखोन राचासीमा प्रांत के पाक चोंग जिले में अपने पालतू कुत्ते के साथ ट्रेनिंग कर रही थीं, तभी दिल से जुड़ी एक तकलीफ की वजह से अचानक जमीन पर गिर पड़ीं। इसके बाद उनकी सेहत लगातार बिगड़ती चली गई। आधिकारिक ब्योरे के मुताबिक, बड़ी आंत में सूजन की वजह से उनके पेट में गंभीर संक्रमण फैल गया था, जिसने शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर दिया।

पिछले कुछ दिनों में और बिगड़ती गई तबीयत

इस संक्रमण के चलते उनका रक्तचाप बहुत नीचे चला गया, दिल की धड़कन अनियमित हो गई और खून के थक्के जमने की प्रक्रिया भी गड़बड़ा गई। बीते कुछ महीनों में उनकी हालत और ज्यादा नाजुक हो गई थी। बैंकॉक पोस्ट की रिपोर्ट बताती है कि निधन के बाद राजा महा वजिरालोंगकोर्न ने शाही रीति-रिवाजों के मुताबिक सर्वोच्च सम्मान के साथ अंतिम संस्कार से जुड़े सभी राजकीय अनुष्ठान कराने का आदेश दिया है। राजकुमारी के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए बैंकॉक के ग्रैंड पैलेस स्थित फिमान रत्ताया थ्रोन हॉल में रखा जाएगा।

कानूनी क्षेत्र में अपने कामों के लिए मशहूर थीं

राजकुमारी बज्रकितियाभा का जन्म 7 दिसंबर 1978 को हुआ था। वह राजा महा वजिरालोंगकोर्न और राजकुमारी सोमसावली क्रोम मुएन सुद्धानारिनाथा की सबसे बड़ी संतान थीं। कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नवीराकुल ने टेलीविजन पर प्रसारित अपने संबोधन में कहा कि राजकुमारी थाईलैंड का गौरव थीं। उन्होंने कहा कि करुणा, न्याय और समानता पर आधारित समाज गढ़ने को लेकर उनका समर्पण देश के लिए हमेशा एक नैतिक प्रेरणा बना रहेगा। राजकुमारी बज्रकितियाभा खासकर समाजसेवा और कानून के क्षेत्र में किए गए अपने कार्यों के लिए पहचानी जाती थीं।

कॉर्नेल विश्वविद्यालय से पढ़ी थीं कानून

राजकुमारी ने 'कमलंगजाई' (इंस्पायर) नामक अभियान की शुरुआत की थी, जिसका मकसद महिला कैदियों का पुनर्वास करना और उन्हें दोबारा समाज की मुख्यधारा से जोड़ना था। उन्होंने अमेरिका के कॉर्नेल विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद 2000 के दशक के शुरुआती वर्षों में उन्होंने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में थाईलैंड के स्थायी मिशन में काम किया। आगे चलकर वह वर्ष 2012 से 2014 तक ऑस्ट्रिया में थाईलैंड की राजदूत रहीं। साल 2017 में उन्हें संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय (UNODC) का सद्भावना राजदूत भी बनाया गया।

बैंकॉक में उमड़ी श्रद्धांजलि देने वालों की भीड़

अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं से जुड़े जेल सुधारों में उनकी कोशिशों का बड़ा योगदान रहा। उन्हीं के प्रयासों के चलते वर्ष 2010 में संयुक्त राष्ट्र के 'बैंकॉक नियम' अपनाए गए, जिनके जरिए महिला कैदियों के साथ बर्ताव और उनके अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय मानक तय किए गए। निधन की खबर सामने आने के बाद बड़ी संख्या में लोग बैंकॉक के किंग चुलालोंगकोर्न मेमोरियल अस्पताल पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि दी। देश के कोने-कोने में लोग उनकी जनसेवा, सामाजिक कार्यों और मानवीय योगदान को याद कर रहे हैं।

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