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असम बाढ़ में बेजुबानों का सहारा बना वनतारा, हाथियों के रेस्क्यू पर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने अनंत अंबानी को दिया धन्यवादअसम
13 अग॰ 2026, 12:22 am (5 घंटे पहले)· 1

असम बाढ़ में बेजुबानों का सहारा बना वनतारा, हाथियों के रेस्क्यू पर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने अनंत अंबानी को दिया धन्यवाद

असम में भीषण बाढ़ के बीच वनतारा फाउंडेशन ने संकट में फंसे हाथियों और अन्य वन्यजीवों को सुरक्षित निकालकर चिकित्सीय मदद पहुंचाई है। इस राहत कार्य के लिए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने अनंत अंबानी और उनकी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।

असम में जारी प्राकृतिक आपदा के कारण व्यापक जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। भीषण बाढ़ की चपेट में आने से लाखों परिवार प्रभावित हुए हैं और राज्य प्रशासन की ओर से अब तक 64 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। इस कठिन परिस्थिति में इंसानों को सहायता पहुंचाने के साथ-साथ जंगलों में फंसे बेजुबान वन्यजीवों की रक्षा के लिए भी बड़े पैमाने पर कदम उठाए जा रहे हैं। अनंत अंबानी के वनतारा फाउंडेशन ने राज्य में आई इस आपदा के दौरान बाढ़ के पानी में घिरे हाथियों और अन्य जानवरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए विशेष राहत अभियान चलाया है।

बाढ़ की तबाही और वन्यजीवों पर गहराया संकट

असम के विस्तृत वन क्षेत्रों में 6 हजार से अधिक हाथियों की आबादी निवास करती है। राज्य के अधिकांश जंगली इलाकों में जलभराव होने के कारण वन्यजीवों के सामने जीवन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। बाढ़ के तेज बहाव और जलस्तर बढ़ने से सैकड़ों वन्यजीव जलमग्न क्षेत्रों में फंस गए अथवा बह गए। इसके अतिरिक्त बाढ़ की इस विभीषिका ने 10 लाख से अधिक पालतू व घरेलू मवेशियों को भी प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया है। ऐसे समय में जब वन्यजीवों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई थी, वनतारा फाउंडेशन की टीमों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जमीनी स्तर पर राहत कार्य शुरू किया।

वनतारा फाउंडेशन का राहत व बचाव अभियान

बाढ़ में फंसे हाथियों और अन्य बेजुबानों को बचाने के लिए संस्था ने अपनी विशेष रेस्क्यू टीमों को तुरंत असम के प्रभावित इलाकों में तैनात किया। वन्यजीवों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए बड़ी संख्या में समर्पित एनिमल एम्बुलेंस ग्राउंड पर उतारी गईं। राज्य के फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के साथ समन्वय स्थापित करते हुए वनतारा की टीमों ने जलमग्न जंगलों से हाथियों को रेस्क्यू कर सुरक्षित शेल्टर होम में पहुंचाया। इस दौरान केवल हाथियों ही नहीं, बल्कि बाढ़ की चपेट में आए छोटे-बड़े अन्य जंगली जानवरों को भी सुरक्षित बाहर निकाला गया।

चिकित्सा सहायता, भोजन और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का आभार

बचाव अभियान के साथ-साथ वनतारा फाउंडेशन ने बाढ़ से घायल हुए पशुओं के लिए त्वरित मेडिकल ट्रीटमेंट, आवश्यक दवाइयों और भोजन-पानी का सुचारू प्रबंध किया। वर्ल्ड एलीफेंट डे के अवसर पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस मानवीय पहल के लिए वनतारा और अनंत अंबानी की सराहना की। सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान प्रायः जानवरों के बचाव पर उतना ध्यान केंद्रित नहीं हो पाता जितना आवश्यक होता है, लेकिन वनतारा फाउंडेशन ने इस विषम परिस्थिति में आगे आकर बेजुबानों की रक्षा की। उन्होंने असम की जनता की ओर से अनंत अंबानी को इस सहायता के लिए धन्यवाद दिया।

गौरी से हुई थी शुरुआत, 260 से अधिक हाथियों की देखभाल

वर्तमान समय में वनतारा फाउंडेशन हाथियों के संरक्षण और कल्याण के लिए विश्व के सबसे बड़े केंद्रों में गिना जाता है। इस ऐतिहासिक पहल की शुरुआत गौरी नाम की एक हथिनी के सफल रेस्क्यू के साथ हुई थी। आज यह फाउंडेशन 260 से अधिक एशियाई हाथियों की निरंतर देखभाल, पोषण और चिकित्सा सहायता सुनिश्चित कर रहा है। अनंत अंबानी ने विभिन्न मंचों पर हाथियों के प्रति अपने विशेष लगाव का उल्लेख किया है और उनकी संस्था देश-विदेश में वन्यजीव संरक्षण के विस्तृत कार्यक्रमों का संचालन कर रही है।

देशभर में फैला कल्याणकारी अभियान और अंतरराष्ट्रीय पहल

हाथियों और अन्य वन्यजीवों के कल्याण के लिए संस्था कई राज्य सरकारों और स्थानीय संगठनों के साथ मिलकर व्यापक आउटरीच प्रोग्राम चला रही है। असम के अलावा अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी बड़े स्तर पर हाथियों के संरक्षण और देखभाल से जुड़ी परियोजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। संस्था की कल्याणकारी गतिविधियों का दायरा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विस्तृत रहा है। हाल ही में संस्था ने कोलंबिया में संकटग्रस्त 80 दरियाई घोड़ों को जीवनदान देने और उन्हें अपने केंद्र में आजीवन आश्रय प्रदान करने का प्रस्ताव भी रखा था। इसके अलावा मध्य प्रदेश स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल बागेश्वर धाम में आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों में भी संस्था के संस्थापक की सहभागिता रही है।

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सवाल-जवाब

असम में आई बाढ़ से कितने लोग और जानवर प्रभावित हुए हैं?
असम बाढ़ से लगभग 64 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इसके अलावा 10 लाख से अधिक घरेलू मवेशी और सैकड़ों जंगली जानवर बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
वनतारा फाउंडेशन ने असम में हाथियों को बचाने के लिए क्या कदम उठाए?
वनतारा ने अपनी विशेष रेस्क्यू टीम और एनिमल एम्बुलेंस असम भेजीं और वन विभाग के साथ मिलकर फंसे हुए हाथियों को सुरक्षित शेल्टर होम पहुंचाया।
असम के जंगलों में हाथियों की कुल संख्या कितनी है?
असम के जंगलों में 6,000 से अधिक जंगली हाथी निवास करते हैं।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने क्या प्रतिक्रिया दी?
वर्ल्ड एलीफेंट डे के अवसर पर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया पर वनतारा फाउंडेशन और अनंत अंबानी का आभार व्यक्त किया।
वनतारा फाउंडेशन की शुरुआत कैसे हुई थी?
वनतारा की शुरुआत गौरी नाम की एक हथिनी के रेस्क्यू से हुई थी और वर्तमान में यह संस्था 260 से अधिक एशियाई हाथियों की देखभाल करती है।
वनतारा फाउंडेशन किन अन्य राज्यों में हाथी कल्याण कार्यक्रम चला रहा है?
असम के अलावा वनतारा अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी हाथी कल्याण कार्यक्रम चला रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Karan Malhotra@karan-malhotra·30 मिनट पहले

असम की आपदा में वन्यजीवों की सुरक्षा एक गंभीर चुनौती थी, क्योंकि जलभराव से हजारों हाथियों और मवेशियों का जीवन संकट में आ गया था। वनतारा फाउंडेशन द्वारा प्रशासनिक समन्वय के साथ किए गए इस जमीनी बचाव और त्वरित चिकित्सा प्रबंधन ने यह साबित कर दिया है कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना मानवीय राहत। भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए इस प्रकार के निजी-सार्वजनिक सहयोग को एक मानक मॉडल के रूप में देखा जाना चाहिए।

Ravikash Gupta@ravikash·29 मिनट पहले

असम बाढ़ में वनतारा द्वारा प्रशासनिक समन्वय के साथ हाथियों का सफल बचाव यह दर्शाता है कि आधुनिक कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व अब केवल मानवीय राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट के समय पारिस्थितिकी तंत्र और वन्यजीव संरक्षण को भी अपने रणनीतिक एजेंडे में शामिल कर रहा है। आने वाले समय में जलवायु परिवर्तन जनित प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए इस प्रकार के वृहद पैमाने पर निजी-सार्वजनिक ढांचागत सहयोग और उन्नत पशु चिकित्सा प्रबंधन को आपदा प्रबंधन नीतियों का एक अनिवार्य हिस्सा बनाना होगा, जिससे वन्यजीवों और स्थानीय आजीविका दोनों की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

असम की भीषण बाढ़ में केवल मानव जीवन ही नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण भी एक गंभीर संकट बन गया था। आपदा के समय वनतारा फाउंडेशन द्वारा प्रशासनिक समन्वय के साथ हाथियों और अन्य मवेशियों का रेस्क्यू और मेडिकल कैंप चलाना आपदा प्रबंधन का एक अनूठा उदाहरण है। भविष्य में ऐसे पर्यावरणीय और पशु-सुरक्षा संकटों से निपटने के लिए सरकारी और निजी संस्थाओं को मिलकर एक स्थायी आपदा प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करना होगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 घंटे पहले

राज्य के घने जंगलों में हज़ारों हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण राज्य नीति का एक अहम हिस्सा बनना चाहिए। वनतारा जैसे संगठनों का यह हस्तक्षेप दर्शाता है कि सरकारी मशीनरी और कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) का यह सहयोगात्मक मॉडल भविष्य में जलवायु परिवर्तन से जुड़ी आपदाओं के वक्त वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत और अनुकरणीय ढांचा प्रदान कर सकता है।

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