मेघालय और असम की अंतरराज्यीय सीमा पर लगातार बढ़ती नाकेबंदी और तनाव की घटनाओं को देखते हुए हिन्युवट्रेप इंटीग्रेटेड टेरिटोरियल ऑर्गेनाइजेशन (एचआईटीओ) ने केंद्र सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है। संगठन ने सोमवार को केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें सीमावर्ती क्षेत्रों में आवाजाही में पैदा की जा रही बाधाओं की एक स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने की मांग की गई है। इस ज्ञापन में विशेष रूप से उस घटना का उल्लेख किया गया है जिसमें एक नागरिक वाहन में यात्रा कर रहे भारतीय सेना के जवानों को रोककर उनके साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार किया गया था।
सैन्यकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार और हाईवे पर बाधा
संगठन के अनुसार, सीमावर्ती इलाकों की स्थिति अब केवल सामान्य कानून-व्यवस्था का विषय नहीं रह गई है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर बार-बार लगने वाले जाम और बंद के कारण आम नागरिकों, वाहनों और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। हाल ही में हुई एक गंभीर घटना में, गैर-सैन्य यानी निजी वाहन से यात्रा कर रहे भारतीय सेना के जवानों को राजमार्ग पर रोक लिया गया। जवानों द्वारा अपनी पहचान बताने और सुरक्षा बल का सदस्य होने का प्रमाण देने के बावजूद उनकी बातों को नजरअंदाज किया गया। उन्हें सड़क पर रोके रखा गया और उनके साथ तीखी बहस तथा अभद्र व्यवहार किया गया।
संगठन ने इस पूरी घटना से जुड़े वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्य केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंप दिए हैं। संगठन का आग्रह है कि मंत्रालय इन साक्ष्यों और वीडियो सामग्री की किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराए। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो दोषी व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी सुरक्षाकर्मी या आम नागरिक के साथ इस तरह का व्यवहार न हो सके।
राष्ट्रीय राजमार्ग पर नाकेबंदी और पिछला घटनाक्रम
एचआईटीओ ने इस बात पर गहरा असंतोष व्यक्त किया कि असम और मेघालय सीमा पर जब भी कोई विवाद या तनाव पैदा होता है, तो सबसे पहले सड़कों को बंद कर दिया जाता है। संगठन का मानना है कि राजमार्गों को बंद करना या यातायात बाधित करना अधिकारियों पर दबाव बनाने या आपसी विवाद सुलझाने का जरिया नहीं बनना चाहिए। इस तरह के कदमों से केवल आम यात्रियों, मरीजों और दैनिक आवश्यक सेवाओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
ज्ञापन में साल 2024 की एक ऐसी ही घटना का हवाला भी दिया गया है। उस समय कुटुंब सुरक्षा परिषद द्वारा मेघालय-असम राजमार्ग पर नाकेबंदी की योजना बनाई गई थी। तब एचआईटीओ ने 23 दिसंबर 2024 को असम के मुख्य सचिव को एक ज्ञापन भेजकर प्रस्तावित नाकेबंदी को रोकने की अपील की थी। उस समय प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद स्थिति को समय रहते संभाला जा सका था। इसी पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए संगठन ने गृह मंत्रालय से मौजूदा स्थिति पर ध्यान देने और दोनों राज्यों के बीच समन्वय मजबूत करने की मांग की है।
गृह मंत्रालय के समक्ष रखी गईं मुख्य मांगें
केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजे गए ज्ञापन में संगठन ने कई प्रमुख मांगें रखी हैं
- हालिया नाकेबंदी और सेना के जवानों से जुड़े घटनाक्रम की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए।
- अधिकारियों को सौंपे गए वीडियो साक्ष्यों की स्वतंत्र जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो।
- राजमार्गों पर अवैध रुकावट, धमकी और जबरन रास्ता रोकने की गतिविधियों पर स्थायी रोक लगाने के कदम उठाए जाएं।
- गृह मंत्रालय, असम सरकार और मेघालय सरकार के बीच एक औपचारिक समन्वय तंत्र स्थापित किया जाए ताकि किसी भी घटना की सूचना का त्वरित आदान-प्रदान और समन्वित कार्रवाई हो सके।
- राष्ट्रीय राजमार्गों और मुख्य परिवहन मार्गों को पूरी तरह बाधा मुक्त रखा जाए, खासकर जब इससे आम जनता, आपातकालीन सेवाओं या सुरक्षा बलों की आवाजाही प्रभावित हो रही हो।
- संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में विश्वास बहाली और रोकथाम के उपाय लागू किए जाएं ताकि छोटी-मोटी घटनाएं बड़े विवाद का रूप न ले सकें।
संवैधानिक तंत्र और शांतिपूर्ण समाधान पर जोर
संगठन ने स्पष्ट किया है कि उसका मकसद असम और मेघालय के बीच तनाव को बढ़ाना या भड़काना बिल्कुल नहीं है। एचआईटीओ का मानना है कि किसी भी अंतरराज्यीय विवाद का हल भीड़ के दबाव, धमकी या एकतरफा कार्रवाई से नहीं, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं, शांतिपूर्ण बातचीत और कानून की स्थापित प्रक्रिया के जरिए ही निकाला जाना चाहिए।
संगठन ने इस बात की ओर भी ध्यान दिलाया कि जब भी वे खुद शांतिपूर्ण प्रदर्शन या सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं, तो उन पर तरह-तरह की पाबंदियां लगा दी जाती हैं। ऐसे में लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति और अवैध सड़क नाकेबंदी के बीच फर्क समझा जाना चाहिए और दोनों के साथ अलग-अलग पैमाना नहीं अपनाया जाना चाहिए। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसी घटनाएं बार-बार होती रहीं और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला शुरू हुआ, तो सीमा के दोनों तरफ रहने वाले समुदायों के बीच टकराव का एक खतरनाक चक्र शुरू हो सकता है। इसलिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को समय रहते हस्तक्षेप करना चाहिए और उनके ताजा ज्ञापन के साथ-साथ दिसंबर 2024 के ज्ञापन पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए। संगठन ने दोहराया कि वह शांति, संवैधानिक लोकतंत्र, कानून के शासन और अंतरराज्यीय सौहार्द के प्रति प्रतिबद्ध है।



















