सोशिएल जेनरल के कमोडिटी कंपास एनालिटिक्स दल के अनुसार, फरवरी 2025 से तांबे के बाजार में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इस दल का नेतृत्व करने वाले माइकल हेग और जेरेमी सेलेम ने स्पष्ट किया है कि अब कॉपर की चाल केवल पारंपरिक मांग और आपूर्ति के पुराने समीकरणों पर निर्भर नहीं रह गई है। इसके पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी मांग, आर्बिट्रेज फ्लो और अमेरिकी ट्रेड पॉलिसी जैसी ताकतें मुख्य भूमिका निभा रही हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि पारंपरिक विश्लेषणात्मक तरीकों से इस बाजार का अनुमान लगाना अब बेहद जटिल हो गया है।
उत्पादन और आपूर्ति का बढ़ता संकट
तांबे के कच्चे माल यानी कॉपर कंसंट्रेट्स को लेकर वैश्विक स्तर पर जबरदस्त प्रतिस्पर्धा चल रही है, जबकि नई खदानों की क्षमता में लगातार कमी बनी हुई है। सीमित खदान आपूर्ति के कारण तांबे की भौतिक उपलब्धता प्रभावित हो रही है। वैश्विक बाजार में इन अड़चनों के बीच एआई तकनीक, डेटा सेंटर, पावर ग्रिड के विस्तार और इलेक्ट्रिक वाहनों यानी ईवी की बढ़ती बिक्री ने तांबे की लंबी अवधि की मांग को काफी मजबूत कर दिया है। यह स्थिति ऐसे समय में बन रही है जब पारंपरिक फ्रेमवर्क के जरिए बाजार का आकलन करना विश्लेषकों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।
ट्रेड पॉलिसी और आर्बिट्रेज का असर
फरवरी 2025 के बाद से तांबे के प्रदर्शन ने भौगोलिक आर्बिट्रेज और व्यापार नीतियों के नए दौर को बखूबी दर्शाया है। टैरिफ से जुड़े आर्बिट्रेज के कारण तांबे की भारी भरकम इन्वेंट्री को अमेरिकी बाजार की तरफ मोड़ दिया गया है, जिसके चलते दुनिया के अन्य हिस्सों में तांबे की भौतिक उपलब्धता में भारी कमी आ गई है। इसके साथ ही मुद्रा बाजार में सोमवार के शुरुआती कारोबार में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। पाउंड और डॉलर के बीच की हलचल हो या यूरो का सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव, वैश्विक वित्तीय परिदृश्य में ये सभी पहलू एक-दूसरे से जुड़े हुए नजर आते हैं।
सोने और अमेरिकी ट्रेजरी का रुख
इस बीच, सोने की कीमतें अपनी तेजी को बरकरार रखते हुए शुरुआती मई के बाद पहली बार प्रति ट्रॉय औंस 4,700 डॉलर के आंकड़े के करीब पहुंच गई हैं। कीमती धातुओं में यह उछाल अमेरिकी डॉलर में आई मामूली बढ़त और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई गिरावट के बावजूद दर्ज किया गया है। दूसरी ओर, अमेरिकी ट्रेजरी ने बुधवार को अपने कैलेंडर से हटकर एक बड़ा कदम उठाया। विभाग ने 12:32 GMT पर घोषणा की कि वह 10 साल से 20 साल और 20 साल से 30 साल के सेक्टरों में लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक ऑपरेशन के आकार को कम से कम दोगुना कर देगा। इसके तहत अधिकतम सीमा को 2 अरब डॉलर प्रति ऑपरेशन से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है, जो 9 सितंबर से प्रभावी होकर 4 नवंबर तक चलेगा।



















