तलाक के बाद के संबंधों से खत्म नहीं होती पुरानी क्रूरता, कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसलामिजोरम विवाह कानून संशोधन के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, गुवाहाटी हाईकोर्ट जाने को कहामेंस हॉकी वर्ल्ड कप 2026 से बाहर हुई भारतीय टीम, अर्जेंटीना ने 5-3 से हरायापढ़ाई में तेज होने के बावजूद इन मूलांक के लोगों को करियर में क्यों उठानी पड़ती है परेशानी?यूरो में सुस्ती और डॉलर के सामने कमजोरी, जानिए क्या कहते हैं बाजार के आंकड़ेजैक्सन होल में ब्याज दरों पर बड़े ऐलान की उम्मीद कम, नीतिगत ढांचे पर ध्यान केंद्रित करेंगे वॉर्शफरीदाबाद-नोएडा मंझावली पुल तैयार लेकिन चीरसी में जमीन अधिग्रहण के पेंच से रुका सफरकोटा में मिड-डे मील बना आफत, कद्दू की सब्जी खाते ही 23 बच्चों की तबीयत बिगड़ीईरान के खिलाफ सबसे बड़े वित्तीय हमले की तैयारी, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट की कड़ी चेतावनीअमेरिकी डॉलर में रिकवरी से कमजोर हुआ जापानी येन, निवेशकों की नजरें यूएस पीसीई और जैक्सन होल सम्मेलन पर
फरीदाबाद-नोएडा मंझावली पुल तैयार लेकिन चीरसी में जमीन अधिग्रहण के पेंच से रुका सफरहरियाणा
24 अग॰ 2026, 8:12 pm (1 घंटे पहले)· 3

फरीदाबाद-नोएडा मंझावली पुल तैयार लेकिन चीरसी में जमीन अधिग्रहण के पेंच से रुका सफर

फरीदाबाद और नोएडा को जोड़ने वाला मंझावली पुल हरियाणा की ओर तैयार है, लेकिन नोएडा के चीरसी गांव में 4 किमी सड़क के लिए जमीन अधिग्रहण न होने से रास्ता अटका पड़ा है।

हरियाणा के फरीदाबाद और उत्तर प्रदेश के नोएडा के बीच आवागमन को सुगम बनाने के मकसद से तैयार की जा रही मंझावली पुल परियोजना का इंतजार अब भी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। फरीदाबाद की तरफ नदी पर बने मुख्य पुल और उसे जोड़ने वाली एप्रोच रोड का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन नोएडा की सीमा में प्रवेश करते ही सड़क का काम अधूरा पड़ा है। इस वजह से दोनों शहरों के लोग इस नए मार्ग का सीधा फायदा नहीं उठा पा रहे हैं। फिलहाल फरीदाबाद से नोएडा जाने वाले वाहन चालकों को दिल्ली या कालिंदी कुंज के रास्ते एक लंबा चक्कर काटना पड़ता है, जिसमें रोज घंटों समय बर्बाद होता है।

लंबे समय से अधूरा सपना: 2014 में रखी गई थी आधारशिला

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को दोनों शहरों के बीच संपर्क सुधारने के लिए एक बेहद अहम मील का पत्थर माना गया था। केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्ण पाल गुर्जर के अनुसार, मंझावली पुल परियोजना की आधारशिला 15 अगस्त 2014 को रखी गई थी। फरीदाबाद क्षेत्र में इस पुल और उससे संबंधित पहुंच मार्ग का निर्माण लगभग 122 करोड़ रुपये की लागत से कराया गया है।

ये भी पढ़ें

हैरानी की बात यह है कि फरीदाबाद की ओर पुल का ढांचा और सड़क का काम करीब दो साल पहले ही पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया था। इसके बावजूद, उत्तर प्रदेश की तरफ संपर्क मार्ग न बन पाने के कारण यह पूरी परियोजना अधर में लटकी हुई है। फरीदाबाद के लोग बीते दो वर्षों से पुल का काम पूरा होने के बाद भी इसके खुलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन नोएडा की ओर से हरी झंडी न मिलने के कारण यातायात शुरू नहीं हो सका है।

चीरसी में जमीन अधिग्रहण की अड़चन से रुका काम

वर्तमान में इस ड्रीम प्रोजेक्ट के शुरू होने में सबसे बड़ी बाधा उत्तर प्रदेश के हिस्से में आने वाली चार किलोमीटर की सड़क है। नोएडा स्थित चीरसी गांव में इस चार किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया जाना है, लेकिन इसके लिए आवश्यक जमीन का अधिग्रहण अभी तक पूरा नहीं हो पाया है।

चीरसी गांव में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में हो रही देरी के कारण निर्माण एजेंसियां आगे का काम शुरू नहीं कर पा रही हैं। फरीदाबाद प्रशासन और निर्माण एजेंसियों ने अपने हिस्से की जिम्मेदारी काफी समय पहले निभा दी थी, मगर नोएडा प्रशासन की तरफ से जमीन हस्तांतरण में आ रही रुकावटों की वजह से पूरे मार्ग को आपस में जोड़ा नहीं जा सका है। जब तक चीरसी में जमीन अधिग्रहण का मामला सुलझ नहीं जाता, तब तक मंझावली पुल का लाभ जनता को मिलना संभव नहीं दिख रहा है।

कालिंदी कुंज के लंबे जाम से मिलेगी राहत

एक बार जब मंझावली पुल पर गाड़ियां दौड़ने लगेंगी, तब फरीदाबाद और नोएडा के बीच का सफर केवल 20 मिनट में पूरा होने का अनुमान है। वर्तमान में जो लोग फरीदाबाद से नोएडा या ग्रेटर नोएडा जाते हैं, उन्हें कालिंदी कुंज या फिर बदरपुर और दिल्ली के आंतरिक रास्तों का सहारा लेना पड़ता है।

इन पारंपरिक मार्गों पर यातायात का दबाव इतना अधिक रहता है कि सुबह और शाम के पीक आवर्स में गाड़ियों की लंबी कतारें लग जाती हैं। अक्सर वाहन चालकों को एक से डेढ़ घंटे तक भीषण ट्रैफिक जाम में फंसे रहना पड़ता है। इससे न केवल लोगों का कीमती समय नष्ट होता है, बल्कि वाहनों में ईंधन की भी भारी खपत होती है। डीएनडी एक्सप्रेसवे के चालू होने से जिस प्रकार दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में आवागमन सुगम हुआ है, उसी तर्ज पर मंझावली पुल के पूरी तरह शुरू होने से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में एक बड़ा बदलाव आने की उम्मीद जताई जा रही है।

रियल एस्टेट और स्थानीय कारोबार को मिलेगी नई रफ्तार

मंझावली पुल के शुरू होने से सबसे अधिक राहत रोजमर्रा के यात्रियों और नौकरीपेशा लोगों को मिलेगी। नोएडा और फरीदाबाद के औद्योगिक तथा आईटी सेक्टरों में काम करने वाले कर्मचारी कम समय में अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। इसके अलावा, स्वास्थ्य सेवाओं, उच्च शिक्षा और व्यापारिक गतिविधियों के लिए दोनों शहरों के बीच आवाजाही करने वाले लोगों का सफर भी बेहद आसान हो जाएगा।

इस सीधी कनेक्टिविटी का सकारात्मक प्रभाव फरीदाबाद के रियल एस्टेट क्षेत्र पर भी स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा। नोएडा और ग्रेटर नोएडा से सीधा संपर्क स्थापित होने के कारण फरीदाबाद के नए और विकासशील सेक्टरों में रिहायशी तथा व्यावसायिक संपत्तियों की मांग तेजी से बढ़ सकती है। प्रॉपर्टी विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते बाहरी निवेशक और घर खरीदने के इच्छुक लोग फरीदाबाद की ओर आकर्षित होंगे। इससे शहर के उन इलाकों में विकास की गति और तेज होगी जो अभी शुरुआती चरण में हैं, और वहां नए कमर्शियल व रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स के लिए अनुकूल माहौल तैयार होगा।

सवाल-जवाब

मंझावली पुल चालू होने के बाद फरीदाबाद से नोएडा जाने में कितना समय लगेगा?
मंझावली पुल के पूरी तरह शुरू होने के बाद फरीदाबाद से नोएडा का सफर लगभग 20 मिनट में पूरा होने की उम्मीद है।
मंझावली पुल परियोजना की आधारशिला कब रखी गई थी और इसकी लागत कितनी है?
मंझावली पुल परियोजना की आधारशिला 15 अगस्त 2014 को रखी गई थी और फरीदाबाद की तरफ इस पुल व एप्रोच रोड पर करीब 122 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
मंझावली पुल शुरू होने में मुख्य अड़चन क्या है?
नोएडा की तरफ चीरसी गांव में लगभग 4 किलोमीटर सड़क के लिए जमीन अधिग्रहण का काम अटका हुआ है, जिसकी वजह से निर्माण पूरा नहीं हो सका है।
फिलहाल फरीदाबाद से नोएडा जाने के लिए लोगों को कौन सा रास्ता लेना पड़ता है?
वर्तमान में लोगों को दिल्ली या कालिंदी कुंज के रास्ते जाना पड़ता है, जहां भीषण ट्रैफिक जाम के कारण 1 से 1.5 घंटे का समय लग जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·45 मिनट पहले

मंझावली पुल का यह मामला केवल प्रशासनिक सुस्ती का नहीं, बल्कि जनधन की बर्बादी और कानूनी समन्वय की कमी का गंभीर उदाहरण है। हरियाणा ने अपने हिस्से का निर्माण पूरा कर लिया है, लेकिन उत्तर प्रदेश के चीरसी गांव में जमीन अधिग्रहण का पेंच फंसने से जनता को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। यदि दोनों राज्यों के बीच विधिक और प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने के लिए कोई संयुक्त समन्वय समिति समय पर गठित की जाती, तो करोड़ों रुपये की यह परियोजना इस तरह वर्षों से अधर में न लटकी होती।

Rohan Verma@rohan-verma·44 मिनट पहले

यह क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे के विकास में आपसी समन्वय की कमी को उजागर करता है। जब तक दोनों राज्यों के प्रशासनिक अधिकारी चीरसी की अड़चन को दूर करने के लिए साझा बैठक नहीं करते, तब तक जनता को जाम से मुक्ति नहीं मिलेगी। इस तरह की देरी से लागत बढ़ती है और योजना का मूल उद्देश्य ही विफल हो जाता है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR