महोत्सवों में सम्मान पा चुकी असमिया फिल्ममेकर रिमा दास की फिल्म ‘विलेज रॉकस्टार्स 2’ अब असम के थिएटर प्रदर्शन और मैमी इन्डिपेंडेंट की स्क्रीनिंग के बाद भारत के छह शहरों में 25 सितंबर को रिलीज़ होगी। मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद और पुणे में इसके प्रदर्शन होंगे, जिससे फिल्म महोत्सवों से निकलकर अधिक दर्शकों तक पहुंचेगी।
पहली फिल्म को जाने बिना भी नई फिल्म समझ आएगी
दास की 2017 की ‘विलेज रॉकस्टार्स’ से यह कहानी आगे बढ़ती है, मगर इसे देखने के लिए पिछला हिस्सा देखना जरूरी नहीं है। नई फिल्म बड़े होने के सफर को बचपन, किशोरावस्था, प्रकृति, जलवायु परिवर्तन, संगीत तथा मां और बेटी के रिश्ते के जरिए देखती है। इन सभी तत्वों से व्यक्तिगत जिंदगी के बदलाव को परिवार और माहौल के साथ जोड़ा गया है।
ग्रामीण असम की किशोरी और उसका भावनात्मक केंद्र
फिल्म का केंद्र ग्रामीण असम की एक किशोरी है, जो दोस्ती, सपनों और बड़े होने की अनिश्चितताओं से गुजरती है। उसकी मां से नज़दीकियां, संगीत के प्रति लगाव और धरती से नाता कहानी को भावनात्मक सहारा देते हैं। यहां बढ़ती उम्र के सवालों को प्रकृति और आसपास के वातावरण से अलग नहीं दिखाया गया।
दो फिल्में, एक दशक का रचनात्मक और भावनात्मक सफर
2017 की फिल्म और इसकी अगली कड़ी दास के लिए एक दशक लंबे रचनात्मक और भावनात्मक सफर की तरह हैं। दास ने बताया कि महोत्सवों में कुछ लोगों ने फिल्म देखी और अब उसे अधिक लोगों तक ले जाना उनके लिए खुशी की बात है। प्रदर्शनों से उन्हें यह बात भी मिली कि हर दर्शक का अनुभव अलग होता है और हर कोई अपने अर्थ खोजता है। उनके मुताबिक, सिनेमा दर्शकों को कहानी को अपने ढंग से आगे बढ़ाने की जगह देता है।
बुसान से बर्लिन तक महोत्सव सफर
बुसान के 29वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल मंच से फिल्म का विश्व प्रीमियर हुआ, और वहीं उसे किम जिसॉक अवॉर्ड फॉर बेस्ट फिल्म से सम्मानित किया गया। इसके बाद यह मैमी मुंबई फिल्म फेस्टिवल 2024 के साउथ एशिया कॉम्पिटीशन में दिखाई गई। फरवरी 2025 में 75वें बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, बर्लिनाले, की जनरेशन 14प्लस प्रतियोगिता श्रेणी में इसका यूरोपीय प्रीमियर हुआ। भारतीय रिलीज़ से पहले फिल्म असम में थिएटर रन से गुजरी और मैमी इन्डिपेंडेंट में भी दिखाई गई।
पर्यावरण, धरती और बदलती जलवायु
फिल्म पर्यावरण, धरती और बदलती जलवायु की ओर देखती है, और यह विषय असम तथा नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के अनुभव से मेल खाता है। इसलिए ग्रामीण पृष्ठभूमि केवल सजावट नहीं रह जाती, बल्कि पर्यावरण में बदलाव के संदर्भ में कहानी को और व्यापक अर्थ मिलते हैं। महोत्सव प्रदर्शनों, असम के थिएटर रन और यूरोपीय प्रीमियर के बाद अब यह फिल्म छह भारतीय शहरों में दर्शकों से मिलेगी।



















