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असम विधानसभा में बाढ़ राहत के लिए एकजुट हुए विधायक, सभी दलों ने सौंपा एक महीने का वेतन, रायजोर दल की खामोशी से उठे सवालअसम
28 जुल॰ 2026, 1:10 pm (65 दिन पहले)· 0

असम विधानसभा में बाढ़ राहत के लिए एकजुट हुए विधायक, सभी दलों ने सौंपा एक महीने का वेतन, रायजोर दल की खामोशी से उठे सवाल

असम में आई प्राकृतिक विभीषिका के बीच राज्य विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष ने एकजुटता दिखाते हुए एक महीने का वेतन बाढ़ पीड़ितों को देने की घोषणा की है। हालांकि, इस सर्वदलीय सहमति के दौरान रायजोर दल के विधायक की सदन में मौन उपस्थिति चर्चा का केंद्र बन गई।

असम में जारी भयंकर बाढ़ की विभीषिका से निपटने के लिए राज्य विधानसभा के भीतर एक अनूठी राजनीतिक एकजुटता देखने को मिली है। प्रदेश के लाखों नागरिकों को प्रभावित करने वाली इस प्राकृतिक आपदा के बीच जनप्रतिनिधियों ने दलीय सीमाओं को पीछे धकेलते हुए एक बड़ा कदम उठाया। सदन के भीतर सत्ताधारी मोर्चे से लेकर प्रमुख विपक्षी खेमों तक लगभग तमाम दलों ने सर्वसम्मति से अपने एक महीने का वेतन बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास और राहत कार्यों के लिए समर्पित करने की घोषणा की है। इस फैसले से राज्य में संकट की इस घड़ी में एक सकारात्मक संदेश गया है, हालांकि पूरी प्रक्रिया के दौरान एक राजनीतिक दल के मौन बने रहने से सियासी गलियारों में बहस भी छिड़ गई है।

विधानसभा अध्यक्ष और कर्मचारियों की पहल

राहत कोष में योगदान देने की इस मुहिम की अगुवाई खुद विधानसभा के शीर्ष अधिकारियों ने की। विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास और उपाध्यक्ष हैबे टेरॉन ने स्वयं आगे बढ़कर अपना एक महीने का पूरा वेतन बाढ़ राहत कोष में देने का निर्णय सार्वजनिक किया। इसके साथ ही उन्होंने यह जानकारी भी साझा की कि विधानसभा सचिवालय में कार्यरत सभी कर्मचारी और अधिकारी भी संवेदनशील रुख अपनाते हुए अपना एक दिन का वेतन इस कोष में जमा करेंगे। जब इस फैसले का ऐलान किया गया, तब पूरे सदन ने मेजें थपथपाकर इस पहल का जोरदार स्वागत और समर्थन किया।

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संसदीय कार्य मंत्री और विपक्षी दलों का रुख

सदन में सर्वदलीय घोषणाओं का सिलसिला शुरू होते ही विभिन्न नेताओं ने अपनी-अपनी पार्टियों का रुख स्पष्ट किया। संसदीय कार्य मंत्री पीयूष हजारिका ने घोषणा की कि भारतीय जनता पार्टी के सभी सदस्य इस सर्वसम्मत निर्णय का हिस्सा बनेंगे और अपना एक महीने का वेतन राहत कार्यों के लिए सौंपेंगे। दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष वाजेद अली चौधरी ने जानकारी दी कि उनकी पार्टी कांग्रेस पहले से ही प्रभावित इलाकों में जमीनी स्तर पर राहत सामग्री वितरित करने में जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के तमाम विधायक भी एक महीने की सैलरी समर्पित करने के सामूहिक संकल्प के साथ खड़े हैं।

अन्य छोटी और क्षेत्रीय पार्टियों ने भी इस मानवीय कदम में पीछे न रहने का फैसला किया। तृणमूल कांग्रेस के इकलौते प्रतिनिधि शेरमन अली अहमद ने बिना झिझक अपना एक महीने का वेतन राहत कोष में देने की पुष्टि की। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के विधायक मजीबुर रहमान ने बताया कि यद्यपि उनकी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बदरुद्दीन अजमल पहले ही निजी तौर पर राहत कार्यों में इससे काफी बड़ी धनराशि लगा चुके हैं, फिर भी पार्टी के सभी विधायक विधानसभा के इस एकीकृत निर्णय के साथ पूरी मजबूती से रहेंगे। इसी क्रम में असम गण परिषद के प्रतिनिधि पृथ्वीराज राभा और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के सदस्य पनीराम ब्रह्मा ने भी स्पष्ट किया कि उनकी-उनकी पार्टियों के सभी विधायक अपना एक-एक महीने का वेतन बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए देंगे।

रायजोर दल की खामोशी पर क्यों बने सवाल?

जहां एक ओर विधानसभा में मौजूद हर प्रमुख दल एक-एक कर बाढ़ पीड़ितों की आर्थिक मदद के लिए अपनी सैलरी छोड़ने का ऐलान कर रहा था, वहीं रायजोर दल की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई। सदन में पार्टी के विधायक महबूब मुख्तार व्यक्तिगत रूप से उपस्थित थे, लेकिन उन्होंने वेतन दान को लेकर कोई बात नहीं रखी। किसी भी प्रकार की घोषणा न किए जाने के कारण उनकी यह खामोशी चर्चा का विषय बन गई। हालांकि, सामने आई जानकारियों के अनुसार, रायजोर दल की तरफ से दान न देने का कोई सार्वजनिक कारण या बयान जारी नहीं किया गया है। लिहाजा इसे सीधे तौर पर इंकार कहना उचित नहीं होगा, लेकिन सदन में इस मुद्दे पर चुप्पी साधने से कयासबाजी का माहौल जरूर बन गया।

अध्यक्ष ने जताया आभार, पुनर्वास में तेजी की उम्मीद

सदन में हुए इस ऐतिहासिक सर्वदलीय समन्वय के बाद विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास ने सभी दलों, उनके नेताओं और व्यक्तिगत रूप से विधायकों का आभार प्रकट किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब भी राज्य किसी भीषण प्राकृतिक विभीषिका का सामना करता है, तब जनप्रतिनिधियों का एक मंच पर आकर समाज के साथ खड़े होना आम जनता में विश्वास जगाता है। इस आर्थिक सहायता का मुख्य उद्देश्य राज्य सरकार और प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे राहत व पुनर्वास अभियानों को अधिक गति प्रदान करना है ताकि बाढ़ प्रभावित परिवारों को जल्द से जल्द मदद पहुंचाई जा सके।

सवाल-जवाब

असम में किस कारण विधायकों ने वेतन दान करने का फैसला किया?
राज्य में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद और उनके पुनर्वास कार्यों को गति देने के लिए विधायकों ने यह निर्णय लिया।
विधानसभा अध्यक्ष और कर्मचारियों ने कितना योगदान देने का ऐलान किया?
अध्यक्ष रंजीत कुमार दास और उपाध्यक्ष हैबे टेरॉन ने एक महीने का वेतन, जबकि विधानसभा सचिवालय के कर्मचारियों ने एक दिन का वेतन देने की घोषणा की।
क्या विपक्ष की सभी पार्टियां इस फैसले में शामिल हुईं?
कांग्रेस, टीएमसी, एआईयूडीएफ, एजीपी और बीपीएफ जैसी प्रमुख विपक्षी व क्षेत्रीय पार्टियों के विधायकों ने एक महीने का वेतन देने की घोषणा की।
किस पार्टी के विधायक ने सदन में वेतन दान पर कोई घोषणा नहीं की?
रायजोर दल के विधायक महबूब मुख्तार सदन में मौजूद रहने के बावजूद इस फैसले पर शांत रहे और उन्होंने कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की।
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