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अखिल गोगोई की मांग, असम के बाढ़ प्रभावित जिलों को मिले राष्ट्रीय आपदा का दर्जाअसम
17 अग॰ 2026, 6:06 pm (2 घंटे पहले)· 0

अखिल गोगोई की मांग, असम के बाढ़ प्रभावित जिलों को मिले राष्ट्रीय आपदा का दर्जा

रायजोर दल के विधायक अखिल गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर असम के तीन जिलों में आई बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और हर प्रभावित परिवार को दस लाख रुपये की सहायता देने की मांग की है।

असम के शिवसागर से विधायक और रायजोर दल के नेता अखिल गोगोई ने केंद्र सरकार से राज्य के बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए कड़े कदम उठाने की अपील की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए एक पत्र के माध्यम से उन्होंने मांग की है कि हाल ही में आपदा का सामना करने वाले असम के तीन प्रमुख जिलों शिवसागर, चराईदेव और जोरहाट को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने बाढ़ की मार झेलने वाले प्रत्येक प्रभावित परिवार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान को दस लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करने का भी आग्रह किया है।

बाइस सूत्रीय मांग पत्र और पुनर्वास की गुहार

प्रधानमंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में विधायक ने एक विस्तृत बाइस सूत्रीय मांग पत्र शामिल किया है, जिसमें तत्काल राहत कार्यों के साथ-साथ दीर्घकालिक पुनर्निर्माण योजनाओं को लागू करने पर जोर दिया गया है। उनका कहना है कि असम-नागालैंड सीमा पर कथित तौर पर चल रहे अवैध कोयला खनन और दिखौ नदी के तल में हो रहे अवैध रेत और पत्थर के उत्खनन की वजह से हालात बदतर हुए हैं। इन मामलों की तह तक जाने के लिए उन्होंने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग उठाई है, ताकि 19 जुलाई को आई इस तबाही के असली कारणों का खुलासा हो सके।

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विशेष पैकेज और बुनियादी ढांचे का विकास

बाढ़ के बाद क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे को पटरी पर लाने के लिए एक हजार करोड़ रुपये के विशेष पुनर्निर्माण पैकेज की आवश्यकता पर बल दिया गया है। इस राशि का मुख्य उपयोग सबसे अधिक प्रभावित रहने वाले शिवसागर और नाजिरा विधानसभा क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त ढांचे को दोबारा तैयार करने में किया जाना चाहिए। इसके अलावा, असम सरकार द्वारा घोषित पंद्रह हजार रुपये की एकमुश्त सहायता राशि हर जरूरतमंद तक पहुंचनी चाहिए, विशेषकर उन लोगों तक जिन्हें किसी तकनीकी गलती या प्रशासनिक चूक के कारण सूची से बाहर कर दिया गया था।

किसानों, छात्रों और विस्थापितों के लिए राहत

आपदा के कारण बेघर हुए नेपालिखुति गांव के निवासियों के लिए सुरक्षित जमीन और पक्के आवास मुहैया कराने की बात भी उठाई गई है। शिक्षा व्यवस्था को दोबारा खड़ा करने के उद्देश्य से बाढ़ से प्रभावित विद्यार्थियों को मुफ्त किताबें और स्कूल यूनिफॉर्म देने के साथ-साथ प्राथमिक से लेकर स्नातक स्तर तक की दाखिला फीस पूरी तरह माफ करने का आग्रह किया गया है। कृषि और आजीविका से जुड़े क्षेत्रों को उबारने के लिए छोटे चाय उत्पादकों, अगरwood की खेती करने वालों, मत्स्य पालकों, पशुपालन और मुर्गी पालन से जुड़े किसानों, सुअर पालन समितियों, पौध नर्सरी संचालकों तथा स्थानीय हथकरघा और हस्तशिल्प सेक्टर को व्यापक मुआवजा देने की मांग की गई है।

नदियों की सफाई और तटबंधों को मजबूती

भविष्य में ऐसी त्रादड़ियों से निपटने के लिए स्थायी समाधान के तौर पर नदियों के प्रबंधन पर ध्यान देने की बात कही गई है। दिखौ, दारिका, जांजी, मितोंग और नामदांग नदियों की पूरी तरह से सिल्ट सफाई कराने, आधुनिक स्लुइस गेट स्थापित करने और कमजोर नदी तटबंधों को मजबूत करने का आग्रह किया गया है। इसके अलावा, आपदा में क्षतिग्रस्त हुए सभी शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक स्थलों और अन्य सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की मरम्मत के लिए भी वित्तीय मदद की मांग की गई है ताकि जनजीवन सामान्य हो सके।

सवाल-जवाब

अखिल गोगोई ने प्रधानमंत्री से क्या मुख्य मांग की है?
उन्होंने असम के तीन बाढ़ प्रभावित जिलों को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और प्रत्येक प्रभावित परिवार को दस लाख रुपये देने की मांग की है।
किन तीन जिलों को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की गई है?
शिवसागर, चराईदेव और जोरहाट जिलों के लिए राष्ट्रीय आपदा का दर्जा मांगा गया है।
बाढ़ के कारणों की जांच के लिए किस एजेंसी से जांच की मांग की गई है?
अखिल गोगोई ने 19 जुलाई की बाढ़ के कारणों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की है।
कितने करोड़ रुपये के विशेष पुनर्निर्माण पैकेज की मांग की गई है?
उन्होंने एक हजार करोड़ रुपये के विशेष पुनर्निर्माण पैकेज की मांग उठाई है।
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