असम में बाढ़ और आपदा प्रबंधन फंड के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी कैग की एक हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए केंद्र और असम सरकार दोनों पर तीखे सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए अपने संदेश में उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों ही स्तर की सरकारें आपदा राहत के लिए आवंटित धन का प्रभावी ढंग से उपयोग करने में नाकाम साबित हुई हैं।
कैग रिपोर्ट के आंकड़े और फंड का वितरण
गौरव गोगोई ने कैग के निष्कर्षों को सामने रखते हुए वित्तीय वर्ष 2024-25 के आंकड़ों का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस अवधि के दौरान केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि यानी एनडीआरएफ के तहत कुल 11,474 करोड़ रुपये मंजूर किए थे, लेकिन इसमें से केवल 5,356 करोड़ रुपये ही राज्यों को हस्तांतरित किए गए। इस प्रकार, करीब 6,118 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि बिना खर्च किए ही रोक ली गई या अप्रयुक्त रह गई।
इसके साथ ही, उन्होंने यह भी दावा किया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा और राज्यों को मिलने वाली विशेष सहायता का 83 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बिना इस्तेमाल के पड़ा रहा। गोगोई ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि मार्च 2025 तक असम के भीतर भी आपदा प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण फंड का एक बड़ा हिस्सा खर्च नहीं हो पाया था। सरकार के कामकाज पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अधिकतम शासन और न्यूनतम सरकार के दावों के विपरीत, आज जमीनी हकीकत यह है कि डबल इंजन सरकार जरूरतमंद लोगों तक समय पर राहत फंड पहुंचाने में पूरी तरह असमर्थ है।
असम में बाढ़ की वर्तमान स्थिति और राहत कार्य
एक तरफ जहां राजनीतिक बहस छिड़ी हुई है, वहीं दूसरी तरफ राज्य में बाढ़ की विभीषण स्थिति में कुछ सुधार के संकेत भी मिलने लगे हैं। रविवार को बाढ़ से प्रभावित होने वाले लोगों की कुल संख्या घटकर लगभग 51,000 के आसपास रह गई। हालांकि, इस साल प्राकृतिक आपदा और बाढ़ के कारण राज्य में अब भी कुल 104 लोगों की जान जा चुकी है, जो इस संकट की गंभीरता को दर्शाता है।
राज्य के विभिन्न हिस्सों में राहत और बचाव कार्य जारी हैं, लेकिन प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, अभी भी कई इलाके पानी से घिरे हुए हैं। वर्तमान में राज्य के गोलाघाट, शिवसागर, नगांव, धेमाजी और जोरहट जिलों के कुल 14 राजस्व चक्र और 170 गांव बाढ़ की चपेट में बने हुए हैं। स्थानीय प्रशासन और राहत दल स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि प्रभावित आबादी तक आवश्यक सहायता पहुंचाई जा सके।
फसल, मवेशी और बुनियादी ढांचे को नुकसान
बाढ़ के पानी के घटने के साथ ही इससे हुए नुकसान का दायरा भी सामने आ रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य में अभी भी 51,800 से अधिक लोग बाढ़ से किसी न किसी रूप में प्रभावित हैं। इसमें सबसे बुरी स्थिति नगांव जिले की है, जहां सबसे ज्यादा 32,132 लोग प्रभावित हुए हैं। इसके बाद जोरहट में 7,426 और शिवसागर में 5,676 लोग इस आपदा का सामना कर रहे हैं।
आपदा के कारण कृषि क्षेत्र को भी भारी क्षति पहुंची है। असम में करीब 3,628.17 हेक्टेयर कृषि भूमि अभी भी पानी में डूबी हुई है, जिससे किसानों की फसलों को बड़ा नुकसान हुआ है। इसके अलावा, बाढ़ के पानी से 18,474 मवेशी और पालतू जानवर भी प्रभावित हुए हैं। राज्य के कई इलाकों से सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे के टूटने या क्षतिग्रस्त होने की खबरें भी लगातार मिल रही हैं, और संबंधित अधिकारी बाढ़ के कुल प्रभाव का आकलन करने में जुटे हुए हैं।



















