15 अगस्त को आयोजित होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह से ठीक पहले पूरे असम में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद मजबूत और सतर्क कर दिया गया है। राज्य प्रशासन ने महत्वपूर्ण स्थानों, समारोह स्थलों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में निगरानी का दायरा काफी बढ़ा दिया है, ताकि राष्ट्रीय पर्व का आयोजन पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से पूरा हो सके।
संवेदनशील क्षेत्रों और अंतरराज्यीय सीमाओं पर पुलिस की कड़ी नजर
सुरक्षा एजेंसियों ने कार्यक्रम स्थलों, महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों, सार्वजनिक स्थानों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में चौकसी बढ़ा दी है। इसके अलावा पड़ोसी राज्यों से लगने वाली अंतरराज्यीय सीमाओं पर विशेष तलाशी और निगरानी अभियान चलाया जा रहा है ताकि किसी भी तरह की असामाजिक या उग्रवादी गतिविधि को नाकाम किया जा सके। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पूरे राज्य में बिना किसी बाधा के समारोह संपन्न कराने के लिए लगातार गश्त और निगरानी जारी है।
बाढ़ की स्थिति के कारण उग्रवादी संगठनों ने नहीं बुलाया बंद
सुरक्षा उपायों में यह बढ़ोतरी उल्फा (आई) और एनएससीएन/जीपीआरएन जैसे उग्रवादी संगठनों द्वारा दिए गए बहिष्कार के आह्वान के बाद की गई है। इन गुटों ने असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और नागालैंड के लोगों से स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों में शामिल न होने का अनुरोध किया है। हालांकि, पिछले वर्षों के विपरीत इस बार इन संगठनों ने पूर्ण बंद या आम हड़ताल की घोषणा नहीं की है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में जारी बाढ़ की स्थिति को देखते हुए उग्रवादी संगठनों ने बंद की जगह केवल बहिष्कार की अपील की है।
गुवाहाटी में मुख्य समारोह और उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक
राज्य स्तरीय मुख्य आयोजन गुवाहाटी के खानापारा मैदान में होगा, जहां असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। वहीं राज्य के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी विभिन्न जिला मुख्यालयों में आयोजित कार्यक्रमों की अगुवाई करेंगे। समारोहों की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए इस सप्ताह एक उच्च स्तरीय बैठक भी आयोजित की गई, जिसकी संयुक्त अध्यक्षता मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक ने की। इस वर्चुअल बैठक में सभी जिलों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।



















